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प्रयाग कुम्भ मेला 2019 : तीर्थ नगरी प्रयागराज के प्राचीन स्थल

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अनिरुद्ध जोशी

, शुक्रवार, 4 जनवरी 2019 (15:33 IST)
तीर्थों में प्रमुख प्रयागराज का महत्व ऋगवेद के काल से ही बना हुआ है। पवित्र गंगा और यमुना नदी के संगम तट पर बसे इस शहर की महिमा का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, पद्मपुराण और सूर्यपुराण में मिलता है। यहां पर दुनिया के सभी ऋषि-मुनि, बुद्ध, तीर्थंकर, पैगंबर और अवतारियों के चरण पड़े हैं। आओ जानते हैं यहां के कुछ खास प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में।
 
1. अक्षय वट : हिंदू धर्म के प्रमुख चार बरगद के वक्षों में से एक अक्षय वट प्रयाग के पातालपुरी में स्थित है। प्रयाग (इलाहाबाद) में अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौधवट भी कहा जाता है और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है। पातालपुरी मंदिर के भीतर स्थित इस अक्षय वट को अमर वृक्ष भी कहते हैं। इसी के पास एक अशोक वृक्ष भी है। इस वृक्ष का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
 
2. भारद्वाज ऋषि का आश्रम : ऋषि भारद्वाज जिन्होंने विमानशास्त्र लिखा था उन्होंने यहीं पर एक शिवलिंग की स्थापना की थी जिसे भार्द्वाजेश्वर महादेव कहा जाता है। भगवान राम के काल में हुए ऋषि भारद्वाज के गुरु वाल्मीकि थे। उनके इस आश्रम में सैंकड़ों प्राचीन मूर्तियां रखी हुई है। माना जाता है कि पहले यहां एक विशाल मंदिर था और पहाड़ के ऊपर एक भरतकुंड था।
 
3. लाक्षागृह : लाख से बना हुआ घर जिसे लाक्षागृह कहते हैं। माना जाता है कि इसे धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने पांडवों को जाल में फंसाकर मारने के लिए बनाया था लेकिन विदुर की चतुराई के चलते पांडव गुप्त द्वार से भाग निकले थे। यह महल गंगा नदी के तट पर हंडिया के 6 किलोमिटर दक्षिण में स्थित है।
 
4. ललिता देवी मंदिर : 108 फुट ऊंचे इस मंदिर की गणना 52 शक्तिपीठों में की जाती है। ललिता देवी मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन वृक्ष भी है और जहां कई मूर्तियां हैं। यह मंदिर मीरपुर इलाके में स्थित है।
 
5. हाटकेश्वर मंदिर : भगवान हाटकेश्वर का यह प्राचीन मंदिर इलाहाबाद में शून्य सड़क पर स्थित है। शिव के इस मंदिर में और भी कई मूर्तियां विराजमान है।
 
6. समुद्र कूप : गंगा नदी के तट पर स्थित ऊंचे टीले पर एक कुआ बना है। इस कुवे को राजा समुद्रगुप्त ने बनवाया था इसीलिए इसका नाम समुद्र कूप है। बड़े-बड़े पत्थरों से बने इस कुवे का व्यास 15 फिट है और गहराई में यह अनंत है। इसका जल स्तर नीचे समुद्र स्तर के बराबर है। यह बड़े पत्थर से बनाया गया है।
 
7. शंकर विमान मंडपम : कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती की पहल पर 1986 में ‍भव्य शंकर विमान मंडपम के निर्माण की आधारशीला रखी गई। निर्माण कार्य 16 साल में पूरा हुआ। तीन मंजिला यह मंदिर संगम के तट पर स्थित है।
 
8.  सैंकड़ों मंदिर : इसके अलावा प्रयाग में सरस्वती कूप, दुर्वासा आश्रम, ताक्षकेश्वर नाथ, नाग वासुकी मंदिर, कल्याणी देवी, शिवकुटी, कमौरी नाथ महादेव, राधा माधव मंदिर, बारी काली, साई धाम मंदिर, बोलन शंकर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, हनुमान मंदिर आदि सैंकड़ों मंदिर है।
 
ऐतिहासिक स्थलों में अशोक स्तंभ, इलाहाबाद का किला, जहांगीर का शिलालेख, मिंटो पार्क, स्वराज भवन, आनंद भवन, जवाहर तारामंडल, पत्थर गिरजाघर, लाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद संग्रहालय, खुसरो बाग, मायो मेमोरियल हॉल आदि।

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