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मनमुटाव से टूटते हैं रिश्ते

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रिश्ते
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संयुक्त परिवार एक वट वृक्ष की तरह होता है, जिसकी छाँव में हर छोटे-बड़े रिश्ते फलते-फूलते हैं। परंतु कभी-कभी इस बरगद की कुछ शाखाएँ इतनी अधिक बड़ी हो जाती हैं कि वो उस वृहद पेड़ से टूटकर अलग हो जाती हैं व धूप में अलग-धलग पड़े होकर अपना अस्तित्व खोती जाती हैं।

यही कुछ रिश्तों के साथ भी होता है। रिश्तों का आनंद भी संयुक्त परिवार में ही है। जब यह परिवार बिखरता है तब दुखों की धूप में रिश्ते भी अपना दम तोड़ते जाते हैं। कुछ नासमझी व कुछ कही-सुनी बातें इस प्रकार के विवादों में कड़वाहट का छोंक लगाकर रही सही कसर भी पूरी कर देती है।

  रिश्तों का आनंद संयुक्त परिवार में ही है। जब यह परिवार बिखरता है तब दुखों की धूप में रिश्ते भी अपना दम तोड़ते जाते हैं। कुछ नासमझी व कुछ कही-सुनी बातें इस प्रकार के विवादों में कड़वाहट का छोंक लगाकर रही सही कसर भी पूरी कर देती है।       
बातचीत मत करो बंद :-
कई बार रिश्तेदारों में विवादों की वजह मनमुटाव होता है और इस मनमुटाव का प्रमुख कारण कोई छींटाकशी या कही-सुनी बात होती है। यह मनमुटाव तब अधिक बढ़ जाता है, जब हम बातचीत बंद कर सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देते हैं।

याद रखें बातचीत बंद करने से रिश्तों में प्यार भी खत्म हो जाता है और रह जाती है तो बस औपचारिकता, जो हमें बेमन से रिश्ते को निभाने पर मजबूर करती है। यदि मनमुटाव से बचना है तो अपने मन की बात को शब्दों में बयाँ कर दीजिए। इससे आपके झगड़े जल्दी ही सुलझ जाएँगे।

रिश्तों की गरिमा को बनाए रखें :-
रिश्तेदारी को निभाने के लिए रिश्तों की गरिमा को बनाए रखना बहुत अधिक जरूरी है। आप यदि कुछ ऐसा कार्य करते हैं, जिससे आपके पहले वाली रिश्तेदारी में खटास पड़ती है तो नए रिश्ते को बनाने के चक्कर में पुराने रिश्तों की आहुति न दें और भूलकर भी ऐसा कार्य न करें। जिससे आपके रिश्तों की गरिमा को ठेस पहुँचे।

रिश्ते बनाना तो आसान होते है परंतु निभाना बेहद मुश्किल। रिश्तों की इस कच्ची डोर को गलतियों के बल का इतना भी खिंचाव न दें कि यह टूटकर बिखर जाए। रिश्ते को प्यार व आत्मीयता से निभाएँ तथा अपने रिश्तेदारों के चहेते बन जाएँ।

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