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प्यार में जरूरी सम्मान

सम्मान भी है संबंध का आधार

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प्यार
- राजकुमार दिनक

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'मैरिड पीपल : स्टेइंग टू गेदर इन द एज ऑफ डायवोर्स' फ्रांसीन क्लास बर्ग की चर्चित पुस्तक है। इसके लिए उन्होंने 87 ऐसे जोड़ों का साक्षात्कार किया जो 15 वर्ष या उससे अधिक से विवाह के बंधन में बँधे हुए हैं। वे उन तत्वों की तलाश में थीं, जिनकी वजह से शादियाँ टूटने से बची रहती है। खासकर ऐसे दौर में जब अधिकतर विवाहों का अंत तलाक में होने की आशंका हो। इनमें सम्मान मुख्य तत्व के रूप में उभरकर आया। ज्यादातर ने कहा कि मैं अपने साथी का सम्मान करता/करती हूँ।

यह सम्मान क्या है? यह पसंद जैसा नहीं है। जब आप प्यार में गिरफ्तार होते हैं तो आप दूसरे व्यक्ति को पसंद करते हैं। आप दूसरे को ऐसे ही देखते हैं जैसे बच्चा अपने माता-पिता को आदर्श समझता है। यह रोमांटिक पसंद इस भ्रम पर आधारित व निर्भर करती है कि आपका साथी आपके लिए परफेक्ट है। इसी वजह से यह पसंद जारी नहीं रह पाती।

आपको जल्द ही अहसास हो जाता है कि जिस व्यक्ति से आपने शादी की वह वैसा नहीं हैं जैसा कि आपने उम्मीद की थी। व्यक्तित्व के अलावा आप दोनों में काफी असमानताएँ हैं-जीवन के प्रति नजरिया भिन्न है, चीजों को करने का अंदाजा जुदा-जुदा है।

आप अपनी कल्पनाओं के अनुसार अपने साथी को बदलने का प्रयास करते हैं। लेकिन अगर आप अपनी शादी को बचाए रखना चाहते हैं तो असहमत होने के लिए सहमत होना सीखिए और जो जैसा है उसे वैसा ही रहने दीजिए। ये रास्ते अपनाने से ही आप वास्तविक सम्मान एक-दूसरे के लिए विकसित कर सकेंगे। सम्मान, बराबर के लोगों में होता है। यह साबित और परखी हुई बात है। आप एक-दूसरे की पसंद और रुचियों का सम्मान करें तो संबंध सहज व स्वस्थ रहते हैं।

हम सभी ने ऐसी शादियाँ देखी हैं जिनमें एक या दोनों पार्टनर बेदर्दी से वार करते हैं और तर्क होता है कि यह आपकी भलाई के लिए है। किसी भी 'भलाई' का आधार गुस्से का लहजा नहीं होता। पत्नी जब पति को अधिक महत्वाकांक्षी होने के लिए बार-बार रोकती है तो उसे लगता है कि वह नाकाम है, क्योंकि उसे प्रतिस्पर्धात्मक व्यापार की तुलना में कला या सामुदायिक प्रोजेक्ट पसंद है या पति का आरोप लगाना कि कुछ प्रोडक्टिव करने की बजाए पत्नी सहेलियों से चुगलियाँ करके समय बर्बाद करती है।

सम्मान का अर्थ है दूसरे व्यक्ति में जो कुछ भिन्न है उसको पसंद करना। इन चीजों को जानने और स्वीकार करने में समय लगता है। इसलिए शादी में सम्मान परिपक्वता का गुण है न कि रोमांस की पहली गर्मी। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि विवाहित जोड़े जो एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, यह कह रहे है, 'तुम अपने रास्ते जाओ, मैं अपने रास्ते जाता हूँ।' दरअसल, सम्मान वह है जो आपको एक-दूसरे के नजदीक लाता है। अक्सर इससे एक-दूसरे को समझने में मदद मिलती है, दूसरे के दृष्टिकोण को स्वीकार किया जाता है और उसे अपना हिस्सा बनाया जाता है।

अच्छे विवाह का यही विरोधाभास है-आप एक-दूसरे का सम्मान करके एक-दूसरे को बदलने के लिए दरवाजे खोलते हैं। सम्मान स्पष्ट मगर प्यार भरी निगाह है। वह वो देखता है, जो वास्तव में है और वह वो भी देखता है जो संभावित है। सम्मान प्रेम की कला है।

जिससे विवाहित जोड़े उस चीज की इज्जत करते हैं जो एक-दूसरे में अलग और अच्छी हैं। कुल मिलाकर बात सिर्फ इतनी-सी है कि खुद से अलग साथी में कुछ नजर आएँ तो उसका सम्मान करें। यदि कुछ बुरा भी लगे तो उसे धीरे-धीरे, प्यार से बदलने की कोशिश करें। देखें साथ रहना कितना मजेदार हो सकता है।

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