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कैसी पड़ोसन हैं आप?

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कैसी पड़ोसन हैं आप किरण बाला
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पूरी द‍ुनिया में आपको अच्छे-बुरे दोनों तरह के लोग देखने को मिल जाएँगे। एक अच्छी पड़ोसन जहाँ आपकी 'बेस्ट फ्रेंड' बन जाती है, वहीं स्वभाव से बुरी पड़ोसन आपका सुख-चैन छीन डालती है। तो यदि आप अच्छी पड़ोसन चाहती हैं तो खुद को भी अच्छी पड़ोसन साबित कर डालिए।

आइए आप स्वयं तय करें आप किस श्रेणी की पड़ोसन की गिनती में आती हैं?

स्वार्थी प्रवृत्ति
उन पड़ोसनों की भी कमी नहीं है जो स्वार्थी प्रवृत्ति की हैं। अपने मतलब से पड़ोसनों से संबंध बढ़ाती हैं और जब वह पूरा हो जाता है तो अपने हाथ खींच लेती हैं। ऐसी पड़ोसन अपने मतलब के लिए सामने वाली से मीठा बोलती हैं तथा अपने आपको उसका सबसे बड़ा शुभचिंतक बताती हैं जबकि उनके मन में पहले ही छल-कपट होता है।

ईर्ष्यालु प्रवृत्ति
बहुत-सी पड़ोसन ईर्ष्यालु स्वभाव की होती हैं। वे अपने से आगे किसी दूसरे को बढ़ते देख नहीं सकतीं। उनकी कोई पड़ोसन उनसे अधिक पढ़ी-लिखी, योग्य, ऊँचे ओहदे पर या अधिक कमाऊ हो या सामाजिक रूप से अधिक प्रतिष्ठित हो तो ये सब बातें उन्हें बर्दाश्त नहीं होतीं। यदि सामने वाली रूप सौंदर्यवान है, गुणों की खान है, तो उसका चरित्र हनन करने से भी ये बाज नहीं आतीं। ईर्ष्यालु स्वभाव की पड़ोसन अपनी पड़ोसन का नुकसान होते देख खुश होती है, उसके सुख से दुःखी तथा दुःख से खुश होती हैं।
  पूरी द‍ुनिया में आपको अच्छे-बुरे दोनों तरह के लोग देखने को मिल जाएँगे। एक अच्छी पड़ोसन जहाँ आपकी 'बेस्ट फ्रेंड' बन जाती है, वहीं स्वभाव से बुरी पड़ोसन आपका सुख-चैन छीन डालती है। तो यदि आप अच्छी पड़ोसन चाहती हैं तो खुद को भी अच्छी पड़ोसन साबित कर डालिए।      


तुनकमिजाज पड़ोसन
इसी प्रकार कुछ पड़ोसनें तुनकमिजाज या झगड़ालू प्रवृत्ति वाली होती हैं। उन्हें लड़ने-झगड़ने का कोई भी बहाना चाहिए। यहाँ तक कि पानी, बिजली, बच्चों के झगड़े, साफ सफाई आदि को लेकर वे अपनी पड़ोसन का सिर भी फोड़ सकती हैं। ऐसी पड़ोसनों का पारा सदैव सातवें आसमान पर रहता है।

तमाशा देखने वाली पड़ोसन
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कुछ ऐसी पड़ोसनें भी होती हैं जो एक की चार लगाती हैं और फिर तमाशा देखती हैं। सास के विरुद्ध बहू के तथा बहू विरुद्ध सास के कान भरती हैं। ऐसी पड़ोसनें पहले तो घनिष्ठता बढ़ाती हैं, फिर आपका विश्वास जीतती हैं और फिर अपनी वाली पर उतर आती हैं।

माँगीलाल पड़ोसन
पड़ोसनों में कई ऐसी भी मिल जाएँगी जो माँगने की आदत से मजबूर हैं। वे नमक-मिर्च, दूध-दही, शक्कर, आटा, बेसन आदि से लेकर ज्वेलरी तक माँगने में संकोच नहीं करतीं तथा फिर लौटाने का नाम नहीं लेतीं।

विघ्नसंतोषी प्रवृत्ति
कुछ पड़ोसनें विघ्नसंतोषी होती हैं। लोगों का काम बिगाड़ने में उन्हें बड़ा मजा आता है। यदि पड़ोस में कोई बीमार है या किसी की परीक्षा चल रही है तो वे जानबूझकर अपना टीवी, टेप आदि तेज आवाज में बजाएँगी। यहाँ तक कि अपने घर का कचरा पड़ोसी के घर की तरफ डाल देती हैं ताकि वहाँ गदंगी हो जाए। ऐसी पड़ोसन केवल अपनी सुविधा का ध्यान रखती हैं।

झाँकू पड़ोसन
कुछ पड़ोसनें दूसरों की जिंदगी में झाँकने की आदत से ग्रस्त होती हैं। पड़ोसी की बेटी कब, कहाँ जाती है, किसके साथ उसका चक्कर चल रहा है, कौन उसे छोड़ने आता है, किस सास-बहू, देरानी-जिठानी, ननद-भौजाई या भाई-भाई, पिता-पुत्र अथवा पति-पत्नी की बन नहीं रही, किसके यहाँ कौन मेहमान आया, क्यों आया, कब गया आदि सारी खबरें इनके पास होती हैं और फिर ये चटखारे लेकर उन्हें सुनाती या बताती हैं।

सहयोगी प्रवृत्ति
निःसंदेह कुछ पड़ोसनें सहयोगी प्रवृत्ति की होती हैं तथा सुख-दुःख में बिना आमंत्रण के शामिल होती हैं। वे सच्ची हितैषी या शुभचिंतक होती हैं और विश्वसनीय भी। उनके मन में किसी प्रकार का छल-कपट नहीं होता, उनका मन निर्मल होता है। वे अपनी तरफ से कोई ऐसा कार्य, व्यवहार या आचरण नहीं करतीं, जिसकी वजह से आपको परेशानी हो। ऐसी पड़ोसन बड़े सौभाग्य से मिलती हैं।

हो सकता है आप इनमें से एक हों या इनमें से कुछ आपसे मिली हों। तो ऐसे में दुआ करें कि आप भी आखिरी वाली पड़ोसन की तरह बनें और आपको ऐसी ही पड़ोसन मिले जो सुख-दुख में आपका साथ दें सकें।

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