दाम्पत्य के बंधन में बँधने के बाद शुरुआती कुछ दिनों की ताजगी को ताउम्र बनाए रखना पति-पत्नी पर ही निर्भर करता है। जिंदगी के इस सफर में कहीं भी 'रुकावट के लिए खेद है' का बोर्ड नजर न आए इसके लिए आपसी सामंजस्य और ऊर्जा से भरा रिश्ता बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि प्यार में गर तकरार भी हो तो उसकी कड़वाहट जिंदगी भर न बनी रहे।
बातों, संदर्भों को झगड़े विशेष तक ही सीमित रखें। एक-दूसरे की पारिवारिक पृष्ठभूमि या दोस्ती पर छींटाकशी भूलकर भी न करें।
झगड़े के समय पुरानी नाराजगियों का पिटारा न खोलें।
झगड़े के समय व्यक्तिगत हैसियत, लुक आदि पर कोई कमेंट न करें।
झगड़े के समय एक-दूसरे के चरित्र पर आक्षेप न लगाएँ।
किसी बात को लेकर किसी तरह का मतभेद हो तो उसका भी उसी झगड़े के समय समाधान की कोशिश न करे।
अपने झगड़े को अपने दोस्तों या सहेलियों को तभी बताएँ जब वास्तव में बात बहुत आगे बढ़ जाए।
सड़क पर बहस न करें, न रोएँ। इससे चलते-फिरते लोगों का भी ध्यान आकर्षित होगा।