भारत के 37 चमत्कारिक हनुमान मंदिर

हनुमानजी एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके कारण तीनों लोकों की कोई भी शक्ति अपनी मनमानी नहीं कर सकती। वे साधु-संतों के अलावा भगवानों के भी रक्षक हैं। उनसे बड़ा इस ब्रह्मांड में दूसरा कोई नहीं। वे परम ब्रह्मचारी और ईश्वरतुल्य हैं।
हनुमानजी के चमत्कारिक सिद्धपीठों की संख्‍या सैकड़ों में है। उन सभी स्थानों पर हनुमान के मंदिर बने हैं, जहां वे गए थे या जहां वे बहुत काल तक रहे थे या जहां उनका जन्म हुआ। कुछ मंदिर उनके जीवन की खास घटनाओं से जुड़े हैं और कुछ का संबंध चमत्कार से है। इन हजारों सिद्धपीठों या मंदिरों में से यहां प्रस्तुत है 36 चमत्कारिक और ऐतिहासिक मंदिरों के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
 
मंदिर नंबर 1
हनुमानगढ़ी, अयोध्या (उत्तरप्रदेश)
 
हनुमानगढ़ी : अयोध्या में स्थित यह सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। यह मंदिर अयोध्या में सरयू नदी के दाहिने तट पर एक ऊंचे टीले पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 60 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यहां पर स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा केवल छः (6) इंच लंबी है, जो हमेशा फूलमालाओं से सुशोभित रहती है।
इस मंदिर के जीर्णोद्धार के पीछे एक कहानी है। सुल्तान मंसूर अली लखनऊ और फैजाबाद का प्रशासक था। तब एक बार सुल्तान का एकमात्र पुत्र बीमार पड़ा। वैद्य और डॉक्टरों ने जब हाथ टेक दिए, तब सुल्तान ने थक-हारकर आंजनेय के चरणों में अपना माथा रख दिया। उसने हनुमान से विनती की और तभी चमत्कार हुआ कि उसका पुत्र पूर्ण स्वस्थ हो गया। उसकी धड़कनें फिर से सामान्य हो गईं।
 
तब सुल्तान ने खुश होकर अपनी आस्था और श्रद्धा को मूर्तरूप दिया- हनुमानगढ़ और इमली वन के माध्यम से। उसने इस जीर्ण-शीर्ण मंदिर को विराट रूप दिया और 52 बीघा भूमि हनुमानगढ़ी और इमली वन के लिए उपलब्ध करवाई। संत अभयारामदास के सहयोग और निर्देशन में यह विशाल निर्माण संपन्न हुआ। 300 साल पहले संत अभयारामदास निर्वाणी अखाड़ा के शिष्य थे और यहां उन्होंने अपने संप्रदाय का अखाड़ा भी स्थापित किया था।

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मंदिर नंबर 2
हनुमान मंदिर, इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश 
 
इलाहाबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमानजी की प्रतिमा वाला एक छोटा किंतु प्राचीन मंदिर है। यह संपूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमानजी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा 20 फीट लंबी है। जब वर्षा के दिनों में बाढ़ आती है और यह सारा स्थान जलमग्न हो जाता है, तब हनुमानजी की इस मूर्ति को कहीं ओर ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है। उपयुक्त समय आने पर इस प्रतिमा को पुन: यहीं लाया जाता है।
 
मंदिर नंबर 3
बालाजी हनुमान मंदिर, मेहंदीपुर (राजस्थान)
 
राजस्थान के दौसा जिले के पास दो पहाड़ियों के बीच बसा हुआ घाटा मेहंदीपुर नामक स्थान है, जहां पर बहुत बड़ी चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वत: ही उभर आई है जिसे श्रीबालाजी महाराज कहते हैं। इसे हनुमानजी का बाल स्वरूप माना जाता है। इनके चरणों में छोटी-सी कुंडी है जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता।
यहां के हनुमानजी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है। यहां हनुमानजी के साथ ही शिवजी और भैरवजी की भी पूजा की जाती है।
 
जनश्रुति है कि यह मंदिर करीब 1 हजार साल पुराना है। यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमानजी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। इसे ही श्री हनुमानजी का स्वरूप माना जाता है।
 
