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जब 1000 लोगों का दिमाग एक व्यक्ति में आता है तब कोई फोटो जर्नलिस्ट बनता है-दिवाकर

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Parul University
वड़ोदरा। पारूल विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन की ओर से विगत दिनों फोटो जर्नलिज्म विषय पर तीन दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथिइंडिया टूडे के फोटो जर्नलिस्ट पुरुषोत्तम दिवाकर ने फेकल्टी सदस्यों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को संबोधित किया।
 
पुरुषोत्तम दिवाकर ने वेबिनार में कहा कि जब 100 लोगों का दिमाग एक व्यक्ति में आता है तो वह पत्रकार बनता है। जब एक हजार लोगों का दिमाग एक व्यक्ति में आता है तब जाकर के कोई एक व्यक्ति फोटो जर्नलिस्ट बनता है। उन्होंने कहा कि पानी पर चलना, पहाड़ पर चलना, मुर्दाघरों में फोटो खींचना तो फैशन शो कवर करना, दर्दनाक एवं खुशी के मौकों पर पूरी शिद्दत के साथ फोटो के माध्यम से घटना को परोसना ही एक फोटो जर्नलिस्ट का कार्य है।
 
एक फोटो जर्नलिस्ट को अनेक पहलुओं का ध्यान रखते हुए समाज को सही एवं सुंदर चीजों को भी परोसना होता है। उन्होंने विजुअल राइटिंग, फोटो जर्नलिस्ट के स्किल, विजुअल लैंग्वेज, कैमरा, इमेज क्वालिटी, एंगल, लाइट, कलर कॉम्बीनेशन जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने अपने इंडिया टुडे के लिए कोरोना काल के दौर में खींचे गए फोटो पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। फोटो जर्नल्जिम के क्षेत्र में जॉब के अवसरों पर भी बात की। 
 
उन्होंने बताया कि  सलमान खान के हिरण प्रकरण के एक ब्लेक एंड व्हाइट फोटो ने किस प्रकार से आप के फोटो जर्नलिज्म के करियम में नया मोड़ ला दिया, इस बारे में भी विस्तार से बताया। प्रो. डॉ. रमेश कुमार रावत ने प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन दिया तथा अंत में आभार व्यक्त किया। वेबिनार में देश के विभिन्न प्रदेशों से सैकड़ों विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं पत्रकारों ने भाग लिया।
 

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