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रिश्ते महकाती है भावनाएँ

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वामा
- पद्मा राजेंद्र
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कई बार मन में ख्याल आता है कि प्रेम का मधुर जीवन जीने वाले दंपति क्या उन दंपतियों से अलग होते हैं, जो प्रेम का सुख नहीं भोग पाते हैं? फिर दिल से आवाज आती है हाँ, बरसों तक वैवाहिक जीवन जीने के बाद भी जो पति पत्नी एक-दूसरे से प्यार करते हैं, वे वस्तुतः कभी भी यह नहीं सोचकर चलते कि उनके संबंध तो बने रहने के लिए ही हैं। इसके बारे में अब क्या सोचना! बल्कि वे अलग-अलग रूपों में एक-दूसरे के प्रति हर दिन अपना स्नेह और प्यार जताते रहते हैं।

कहते हैं, मुझे तुमसे प्यार है
वे अपने प्रेम को शब्दों से भी जाहिर करते रहते हैं। इस बहस में नहीं पड़ते और यह नहीं कहते यदि मुझे तुम से प्यार नहीं होता तो मैं तुमसे विवाह क्यों करता? ये बच्चे, बच्चे भी तो हमारे है ना! फिर! बल्कि वे इस चीज को समझते हैं कि प्यार के दो बोल बोलना अपने आप में सुख जैसा है। बोलने वाले और सुनने वाले दोनों के लिए...।

देह भी होती है माध्यम
प्रेम पगे दंपति प्रायः एक-दूसरे से स्पर्श के लिए सचेष्ट रहते हैं। वे कभी हाथ पकड़ लेंगे, कभी आलिंगन कर लेंगे। वे स्पर्श की भाषा को कभी नहीं भूलते। नवजात शिशु को प्रेम का प्रथम अनुभव स्पर्श से ही होता है और इस मामले में हम अभी तक उस वय से अलग नहीं हो पाए हैं। वे यह जानते और मानते हैं कि प्रगाढ़ आलिंगन भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बातें करना अथवा समागम।

तारीफ व धन्यवाद
सुखी दंपति एक-दूसरे के गुणों व खूबियों की परख बखूबी करते हैं और उनकी सराहना करने से नहीं चूकते। मेरी तो सबसे अच्छी श्रोता अथवा दर्शक मेरी पत्नी है। मैंने चाहे जैसे भी कपड़ों का चयन किया हो, किसी पार्टी में कोई मीठी-सी चुटकी ली हो या कोई मजेदार जोक सुनाया हो उसकी नजरों से कुछ भी तो नहीं चूकता।

यह कहना है एक पति का तो उनकी पत्नी भी तुरंत बोल पड़ी, मैं घर में जैसा भी खाना बनाती हूँ, वे चाव से खाते हैं व तारीफ करते हैं। फिर मैं भी अपनी चाहत और सराहना को शब्द देने से नहीं चूकती। एक बात बताऊँ, प्यार पाना संसार की बड़ी चीज तो है, पर दूसरे नंबर की! उससे बड़ी बात है किसी को प्यार करना।

दुराव-छुपाव नहीं
सुखी दंपति एक-दूसरे के साझीदार होते हैं। एक-दूसरे से वे कुछ भी नहीं छिपाते। वे भावों, विचारों, आशाओं और आकांक्षाओं के भी उतने ही भागीदार होते हैं जितना हानि, क्रोध, तड़प तथा लज्जाजनक एवं दर्दभरी यादों और अनुभूतियों के। हाँ, ऐसा भी होता है कि कभी-कभी पति-पत्नी में से कोई एक अपने अंतरंग विचारों और गूढ़ अनुभूतियों की अभिव्यक्ति नहीं कर पाता, पर कम बोल पाने वाला व्यक्ति भी अपने जीवनसाथी की परेशानी किसी और की अपेक्षा ज्यादा अच्छे से समझता है।

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