मंदिर नंबर 4
बालाजी हनुमान मंदिर, सालासर (राजस्थान)
 
हनुमानजी का यह मंदिर राजस्थान के चुरु जिले के गांव सालासर में स्थित है। इन्हें सालासर के बालाजी हनुमान के नाम से पुकारा जाता है। यहां स्थित हनुमानजी की प्रतिमा दाढ़ी व मूंछ से सुशोभित है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मनचाहा वरदान पाते हैं।
 
इस मंदिर के संस्थापक श्री मोहनदासजी बचपन से श्री हनुमानजी के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे। माना जाता है कि हनुमानजी की यह प्रतिमा एक किसान को जमीन जोतते समय मिली थी जिसे सालासर में सोने के सिंहासन पर स्थापित किया गया है।
 
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मंदिर नंबर 5
पान्डुपोल हनुमान मंदिर, ‍जिला अलवर (राजस्थान)
 
हनुमानजी की अनोखी प्रतिमा वाला यह मंदिर राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। अलवर जिला मुख्यालय से लगभग 55 किमी दूर सरिस्का अभयारण्य और अरावली की सुन्दर वादियों में स्थित इस मंदिर स्थान को पान्डुपोल के नाम से जाना जाता है।
सरिस्का राष्ट्रीय पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार से 11 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर महाभारतकाल की याद दिलाता है। कहा जाता है मंदिर उसी स्थान पर बना है, जहां हनुमानजी ने आराम किया था।
 
कहा जाता है कि पान्डुपोल वह प्राचीन स्थान है, जहां महाभारत के भीम ने विशाल दैत्य हिडिम्ब को हराकर उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह किया था। पांडवों ने वनवास के दौरान यहां शरण ली थी।
 
मंदिर नंबर 6
कष्टभंजन हनुमान दादा महाराज मंदिर, सारंगपुर ‍(गुजरात)
 
गुजरात के भावनगर के सारंगपुर में विराजने वाले कष्‍टभंजन महाराजाधिराज हनुमान यहां हनुमान दादा के नाम से पुकारे जाते हैं। अहमदाबाद-भावनगर रेलवे लाइन पर स्थित बोटाद जंक्शन से सारंगपुर लगभग 12 मील दूर है।
 
सोने के सिंहासन पर विराजमान हनुमान दादा की यहां स्थित मूर्ति के चरणों में शनि महाराज विराजमान हैं। कहा जाता है कि एक समय था, जब शनिदेव का पूरे राज्य पर आतंक था। आखिरकार भक्तों ने अपनी फरियाद बजरंग बली से की। भक्तों की बातें सुनकर हनुमानजी शनिदेव को मारने के लिए उनके पीछे पड़ गए। अब शनिदेव के पास जान बचाने का आखिरी विकल्प बाकी था, सो उन्होंने स्त्री रूप धारण कर लिया क्योंकि उन्हें पता था कि हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और वे किसी स्त्री पर हाथ नहीं उठाएंगे। लेकिन भगवान राम के आदेश से उन्होंने स्त्री-स्वरूप शनिदेव को अपने पैरों तले कुचल दिया।
 
मंदिर नंबर 7 
हनुमान धारा, चित्रकूट, उत्तरप्रदेश  
 
उत्तरप्रदेश के सीतापुर नामक स्थान से 3 मील दूर पर्वतमाला के मध्यभाग में यह हनुमान मंदिर स्थापित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर जल के दो कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। इस धारा का जल हनुमानजी को स्पर्श करता हुआ बहता है इसीलिए इसे हनुमान धारा कहते हैं।
कहा जाता है कि श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमानजी ने भगवान श्री रामचंद्र से कहा- 'हे भगवन्! मुझे कोई ऐसा स्थान बतलाइए, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके।' तब भगवान श्रीराम ने हनुमानजी को यह स्थान बताया था।
 
मंदिर नंबर 8 
हनुमान दंडी मंदिर, बेट द्वारका (गुजरात)  
 
गुजरात के समुद्री तट पर स्थित बेट द्वारका से 4 मील की दूरी पर मकरध्वज के साथ में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं कि पहले मकरध्वज की मूर्ति छोटी थी, परंतु अब दोनों मूर्तियां एक-सी ऊंची हो गई है। अहिरावण ने भगवान श्रीराम-लक्ष्मण को इसी स्थान पर छिपाकर रखा था।
 
