Publish Date: Sun, 13 Aug 2017 (19:28 IST)
Updated Date: Sun, 13 Aug 2017 (19:30 IST)
श्रीनगर। स्वतंत्रता दिवस को कश्मीर में प्रलय के दिन के रूप में लिया जा रहा है। उसकी उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। आतंकवादियों की दहशत के कारण आतंकवादग्रस्त दूरस्थ दुर्गम इलाकों से कई उन गांवों के लोगों ने अस्थाई तौर पर पलायन किया है जिन्हें आतंकवादियों ने पोस्टर लगा कर 15 अगस्त की बजाय 14 अगस्त को आजादी का दिन मनाने के लिए कहा है।
सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस मामले को सभी द्वारा छुपाया जा रहा है। बताया जाता है कि हिज्बुल मुजाहिदीन तथा लश्करे तौयबा के आतंकियों की ओर से धमकी भरे पोस्टर लगा कर लोगों को 15 अगस्त मनाने से मना करते हुए 14 अगस्त को जश्ने आजादी मनाने के लिए कहा गया है। 14 अगस्त पाकिस्तान की आजादी का दिन होता है।
ऐसे ही पोस्टर कश्मीर वादी के अतिरिक्त जम्मू संभाग के दूरस्थ इलाकों में भी दिखे हैं। नतीजतन जहां जहां 15 अगस्त को न मनाने तथा 14 अगस्त मनाने की धमकियां आतंकियों की ओर से जारी हुई हैं वहां दहशत के माहौल ने लोगों ने पलायन की धमकी दी है।
दहशत का क्रम यहीं खत्म नहीं हो जाता है। 15 अगस्त को लेकर जो दहशत आतंकवादियों द्वारा फैलाई जा रही है उसका परिणाम है कि सुरक्षाबल भी जबरदस्त दहशत में हैं। यही कारण है कि वे इस दहशत के चलते जिस प्रकार ताबड़तोड़ तलाशी अभियान छेड़े हुए हैं उन्होंने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है।
पिछले कई दिनों से कश्मीरियों को गहन तलाशी अभियानों के दौर से गुजरना पड़ रहा है। लंबी-लंबी कतारों में खड़े कश्मीरियों को तलाशी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। हालत यह है कि कई स्थानों पर सुरक्षाकर्मी राहगीरों से एक-दूसरे की तलाशी लेने पर जोर इसलिए डालते थे क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं कोई मानव बम न हो और वह फूट न जाए। एक सुरक्षाधिकारी का कहना था :‘हम तलाशी अभियान छेड़ने पर मजबूर हैं क्योंकि आतंकी खतरा बहुत ज्यादा है इस बार।’
सुरेश एस डुग्गर
Publish Date: Sun, 13 Aug 2017 (19:28 IST)
Updated Date: Sun, 13 Aug 2017 (19:30 IST)