झोपड़ी में रहता है यह भाजपा विधायक, घर बनाने के लिए समर्थक मांग रहे हैं चंदा

मंगलवार, 29 जनवरी 2019 (18:38 IST)
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के राज में भाजपा का करीब-करीब हर विधायक गच्च और सम्पन्न रहा है। इस बार शिवराज की भले ही सरकार नहीं बनी हो लेकिन उनकी पार्टी का एक विधायक सीताराम आदिवासी श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता रामनिवास रावत को तीसरे प्रयास में हराने में सफल रहे। सीताराम के झोपड़ीनुमा घर में रहते हैं और स्थानीय लोग उनके लिए चंदा इकठ्‍ठा करके मकान की सौगात देने जा रहे हैं।
 
स्थानीय लोगों को यह रास नहीं आ रहा है कि उन्होंने जिस नेता को विधानसभा की चौखट तक पहुंचाया है, वो झोपड़ी में रहे। यही कारण है कि लोग चंदा करके भाजपा विधायक के लिए मकान बनाने की जुगत में हैं।
 
भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी बहुत सीधे साधे हैं और प्रदेश में पड़ रही भीषण ठंड की वजह से शाम को वे अपनी झोपड़ी के बाहर ही अलाव लगाकर तापने दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि उनके पास पैसा नहीं है, इसलिए वे अपने परिवार के साथ झोपड़ीनुमा कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं।
 
सनद रहे कि सीताराम कभी कांग्रेस के सदस्य हुआ करते थे लेकिन पार्टी में उन्हें महत्व नहीं मिला तो वे भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने 2 बार विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन दोनों ही बार हार गए। तीसरी बार वे भाजपा के टिकट पर चुनावी अखाड़े में कूदे और कांग्रेसी नेता रामनिवास रावत को हराने में सफल रहे।
 
सीताराम के समर्थक धनराज का कहना है कि उन लोगों को अच्छा नहीं लगता कि उनका जनप्रतिनिधि झोपड़ीनुमा घर में रहे, यही कारण है कि उनके चहेतों ने चंदा करके पक्का मकान बनाने की योजना बनाई। उनकी इस योजना पर र अमल भी शुरू हो गया है। चूंकि सीताराम कराहल विकासखंड के पिपरानी गांव के रहने वाले हैं. इसी गांव में अब उनका पक्का मकान बनाने की शुरुआत हो चुकी है। उनके मकान के लिए लोगों ने 500-1000 का चंदा भी दिया है।
 
भाजपा विधायक सीताराम अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। सीताराम की पत्नी इमरती बाई का कहना है कि उनके पति और परिवार लंबे अरसे से संघर्ष करता आ रहा है। अब दिन फिरे हैं, उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी स्थिति सुधरेगी और जीवन सुखमय होगा. सीताराम तो जनता के काम हो ही अपना काम मानते हैं, इसलिए जनता भी उन्हें अपना मानती है। 
 
सीताराम ने विधानसभा चुनाव लड़ते वक्त जो शपथ पत्र दिया था, उसके अनुसार उनके पास केवल 46 हजार 733 रुपए थे। 25 हजार नकद और 2 बैंक खातों में 21 हजार 233 रुपए जमा थे। उनके पास 2.817 एकड़ जमीन और 600 वर्ग की झोपड़ी है, जो उन्हें विरासत में मिली थी।

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