चेहरा भले गंभीर है अंदर से वे धीर हैं । कहते कम हैं सुनते सब ऐसी कुछ तासीर है ।। मोटा सा चश्मा हैं पहनते रोज सुबह और शाम टहलते । उम्र हुई जो उनकी अब, कभी हैं चिढ़ते, कभी बहलते।। सारी बातें, छोटी मोटी, चिंता उन्हें हर बात की...