जब हनुमानजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेने के लिए आए, तब उनका मकरध्वज के साथ घोर युद्ध हुआ। अंत में हनुमानजी ने उसे परास्त कर उसी की पूंछ से उसे बांध दिया। उनकी स्मृति में यह मूर्ति स्थापित है। मकरध्वज हनुमानजी का पुत्र था।
 
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मंदिर नंबर 9
श्री बाल हनुमान मंदिर, जामनगर (गुजरात)
 
जामनगर गुजरात का एक शहर है। यह अरब सागर से लगा कच्छ की खाड़ी के दक्षिण में स्थित है। सन् 1540 में जामनगर की स्थापना के साथ ही स्थापित यह हनुमान मंदिर बहुत चमत्कारिक माना जाता है। यहां पर सन् 1964 से 'श्रीराम धुनी' का जाप लगातार चलता आ रहा है जिस कारण इस मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।
 
मंदिर नंबर 10
अलीगंज का हनुमान मंदिर, लखनऊ (उत्तरप्रदेश)
 
लखनऊ को किसी समय लक्ष्मणपुर कहा जाता था। लखनऊ के अलीगंज में है एक प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, जो बेहद ही चमत्कारिक मंदिर है। आसपास या दूरदराज में जहां भी हनुमान मंदिर बनाया जा रहा है उसके लिए यहीं से सिंदूर और लंगोट ले जाकर प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। 
 
अंग्रेज काल में लखनऊ के नवाब मुहम्मद अली शाह रहते थे। उनकी बेगम राबिया को कोई औलाद नहीं हो रही थी। सब दवा-दुआ बेकार जा रहा थी। किसी के बताने के बाद बेगम ने यहीं पर दुआ की और उनकी दुआ कबूल हुई। बेगम ने मुराद पुरी होने के बाद स्वप्न अनुसार यहां बाबा का मंदिर बनवाया।
 
 
मंदिर नंबर 11
श्री संकटमोचन मंदिर, वाराणसी (उत्तरप्रदेश)
 
यह मंदिर उत्तरप्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर एक छोटा-सा वन है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की यह मूर्ति गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है।
 
मंदिर नंबर 12
डुल्या मारुति, पूना, (महाराष्ट्र)
 
पूना के गणेश पेठ में स्थित यह मंदिर लगभग 350 वर्ष पुराना है। मूल रूप से डुल्या मारुति की मूर्ति एक काले पत्थर पर अंकित की गई है। यह मूर्ति 5 फुट ऊंची तथा ढाई से तीन फुट चौड़ी अत्यंत भव्य एवं पश्चिम मुख है। 
 
इस मूर्ति की स्थापना श्री समर्थ रामदास स्वामी ने की थी, ऐसी मान्यता है। सभा मंडप में द्वार के ठीक सामने छत से टंगा एक पीतल का घंटा है। इसके ऊपर शक संवत् 1700 अंकित है।
 
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मंदिर नंबर 13
गिरजाबंध हनुमान मंदिर, रतनपुर (छत्तीसगढ़)
 
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से 25 किलोमीटर दूर रतनपुर में मां महामाया देवी और गिरजाबंध हनुमानजी का मंदिर है। रतनपुर को महामाया नगरी भी कहते हैं। यहां स्थित मंदिर की खास बात यह है कि यहां हनुमान नारी स्वरूप में स्थित हैं। इसके मंदिर की पीछे कई तरह की‍ किंवदंतियां प्रचलित हैं।
मंदिर नंबर 14
प्राचीन हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस (नई दिल्ली)
 
दिल्ली का ऐतिहासिक नाम इंद्रप्रस्थ शहर है, जो यमुना नदी के तट पर पांडवों द्वारा महाभारतकाल में बसाया गया था तथा तब पांडव इंद्रप्रस्थ और कौरव हस्तिनापुर पर राज्य करते थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार पांडवों में द्वितीय भीम को हनुमानजी का भाई माना जाता है। दोनों ही वायुपुत्र कहे जाते हैं। इंद्रप्रस्थ की स्थापना के समय पांडवों ने इस शहर में 5 हनुमान मंदिरों की स्थापना की थी। ये मंदिर उन्हीं 5 में से एक है।
 
कनॉट प्लेस में स्थित इस मंदिर में उपस्थित हनुमानजी की मूर्ति स्वयंभू है। बालचन्द्र अंकित शिखर वाला यह मंदिर आस्था का महान केंद्र है।
 
मंदिर नंबर 15
महावीर हनुमान मंदिर, पटना (बिहार)
 
पटना जंक्शन के ठीक सामने महावीर मंदिर के नाम से श्री हनुमानजी का मंदिर है। उत्तर भारत में मां वैष्णोदेवी मंदिर के बाद यहां ही सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है। इस मंदिर के अंतर्गत महावीर कैंसर संस्थान, महावीर वात्सल्य हॉस्पिटल, महावीर आरोग्य हॉस्पिटल तथा अन्य बहुत से अनाथालय एवं अस्पताल चल रहे हैं। यहां श्री हनुमानजी संकटमोचन रूप में विराजमान हैं। 
 
मंदिर नंबर 16
श्रीपंचमुख आंजनेयर हनुमान (तमिलनाडु)
 
श्रीपंचमुख आंजनेय स्वामीजी : तमिलनाडु के कुंभकोणम नामक स्थान पर श्री पंचमुखी आंजनेयर स्वामीजी (श्री हनुमानजी) का बहुत ही मनभावन मठ है। यहां पर श्री हनुमानजी का पंचमुख रूप में विग्रह स्थापित है, जो अत्यंत भव्य एवं दर्शनीय है।
 
यहां पर प्रचलित कथाओं के अनुसार जब अहिरावण तथा उसके भाई महिरावण ने श्री रामजी को लक्ष्मण सहित अगवा कर लिया था, तब प्रभु श्रीराम को ढूंढने के लिए हनुमानजी ने पंचमुख रूप धारण कर इसी स्थान से अपनी खोज प्रारंभ की थी और फिर इसी रूप में उन्होंने उन अहिरावण और महिरावण का वध भी किया था। यहां पर हनुमानजी के पंचमुख रूप के दर्शन करने से मनुष्य सारे दुखों, संकटों एवं बंधनों से मुक्त हो जाता है।
 
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मंदिर नंबर 17
यंत्रोद्धारक हनुमान मंदिर, हंपी (कर्नाटक)
 
बेल्लारी जिले के हंपी नामक नगर में एक हनुमान मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में प्रतिष्ठित हनुमानजी को यंत्रोद्धारक हनुमान कहा जाता है। विद्वानों के मतानुसार यही क्षेत्र प्राचीन किष्किंधा नगरी है।

वाल्मीकि रामायण व रामचरित मानस में इस स्थान का वर्णन मिलता है। संभवतया इसी स्थान पर किसी समय वानरों का विशाल साम्राज्य स्थापित था। आज भी यहां अनेक गुफाएं हैं। इस मंदिर में श्रीरामनवमी के दिन से लेकर 3 दिन तक विशाल उत्सव मनाया जाता है।
 
मंदिर नंबर 18
वीर मारुति बेदी हनुमान, जगन्नाथपुरी (उड़ीसा)
 
जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। कहावत है कि महाप्रभु जगन्नाथ ने वीर मारुति को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था, परंतु जब-तब हनुमान भी जगन्नाथ-बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शनों का लोभ संवरण नहीं कर पाते थे, सम्प्रति समुद्र भी उनके पीछे नगर में प्रवेश कर जाता था। केसरीनंदन की इस आदत से परेशान हो जगन्नाथ महाप्रभु ने हनुमान को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया।
 
मंदिर नंबर 19
गंधमाधन पर्वत : कन्याकुमारी से 4 कोस पूर्व में शुचीन्द्रम नामक स्थान पर महावीर हनुमान की लगभग 13-14 हाथ ऊंची कनक भूघटाकार-सिंहासनासीन मूर्ति स्थापित है, जो संपूर्ण भारतवर्ष में अद्वितीय है।
 
यहां समीप ही गंधमाधन पर्वत है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां केसरीनंदन का जन्म हुआ था। इसी पर्वत पर हनुमत्कुंड नामक तीर्थ स्थान है। कहा जाता है कि लंका विजय के पश्चात प्रभु श्रीराम ने इस स्थान पर स्नान कर विश्राम किया था। माना जाता है कि इस कुंड का निर्माण स्वयं रामदूत ने ही किया था। वर्षों से यह विश्वास फलता आया है कि बंध्या साध्वियां यहां स्नान कर पुत्रवती बनती हैं।
 
मंदिर नंबर 20
मध्यप्रदेश की उज्जयनी नगरी के शिप्रा नदी के दोनों तटों पर रणजीत और गिरनारी हनुमान के नाम से सुविख्यात 2 हनुमान मंदिर हैं। पौष मास की अष्टमी को शिप्रा के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों पर स्थित इन पावन देवालयों से शोभायात्रा (सवारी) निकाली जाती है।
 
उज्जैन में ही पंचमुखी हनुमान का भव्य एवं प्राचीन मंदिर स्थित है। राजपुताने में बालाजी के नाम से पूजित वीर बजरंगी के विश्वप्रसिद्ध देवालयों में एक है घाटा मेहंदीपुर। भूत-प्रेत बाधा, पक्षाघात आदि रोगों से मुक्ति हेतु हजारों भक्त प्रतिदिन यहां आते हैं।
 
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मंदिर नंबर 21
कन्याकुमारी से तिरुवनंतपुरम के रास्ते पर सड़क किनारे एक छोटी-सी पहाड़ी है जिसका नाम है मारुत मलै। माना जाता है कि यह उसी द्रोण गिरि का अंश है, जो वीर बजरंग श्री लक्ष्मण के शक्तिपीड़ित होने पर लाए थे। द्रोणगिरि का एक टुकड़ा यहां टूटकर गिरा। इस पहाड़ी (तमिल में मलै) पर प्राणदायिनी जड़ी-बूटियां भरी हुई हैं।
मंदिर नंबर 22
दक्षिण में भगवान वेंकटेश के वास तिरुमाला की ओर जाने वाले राजमार्ग पर समर्थ स्वामी रामदास द्वारा स्थापित एक अत्यंत जागृत विग्रह स्थित है।
 
मंदिर नंबर 23
तमिलनाडु के शोलम मंडल में नामक्कल नामक स्थान पर शंकर सुवन की लगभग 8 हाथ ऊंची भव्य मूर्ति स्थापित है।
 
मंदिर नंबर 24
मणिपुर प्रदेश में महाबली आश्रम स्थित है। यहां वीर हनुमानजी का एक अतिप्राचीन स्थान है। प्राकृतिक सुंदरता को समेटे यह स्थान वानर सेना से भी परिपूर्ण है। माना जाता है कि अंजनीसुत स्वयं यहां आते रहते हैं।
 
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मंदिर नंबर 25 
चूंगा जान हनुमान मंदिर
नगालैंड के चूंगा जान में प्रसिद्ध हनुमत- सेवक शंकरदास त्यागी की उपासना स्थली के रूप में प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, जहां भक्तों को अपार शांति की अनुभूति होती है।
मंदिर नंबर 26
वीर बजरंग बली मंदिर (ओंकारेश्वर)
खंडवा और इंदौर के मध्य नर्मदा तट पर स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के पास पर्वत श्रृंखला पर अवस्थित अनेक शिवलिंगों के मध्य वीर बजरंग बली का एक चित्ताकर्षक विग्रह स्थापित है।
 
मंदिर नंबर 27
हनुमान मंदिर (पूना)
महाराष्ट्र के पूना जिले में प्रसिद्ध अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर के पास से एक पतली पगडंडी उतरकर वन में जाती है। विशाल वृक्षों की शाखाओं-प्रशाखाओं की छांव में प्राकृतिक सुषमा यहां अनुपम छटा बिखेरती है। यहां अत्यंत प्राचीन एवं अनुपम हनुमत विग्रह स्थापित है।
 
