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दबाव में की गई शादी समझौता

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शादी समझौता फ्यूचर मीडिया नेटवर्क
लिव-इन रिलेशनशिप का दौर भारतीय शहरों में भी पहुँच चुका है। सिंगल रहना भी फैशन में है, लेकिन इंटरनेट की इस 21वीं सदी में भी शादी करने का दबाव अभी कम नहीं हुआ है। आप समाज के किसी भी वर्ग का हिस्सा क्यों न हों, आप अगर बीस बसंत को पार कर गए हैं, तो आप पर शादी करने के लिए दबाव निरंतर बढ़ता जाएगा। यह एक हकीकत है। माता-पिता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जल्दी या थोड़ी देर से उनके बच्चे हर हालत में विवाह की डोर से बँध जाएँ।

दबाव जो भी हो, लेकिन सिर्फ शादी करने के लिए शादी नहीं करनी चाहिए। कहने का अर्थ यह है कि गलत या खराब कारण की वजह से शादी नहीं करनी चाहिए। मसलन, घर पर स्थिति विकट होती जा रही है और आपको लगता है कि मुक्ति का रास्ता सिर्फ शादी है। बहुत-से लोगइस रास्ते को अपनाते हैं, लेकिन यह अक्सर कुएँ में से निकलकर खाई में गिरने का रास्ता होता है। पहला व्यक्ति जो मिले उसी से शादी करने की बजाय बेहतर है कि एक या दो बरस अकेले ही काट लिए जाएँ। यह अच्छी बात है कि आपके माता-पिता को लड़का/लड़की पसंदहै लेकिन जिंदगी आपकी है, आपको जीनी है। इसलिए शादी करने का यह पर्याप्त कारण नहीं है। बरसों बाद तक आप उन्हीं की पसंद के व्यक्ति के साथ फँसे रहेंगे जो आपकी पसंद का या सपनों का नहीं होगा।

बच्चों की चाहत से प्रेरित होकर भी बहुत-से लोग शादी कर लेते हैं, लेकिन क्या आप बच्चों का पालन ऐसी स्थिति में करना चाहेंगे जो आदर्श न हो? समस्या यह है कि बच्चों के बड़े होने पर भी आप उसी व्यक्ति के साथ फँसे होते हैं जिसे आप पसंद नहीं करते। कोई व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता लेकिन कम से कम अपने बच्चों के लिए ऐसा पिता या माँ तो ले आएँ जिसे आप पसंद करते हों और उसका सम्मान करते हों। सामाजिक दबाव में भी शादियाँ होती हैं। आपके सभी दोस्तों की शादी हो रही है तो क्या हुआ?

उन आंटियों पर तवज्जो न दें जो आपसे पूछती रहती हैं कि आपकी शादी कब हो रही है। खराब शादी से बेहतर है अकेले रहना। वैसे शादी करने के लिए अजीब-अजीब किस्म के दबाव होते हैं। कभी माँ-बाप की नजर में अच्छा लड़का मिल जाता है जिसे करियर के लिए छोड़ना हिमाकत समझी जाती है, कभी यह दुहाई दी जाती है कि प्रोफेशनल जीवन में तनाव ज्यादा होता है। इसलिए भावनात्मक समर्थन के लिए जीवनसाथी का होना आवश्यक होता है।

बुजुर्गों के लिए अपने बच्चों की शादी कर देना अपनी जीवन संध्या का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। उनके अनुसार करियर महत्वपूर्ण है लेकिन अच्छे रिश्ते को कैसे इंकार किया जा सकता है! लेकिन इस जनरेशन गैप को पाटा जा सकता है। अगर आपको इस बात का यकीन है कि आप जीवन में ठीक से सैटल होने से पहले शादी नहीं करना चाहते, तो यह बात आप अपने अभिभावकों को समझा सकते हैं। वे दरअसल, आपको खुश देखना चाहते हैं, लेकिन खराब कारण को लेकर किसी ऐसे व्यक्ति से जिसे आप पसंद नहीं करते, भले ही दबाव किसी भी प्रकार के क्यों न हों, शादी नहीं करें। याद रखें, दबाव में आकर केवल 'समझौता' किया जा सकता है जबकि 'शादी' प्रेम की बुनियाद पर खड़ा जीवन-भर का रिश्ता होता है।

जल्दी टूटते हैं ऐसे रिश्ते
तलाक के मामलों को देखने वाले वकीलों और विभिन्ना मैरिज काउंसलरों से की गई बातचीत से पता चलता है कि दबाव में शादी करने वाले युवा, खासकर पढ़े-लिखे शहरी युवा, सबसे ज्यादा तलाक के रास्ते पर चलते हैं। बातचीत के निष्कर्षों के मुताबिक-

* किसी किस्म के दबाव में शादी करने वाले युवा, सबसे ज्यादा लगभग 45 से 50 प्रतिशत तलाक के मामलों का हिस्सा होते हैं।
* अशिक्षित और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले तो फिर भी ऐसे दबाव को झेल जाते हैं, लेकिन पढ़े-लिखे शहरी युवा ऐसा दबाव नहीं झेल पाते और तलाक के रास्ते पर चल पड़ते हैं।
* दबाव में की गई शादी अगर टूटती नहीं तो भी आमतौर पर आदर्श शादी नहीं साबित होती। 30 से 35 प्रतिशत ऐसे मामले विवाहेत्तर संबंधों का कारण बनते हैं।




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