सच ही तो है... जिंदगी के भारी दिनों में अगर एक कंधा भी सर रखने को मिल जाए तो वह खुदा की नेमत ही लगता है। फिर कई जिम्मेदारियों से घिरी हुई वर्किंग वूमन के लिए तो यह आसरा तपती धूप में ठंडे पानी के झरने जैसा हो जाता है। मुश्किलें किसके जीवन में नहीं आतीं।
ऐसे में अगर कोई 'इनर सर्कल' आस-पास हो तो जीवन की चुनौतियों से लड़ने का हौसला मिल जाता है। अगर ऐसा साथ हर व्यक्ति को मिल जाए तो शायद मानसिक परेशानियों का प्रतिशत काफी कम हो जाए और हताशा में लोग गलत कदम उठाने से बच जाएँ।
हर वर्किंग वूमन को एक इनर सर्कल की जरूरत तो होती ही है। चाहे वो आपकी माँ हों, पिता हों, भाई-बहन, ननद, भाभी, कोई मित्र या फिर सहकर्मी। एक ऐसा व्यक्ति, जो आपके सुख-दुख का साझेदार हो सके, आपकी परेशानियों, तनाव और ऑफिस की तमाम पॉलिटिक्स के बीच आपको मानसिक संबल दे सके, आपको भले ही मार्गदर्शन न दे पाए, लेकिन एक सकारात्मक माहौल आपके आस-पास बनाए रखे।
मॉडल और फैशन डिजाइनर फिरोज गुजराल भी इस मामले में अपने पति और ससुराल वालों के सपोर्ट की तारीफ करते नहीं थकतीं। वे प्रसिद्ध चित्रकार तथा मूर्तिकार सतीश गुजराल की बहू हैं और पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल उनके ताऊ ससुर हैं। फिरोज कहती हैं- 'मैं बहुत छोटी उम्र में शादी कर इस घर में आ गई थी।
जाहिर था कि दुनियादारी के मामलों में मुझे जरा भी समझ नहीं थी। मुझे खाना पकाना भी नहीं आता था और मैं सारे घर में दिनभर बचकानी हरकतें करती घूमती रहती थी, लेकिन मेरे पति और सास-ससुर ने मुझे कभी किसी भी बात पर डाँटा या टोका नहीं, बल्कि वो मुझे निरंतर आगे बढ़ने को प्रेरित करते रहे।
शादी के बाद उन्होंने मुझे आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया और मेरे हर काम को उत्साहपूर्ण समर्थन दिया। यहाँ तक कि मेरी दोनों ननदों ने भी हमेशा मुझे नई चीजें सीखने और अपनी क्रिएटिविटी को बढ़ाने के तरीके सिखाए। मैं जानती हूँ कि जिंदगी के हर मोड़ पर वे लोग मेरे साथ खड़े हैं।'