Relationship %e0%a4%8f%e0%a4%a8%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%86%e0%a4%88 %e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a4%be %e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87 %e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a5%80 109060500084_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

एनआरआई दुल्हा जैसे लॉटरी

Advertiesment
वैवाहिक विज्ञापन
- मोनिका शर्म

NDND
विदेशी दूल्हे का आकर्षण आज भी हमारे समाज में इतना ज्यादा है कि बेटी के माता-पिता चट मँगनी पट ब्याह में देर नहीं करते। लाखों में कमाने वाले इन लड़कों के परिवारों द्वारा दिए गए वैवाहिक विज्ञापनों पर नजर डालें तो पता चलता है कि इन्हें भी शादी की जल्दबाजी होती है।

ऐसे विदेशी दूल्हे आमतौर पर एक-दो हफ्ते या महीने के लिए भारत आते हैं। यही कारण है कि ऐसी शादियाँ इतनी जल्दबाजी में होती हैं कि लड़की वालों को इतना वक्त ही नहीं मिलता कि वे होने वाले वर की पूरी जाँच-पड़ताल कर सकें।

एनआरआई और ग्रीन कार्ड होल्डर कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनकी चमक से वैवाहिक विज्ञापन अटे रहते हैं, जिन्हें देखकर हमारे समाज में हर माता-पिता का मन बहक-सा जाता है। सात समंदर पार से बेटी के लिए रिश्ता आ जाए तो उन्हें लगता है कि बिटिया की किस्मत खुल गई। इसके पीछे उनकी यही सोच होती है कि वहाँ की हाई-फाई लाइफ स्टाइल, बिना बंदिशों का समाज और ऊँचा जीवन स्तर सभी कुछ उनकी बेटी की किस्मत सँवार देगा।

  एनआरआई और ग्रीन कार्ड होल्डर कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनकी चमक से वैवाहिक विज्ञापन अटे रहते हैं, जिन्हें देखकर हमारे समाज में हर माता-पिता का मन बहक-सा जाता है। सात समंदर पार से बेटी के लिए रिश्ता आ जाए तो उन्हें लगता है कि बिटिया की किस्मत खुल गई।      
शादी के बाद बदलते हैं रंग :
घरेलू और संस्कारयुक्त लड़कियों की तलाश में भारत आने वाले ये एनआरआई परिवार अक्सर विदेश लौटते ही रंग-ढंग बदलना शुरू कर देते हैं। ऐसे रिश्तों की हकीकत तब सामने आती है जब लड़की शादी करके पराए देश में पहुँचती है या थोड़े दिनों में ही वीसा भेज देने का बात कर विदेश लौटने वाले दूल्हे बरसों लड़की की खोज-खबर नहीं लेते। कई तो दूसरे देश में बैठे ही तलाक के कागजात तक भारत भेज देते हैं।

अकेली पड़ जाती है आपकी लाड़ली :
ढेर सारे सपने और आशियाना सजाने का अरमान लिए विदेश जाने वाली बेटियाँ कई बार तो ऐसे जाल में फँस जाती हैं जिससे निकलना नामुमकिन हो जाता है। वे बिलकुल अकेली पड़ जाती हैं। वहाँ उनका दुख बाँटने के लिए न तो माता-पिता होते हैं, न ही कोई दोस्त या रिश्तेदार। वे शिकायत करें भी तो किससे वहाँ उनका कोई अपना नहीं होता।

हर साल सामने आते हैं कई मामले :
हमारे देश के लगभग हर हिस्से में कोई न कोई परिवार एनआरआई परिवारों के झाँसे में आ चुका है। माना जाता है कि अकेले पंजाब प्रांत में 35000 ऐसी लड़कियाँ हैं जिनकी जिंदगियाँ विदेश में बसे दूल्हों ने उजाड़ दी है।

केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष मृदुला सिन्हा का मानना है कि उन्होंने खुद ऐसे कई केस सुलझाए हैं जिनमें अप्रवासी भारतीय परिवारों में ब्याही लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उन्होंने यह भी माना कि माता-पिता में विदेशों में बसे लड़के से बेटी की शादी का जुनून सवार रहता है। ऐसे में जल्दबाजी में बँधे ऐसे बंधन बाद में दुखदायी साबित होते हैं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi