शादी एक ऐसी रस्म होती है, जिसका निर्वहन तो युवावस्था में किया जाता है परंतु इसे निभाना ताउम्र पड़ता है। इसलिए बेहतर है कि शादी का फैसला करने से पहले 'भविष्य की प्लानिंग' भी कर ली जाए ताकि बाद में हमें यह सोचकर मलाल न हो कि 'काश हम इन सब बातों के बारे में पहले से सोच लेते तो आज हमें पछताना नहीं पड़ता।'
शादी जीवन में खुशियों की दस्तक लेकर आती है, तो फिर इन खुशियों के लम्हों को 'तू-तू, मैं-मैं' में क्यों गवाँया जाए? वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद लेने के लिए जरूरी है अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में अपने जीवनसाथी को अवगत कराया जाए तथा इस मुद्दे पर उसके भी विचार जाने जाए। सपने देखों और पूरे भी करो : चाहे लड़का हो या लड़की हर किसी को सपने देखने का और अपने सपनों में हकीकत के रंग भरने का पूरा-पूरा अधिकार है। हर कोई चाहता है अपने जीवन में सफलता पाना और कामयाबी का रसास्वादन करना। यदि आपका जीवनसाथी शादी के बाद अपने करियर को लेकर चिंतित है तो आपको चाहिए कि आप दोनों मिल-बैठकर इस समस्या का एक ऐसा हल निकालें, जिससे आप दोनों का करियर स्पॉइल न हो और न ही दोनों में से किसी एक को अपने सपनों की तिलाजंलि देनी पड़े। यदि आप अपने भावी जीवनसाथी के विचारों व सपनों को तवज्जु देंगे तो निसंदेह ही वह भी आपका सम्मान करेगा।
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अपनी पसंद-नापसंद बताएँ : शादी दो शरीर का नहीं बल्कि दो आत्माओं व विचारधाराओं का मिलन होता है। यदि आप शरीर से एक-दूसरे के हो गए परंतु विचारों से एक-दूसरे के विरोधी हो गए तो आप कभी अच्छे दंपति नहीं बन पाएँगे। विवाह का संपूर्ण आनंद लेने के लिए आवश्यक है कि विवाह से पहले ही एक-दूसरे कर पसंद-नापसंद को जाना जाए तथा किसी भी मुद्दे पर बहस होने पर उसका समझदारी से हल निकाला जाए।
संस्कारों व रीत-रिवाजों का ज्ञान होना जरूरी : शादी चाहे लव मैरिज हो या अरैन्ज मैरिज, दोनों स्थितियों में ही भावी वर-वधुओं को संस्कारों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। शादी के बाद लड़की की जिंदगी में अचानक परिवर्तन आता है और उस परिवर्तन के अनुसार स्वयं को ढालने के लिए जरूरी है परिवार के रीत-रिवाजों और संस्कारों का ज्ञान होना।
घर की बहू ही संस्कारों की संवाहक बन अपनी भावी पीढ़ी को परिवार के संस्कार विरासत में देती है। शादी के बाद रीति-रिवाज के मामले में किसी भी तरह की रोक-टोक से बचने के लिए जरूरी है कि शादी के पहले ही लड़की अपने ससुराल के रीत-रिवाजों में ढलने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें। जीवनसाथी से कहे दिल की बात : शादी के पहले लड़का-लड़की को एक-दूसरे की आदतों व पसंद-नापसंद की पूरी जानकारी होना चाहिए। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर उन्हें खुले दिल से विचार-विमर्श करना चाहिए। शादी के बाद एक लड़का अपनी पत्नी को किस रूप में देखना चाहता है तथा लड़की अपने पति को किस रूप में देखना चाहती है, शादी के पहले दोनों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है।
एक-दूसरे को जान लेने के बाद तथा भविष्य हर महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली चर्चा करने से जहाँ आप अपने प्यार के पलों को बढाते हैं, वहीं भविष्य के विवादों को भी विराम लगा देते हैं। किसी भी रिश्ते को जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जीवन के हर पल में खुशियों को ढूँढा जाए। यदि आप ऐसा करते हैं तो सही मायने में आप उस रिश्ते का सम्मान करते हैं तथा जिंदगी को जिंदादिली से जीते हैं।