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खंडोबा की नवरात्रि आज

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महाराष्ट्रीयन परिवार
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महाराष्ट्रीयन परिवारों में मंगल कार्य, शादी, मुंज और नवरात्र का कुलधर्म, कुलाचार मल्हारी मार्तंड यानी मार्तंड भैरव के पूजन के साथ चंपाषष्ठी 4 दिसंबर को संपन्न होगा।

मार्तंड यानी सूर्य, जिसे शैवपंथी खंडोबा, वैष्णव में विठोबा और आदिशक्ति म्हाळसा के रूप में महाराष्ट्र के घर-घर में पूजा जाता है। खंडोबा का मुख्य स्थान महाराष्ट्र का जैजूरी है।

मणि और मल्ल दानवों से भक्तों के रक्षणार्थ भगवान शिव ने मार्तंड भैरव अवतार में उनका नाश किया। चूँकि दोनों शिवभक्त थे, सो उनकी प्रार्थना पर मार्तंड भैरव को मल्हारी मार्तंड भी कहते हैं। इस युद्ध में चूँकि उन्होंने खांड नाम के शस्त्र का इस्तेमाल किया, सो उन्हें खांडाधारी 'खंडोबा' के नाम से भी जाना जाता है।

खंडोबा मूल रूप से कर्नाटक के देवता हैं। कानड़ी में येळू यानी सात और कोट (कोटि) यानी करोड़। सात करोड़ की संख्या में हमारे घर धनधान्य संपत्ति हो, ऐसी मंशा इसके पीछे है। खंडोबा की सेना सात करोड़ रही। इसीलिए 'तळी आरती' के वक्त उन्हें 'येळकोट मल्हार' कहा जाता है।

खंडोबा की पत्नी का नाम म्हाळसा है, जिसे कर्नाटक में माळजमाळची-माळवी-माळव कहा जाता है। म्हाळसा के पति खंडोबा को यहाँ म्हाळसाकांत कहते हैं। खंडोबा की दूसरी पत्नी बाणाई धनगर थीं, जिन्हें धनगरों द्वारा कुलदेवता के साथ दामाद का सम्मान भी दिया जाता है।

कर्नाटक-आंध्र इलाके में कई लोगों के कुलदेवता मैलार-मैराळ यानी खंडोबा हैं। मद्रास की उपनगरी मैलापुर मैलारों का मूल गाँव है। जैजूरी, निमगाँव, पाली पेंबर, नलदुर्ग, शेंगुड सातारा, मालेगाँव (नाँदेड़) मैलारपुर, मंगसुळी, मैलार, देवरगुड्डू और मण्मैणार आदि खंडोबा के तीर्थस्थान हैं।

तळी भंडार का विशेष महत्व : खंडोबा के पूजन में तळी भंडार का विशेष महत्व है, साथ ही मौसम की नई फसल जैसे- बाजरा, बैंगन, गुड़, लहसुन, प्याज का नैवेद्य लगाया जाता है और खोपरा हल्दी के भंडारे के साथ येळकोट येळकोट येळकोट के साथ तळी भंडार संपन्न होता है।

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