Publish Date: Mon, 13 Sep 2021 (16:42 IST)
Updated Date: Mon, 16 Sep 2024 (18:02 IST)
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में आती है। डोल ग्यारस के बाद अनंत चतुर्दशी और उसके बाद पूर्णिमा। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अनंत चतुर्दशी का पर्व 19 सितंबर 2021 रविवार को रहेगा। आओ जानते हैं कि इस दिन कौनसे 5 महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं।
1. गणेश प्रतिमा का विसर्जन : भाद्रपद की शुक्ल चतुर्थी के दिन गणेश उत्सव का प्रारंभ होता और अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा का विसर्जन होता है। हालांकि महाराष्ट्र में तीन दिन बाद ही विसर्जन हो जाता है, परंतु कई राज्यों में अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन होता है।
2. विष्णु जी की पूजा : अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा का विधान होता है। भगवान विष्णु के सेवक भगवान शेषनाग का नाम अनंत है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है।
3. व्रत रखना : पांडवों द्वारा जुए में अपना राजपाट हार जाने के बाद श्रीकृष्ण से पूछा था कि दोबारा राजपाट प्राप्त हो और इस कष्ट से छुटकारा मिले इसका उपाय बताएं तो श्रीकृष्ण ने उन्हें सपरिवार सहित अनंत चतुर्दशी का व्रत बताया था। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। इनके ना तो आदि का पता है न अंत का इसलिए भी यह अनंत कहलाते हैं अत: इनके व्रत और पूजन से आपके सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे।
4. अनंत सूत्र : इस दिन अनंत सूत्र बांधने का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के बाद बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस दिन कच्चे धागे से बने 14 गांठ वाले धागे को बाजू में बांधने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है। इस धागे को बांधने की विधि और नियम का पुराणों में उल्लेख मिलता है।
5. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ : मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।
अनिरुद्ध जोशी
Publish Date: Mon, 13 Sep 2021 (16:42 IST)
Updated Date: Mon, 16 Sep 2024 (18:02 IST)