शिर्डी (महाराष्ट्र)। चावलों पर साईंबाबा की जीवनगाथा लिखने वाले 40 वर्षीय एक कलाकार ने अपनी कलाकृति यहां श्री सांईंबाबा संस्थान न्यास को भेंट की है।
औरंगाबाद के कलाकार गजेन्द्र वाडंकर ने माइक्रोपेन से ‘साईलीलामृत ग्रंथ’ को 5,04,544 चावलों पर उतारा है। यह दास गानु महाराज द्वारा लिखी गई पुस्तक है जिसमें 21 अध्याय हैं।
वाडंकर ने कहा कि मैं रोजाना 12-13 घंटे काम करते हुए 3 साल से यह कार्य कर रहा था, लेकिन पिछले 7 महीने में मैंने इस परियोजना को पूरा करने के लिए 20-22 घंटे काम किया। उन्होंने इससे पहले धार्मिक कृति ‘सुखमणि साहिब’ को चावल, सरसों और तिल के दानों पर पूरी तरह उतारा था।
उन्होंने अपनी कलाकृति एलबम के रूप में गुरुवार को न्यास को सौंपी। वे साईंबाबा के कई अनुयायियों के साथ गुरुवार को औरंगाबाद से यहां पैदल पहुंचे थे।
मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया में होटल उद्योग में इवेंट मैनेजर रह चुके वाडंकर ने कहा कि उन्होंने चावलों पर लिखने के अपने जुनून पर पूरा ध्यान देने के लिए 7 महीने पहले अपनी नौकरी छोड़ दी। (भाषा)