पति-पत्नी का रिश्ता दो दिलों का रिश्ता होता है, जिसमें प्रेम और विश्वास होता है। दो शरीरों के साथ जब दो दिल एक-दूजे से जुड़ जाते हैं तो एक पल की जुदाई भी असहनीय हो जाती है।
व्यक्ति उम्र से भले ही बूढ़ा हो जाए परंतु वह विचारों से हमेशा युवा रहता है। पति-पत्नी के रिश्ते में भी ऐसा ही होता है। पति-पत्नी जब तक अपने विचारों में नवीनता व युवापन का जोश बरकरार रखेंगे तब तक वे एक-दूसरे से एक मजबूत बंधन से जुड़े रहेंगे।
यदि आप सोचते हैं कि हम दोनों अभी भी जवान हैं, उम्र ढलने से क्या होता है तो ऐसी सोच हमेशा आपमें अपने जीवनसाथी के प्रति और अधिक लगाव व प्रेम उत्पन्न करेगी। ढलती उम्र को सच मानकर जीने के जोश में कमी कर देना व जीवनसाथी से दूरियाँ बनाना अच्छा नहीं है।
* जब हो जीवनसाथी दूर :- जब आपका जीवनसाथी कुछ दिनों के लिए आपसे दूर जा रहा हो और आपको उसकी याद सता रही है तो उससे फोन पर बात करके या खत लिखकर अपने प्यार को अभिव्यक्त करें। इंतजार के लम्हों में प्यार के रंग भरना आप दोनों को एक-दूसरे के और करीब ले आएगा। आप चाहें तो अपने अनुभवों को डायरी या एसएमएस के जरिए भी अपने जीवनसाथी तक प्रेषित कर सकते हैं।
कहीं दूरियाँ न कर दें दूर :- प्यार बढ़ाने से बढ़ता है। पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे से अपेक्षाएँ रहती हैं। एक-दूजे को जानकर आप उनके मन की सारी बातें जान जाते हैं। पति-पत्नी दोनों ही चाहते हैं कि वियोग में भी वे एक-दूसरे की खोज-खबर लें तथा दोनों में प्यार हमेशा बरकरार रहे।
कई बार जीवनसाथी की एक-दूजे के प्रति लापरवाही उनमें दूरिया बनाती जाती है और धीरे-धीरे ये दूरियाँ इतनी अधिक बढ़ जाती हैं कि प्यार के इस रिश्ते में से प्यार तो कहीं लुप्त हो जाता है और औपचारिकताएँ बाकी रह जाती हैं।
अपने जीवनसाथी को प्यार दें :- प्यार में कोई सौदा नहीं होता है। यह तो एक स्वाभाविक क्रिया है। प्यार पति-पत्नी को एक-दूजे के करीब लाने का एक जरिया है। दाम्पत्य के इस रिश्ते में प्यार की मिठास घोलकर दूरियों को मिटाइए और अपने अहम् को त्यागकर एक-दूसरे को दिल से अपनाइए।