मंदिर नंबर 28
पहाड़ी हनुमान (जिला देवास मध्यप्रदेश)
मध्यप्रदेश के देवास जिले में माताजी की टेकरी पर हनुमानजी की स्वयंभू अत्यंत ही चमत्कारिक विशालकाय मूर्ति स्थित है। पहाड़ को चीरकर निकली यह मूर्ति मां तुलजा भवानी के मंदिर के पास स्थित है।
 
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मंदिर नंबर 29
हनुमान मंदिर गोदावरी धाम (कोटा)
 
हाड़ौती की संस्कारधानी कोटा के पास अमर निवास का गोदावरी धाम भी हनुमान भक्तों की आस्था का जीवंत केंद्र है। चंबल नदी के गर्भ से प्राप्त विग्रह यहां स्थापित है। यह स्थान भी भूत-प्रेत पीड़ित, विक्षिप्त, अर्धविक्षिप्त रोगियों को लाभ देने के लिए प्रसिद्ध है।
मंदिर नंबर 30
वीर पवनपुत्र प्रहरी हनुमान (नाथद्वारा)
मेवाड़ अंचल के प्रसिद्ध नाथद्वारा धाम में नगर के अंदर तथा बाहर चारों दिशाओं में वीर पवनपुत्र प्रहरी के रूप में विराजमान हैं। पूर्व, पश्चिम, दक्षिण एवं उत्तर में यह विग्रह क्रमशः सिंहाड के हनुमान, बाखर के हनुमान, छावनी के हनुमान एवं व्यंकट हनुमान के नाम से विख्यात हैं।
 
मंदिर नंबर 31
वीर बजरंग मंदिर (कोलकाता)
बंगदेश बंगाल की राजधानी कोलकाता के हरिसन मार्ग पर एक गली, जिसे हनुमान गली के नाम से जाना जाता है, में हनुमानजी का अतिप्राचीन मंदिर है। कहा जाता है संपूर्ण बंगाल में वीर बजरंग का यह प्राचीनतम विग्रह है।
 
मंदिर नंबर 32
हनुमान टेकरी मंदिर (मुंबई)
मुंबई महानगर में प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर के पार्श्व में रामदूत हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है। मुंबई में ही मलाड़ उपनगर में शांताराम सरोवर के समीप हनुमान टेकरी के नाम से विख्यात हनुमान मंदिर है।
 
मंदिर नंबर 33
नासिक के पंचवटी में भूमिगत सुरंग में राम-जानकी के विग्रहों के समक्ष वीर बजरंग का विशाल विग्रह भक्तों की आस्था का केंद्र है।
 
मंदिर नंबर 35
मध्यप्रदेश के इंदौर के समीप स्थित सांवेर में उलटे हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां के मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति अपनी उल्टी अवस्था में स्थित है। अहिरावण को मारने के लिए पाताल लोक जाते समय हनुमानजी यहां हवा में उल्टे होकर उड़ने लगे थे।
 
मंदिर नंबर 36
कैथल मंदिर : कैथल हरियाणा प्रांत का एक शहर है। इसे वानरराज हनुमान का जन्मस्थान भी माना जाता है। इसका प्राचीन नाम था कपिस्थल। कपि के राजा होने के कारण हनुमानजी के पिता को कपिराज कहा जाता था। यहां पर हनुमानजी की माता अंजनी का एक प्राचीन मंदिर और अजान किला भी है।
 
मंदिर नंबर 37
कुछ लोग मानते हैं कि हनुमानजी का जन्म झारखंड राज्य के उग्रवाद प्रभावित क्षे‍त्र गुमला जिला मुख्‍यालय से 20 किलोमीटर दूर आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था। इसी जिले के पालकोट प्रखंड में बाली और सुग्रीव का राज्य था। यह क्षेत्र भी रामायण काल में दंडकारण्य क्षेत्र का हिस्सा था।
 
माना जाता है कि पहाड़ी पर स्थित इस गुफा में हनुमानजी की माता अंजना और पिता केसरी रहते थे। यहीं पर हनुमानजी का जन्म हुआ था। गुफा का द्वार बड़े पत्थरों से बंद है लेकिन छोटे छिद्र से आदिवासी लोग उस स्थान के दर्शन करते हैं और अक्षत व पुष्प चढ़ाते हैं। लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि यह स्थान माता अंजना के जन्म से जुड़ा है।

(समाप्त)

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