रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं। कई बार व्यावहारिक अकुशलता रिश्तों में दरार पैदा कर देती है। रिश्ते सहेजकर रखने वाली चीज है, जिसमें थोड़ी-सी भी ऊँच-नीच व कटु वचन सगे-संबंधियों में खटास पैदा कर सकते हैं।रिश्तेदारों में हमेशा प्रेम बना रह सकता है। रिश्तेदारों में मनमुटाव के कुछ खास वजहें होती हैं, जिन्हें दूर करके हम अपने रिश्तेदारों का दिल जीत सकते हैं। * मीठे वचन जीते सबका मन :- कई बार आपकी अनियंत्रित वाणी रिश्तेदारों के बरसों के प्रेम को बैर में बदल सकती है। आपकी मीठी वाणी किसी को अपना बना सकती है तो वहीं आपके मुँह से निकले कटु शब्द हमेशा के लिए आपको अपने रिश्तेदारों से दूर कर सकते हैं। रिश्तेदारी में हमेशा नाप-तौलकर शब्दों का प्रयोग करें क्योंकि हो सकता है आपने रिश्तेदारों को कोई बात मजाक में कही हो और वे उसे दिल से लगाकर बैठे हो इसलिए हमेशा रिश्तेदारों से जो भी कहें सोच-समझकर कहें। |
| रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं। कई बार व्यावहारिक अकुशलता रिश्तों में दरार पैदा कर देती है। रिश्ते सहेजकर रखने वाली चीज है, जिसमें थोड़ी-सी भी ऊँच-नीच व कटु वचन सगे-संबंधियों में खटास पैदा कर सकते हैं।
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* कानाफूसी से बचें :-
इसकी चुगली उधर करना ये मानव की आम प्रवृत्ति है। इस प्रवृत्ति वाला इंसान कभी सुखी नहीं रह सकता है। कई बार बढ़ा-चढ़ाकर किसी बात को प्रस्तुत करना रिश्तेदारों के सामने आपके इंप्रेशन को डाउन कर सकता है। अगर आपको अपनों का विश्वास जीतना है तो कानाफूसी के शार्टकट से बचें।
* दिखावा न करें :-
रिश्तेदारी में दिखावे का कोई स्थान नहीं होता है। अपनों के बीच तो सब कुछ सहज होना चाहिए। उसमें दिखावे की क्या आवश्यकता? हर चीज में दिखावा करने वालों की हकीकत जब सामने आती है तो वह बेहद ही शर्मनाक स्थिति होती है। रिश्तेदारों की वाहवाही पाने के लिए झूठी शान दिखाना अच्छा नहीं है।
* सामंजस्य बनाएँ :-
रिश्तेदारी में कोई भी कार्य सर्वसम्मति से हो तो बेहतर होता है। यदि कोई रिश्तेदार हमेशा किसी भी बात पर अपने विरोध के स्वर ही मुखरित करे तो धीरे-धीरे रिश्तेदारों के बीच उसकी अहमियत खत्म होती जाती है और रिश्तेदारों में उसकी राय कोई मायने नहीं रखती है।
रिश्ते-नाते जोड़ना बहुत ही आसान होता है परंतु उन्हें निभाना बेहद ही मुश्किल। सामंजस्य, सहयोग व प्रेम से हम अपने रिश्तेदारों के साथ तालमेल बैठाकर चल सकते हैं। रिश्तों की इस डोर को थामे रखें।