Publish Date: Sat, 20 Jun 2015 (11:47 IST)
Updated Date: Sat, 20 Jun 2015 (12:35 IST)
चेहरा भले गंभीर है
अंदर से वे धीर हैं ।
कहते कम हैं सुनते सब
ऐसी कुछ तासीर है ।।
मोटा सा चश्मा हैं पहनते
रोज सुबह और शाम टहलते ।
उम्र हुई जो उनकी अब,
कभी हैं चिढ़ते, कभी बहलते।।
चिंता उन्हें हर बात की होती।
काम हैं सारे बहुत ही खास
उनके जैसा ना कोई होना
हीरा हो सा चांदी सोना ।