रिश्तों की डोर हैं बड़ी नाजुक
सच की बुनियाद पर खड़ा रिश्तों का घर
रिश्ते कच्चे धागों के समान होते हैं। जो सालों में प्रगाढ़ होते हैं और एक छोटी सी गलती से पलभर में टूटकर बिखर जाते हैं। रिश्तों को गलतफहमियों के ज्वार-भाटे से बचाएँ ताकि हमेशा आपके जीवन में खुशियों की लहरें हिलोरे ले।जब रिश्ते टूटते हैं तब बहुत दर्द होता है। आशा से निराशा का यह संक्रमणकाल बहुत ही तकलीफों भरा होता है। दर्द और आँसू मिलने से पहले ही वक्त रहते यदि समझदारी से काम लिया जाए तो रिश्तों की यह डोर मजबूत बनी रह सकती है।* जब लगता है कोई प्यारा :- आकर्षण एक ऐसी चीज होती है। जिसके मोह पाश में फँसने के बाद आदमी को उसके अलावा और कुछ नहीं सूझता। जब दिमाग से काम लेने का वक्त आता है। तब आदमी दिल से काम लेता है। यही वह आकर्षण होता है। जो दिलों में प्यार के अंकुर को जन्म देता है। ये रिश्ते जितनी आसानी से बनते हैं। उतनी ही आसानी से टूट भी जाते हैं।
* एक दूसरे को समझना जरूरी :-
किसी भी नए रिश्ते को बनाते समय एक-दूसरे को समझना बेहद जरूरी हो जाता है क्योंकि रिश्ते तोड़ने के लिए नहीं बल्कि ताउम्र निभाने के लिए बनाए जाते हैं।
आपसी समझ व विचारधारा के मेल से रिश्तों की गाड़ी जिंदगी की पटरी पर रफ्तार से दौड़ती है। एक-दूसरे की पसंद-नापसंद व भावनाओं की समझ रिश्तों को प्रगाढ़ बनाती है।
* सच की बुनियाद पर रिश्तों का घर :-
झूठ छिपाए नहीं छिपता है। एक कड़वी हकीकत बन यह कभी न कभी तो सामने आ ही जाता है और तब दिल टूट जाता है। सच वो होता है जो हमें दीर्घकालीन सुख देता है।
ज़मीं पर चाँद-तारे तोड़कर लाने की बात करने वालों का जब हकीकत से सामना होता है तो उनकी हवाइयाँ उड़ जाती है। हकीकत का सामना होने पर उनके सारे वादे और कसमें झूठे साबित होते हैं।
रिश्तों का घर यदि सच की बुनियाद पर खड़ा हो तो उसकी सुदृढ़ता में शक की कोई गुंजाइश नहीं है। झूठ या फरेब क्षणिक सुख देता है और सच दीर्घकालीन सुख।