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हादसों का इतिहास है 'कटरा-वैष्णोदेवी हेलीकॉप्टर सेवा'

पहले भी लगातार 11 वर्षों तक प्रतिबंध रहा है इस सेवा पर

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सुरेश एस डुग्गर

कटरा-वैष्णोदेवी (जम्मू कश्मीर)। हेलीकॉप्टर हादसे में 7 लोगों की मौत के साथ जो कटरा-वैष्णोदेवी हेलीकॉप्टर सर्विस आज सुर्खियों में आई है, उसका हादसों का एक लंबा इतिहास रहा है। इस हवाई मार्ग पर होने वाले हादसों के कारण इस मार्ग पर करीब 11 सालों तक हेलीकॉप्टर उड़ानों पर प्रतिबंध भी लग चुका है।
आज हुए हेलीकॉप्टर हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई। इसमें पायलट भी अपने आपको बचा नहीं पाया। ऐसे ही करीब तीन हादसे पहले भी हो चुके हैं। इन तीन हादसों में 12 लोगों की पहले भी मौत हो चुकी है। आज की संख्या भी मिला लें तो कुल 19 लोग कटरा-वैष्णोदेवी हवाई मार्ग पर हेलीकॉप्टर हादसों में मारे जा चुके हैं।
 
करीब तीन साल पहले इसी हवाई मार्ग पर 30 दिसंबर 2012 को हादसा हुआ था। खुदा का शुक्र था कि तब पवन हंस सेवा के पायलट की सूझबूझ से अधिक नुकसान नहीं हुआ था और उसने पहाड़ियों से बचाते हुए हेलीकॉप्टर को खेतों में उतार लिया, फिर भी 2 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे, पर 30 जनवरी 2001 और जुलाई 1988 में हुए दो हेलीकॉप्टर हादसों में कोई भी खुशनसीब नहीं था, तब कुल 12 लोग मारे गए थे।
 
जुलाई 1988 में जब सांझी छत हेलीपैड पर हादसा हुआ तो पवन हंस के हेलीकॉप्टर में सवार 6 श्रद्धालुओं और पायलट की मौत हो गई। इसी प्रकार के एक अन्य हादसे में 30 जनवरी 2001 को इसी हेलीपैड पर हुए हादसे में सेना के एक ब्रिगेडियर, कैप्टन, मेजर और दो पैरा कमांडो की मौत उस समय हो गई जब सेना का चेतक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया।
 
कटरा-वैष्णोदेवी हेलीकॉप्टर सेवा के असुरक्षित होने पर सवाल 1988 के हादसे के बाद से ही लगने लगे थे, तब इसे असुरक्षित करार देते हुए प्रतिबंधित कर दिया गया तो करीब 11 साल के प्रतिबंध के बाद जुलाई 2001 में इसे फिर से चालू किया गया तो कुछ ही महीनों बाद फिर से हादसा हो गया।
 
इस हवाई मार्ग पर होने वाले हेलीकॉप्टर हादसों के पीछे कई कारण गिनाए जाते रहे हैं। सबसे बड़ा कारण सांझी छत हेलीपैड के साथ लगती पहाड़ी का है, जिससे टकराने का खतरा हमेशा बरकरार रहता है। मौसम के खराब होने का खतरा तो है ही साथ ही हेलीकॉप्टर चलाने वाली कंपनियों द्वारा राजस्व कमाने के चक्कर में पायलटों तथा हेलीकॉप्टरों को तनिक भी आराम नहीं देने का आरोप है।
 
प्रतिदिन हर पांच मिनट के बाद हेलीकॉप्टर द्वारा कटरा से सांझी छत और सांझी छत तक की उड़ान भरी जाती है। रिजर्व हेलीकॉप्टर नहीं हैं। पायलट हमेशा थकान होने की शिकायत करते रहे हैं, पर सेवा देने वाली दोनों कंपनियों द्वारा कभी इन शिकायतों पर कान ही नहीं धरा गया, जिसका नतीजा सामने है और खामियाजा श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है, जिनमें इस हादसे के बाद फिर से डर व्याप्त हो गया है।

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