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नहीं बैठते एक नाव में मामा-भानजे!

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Nemawar Narmada uncle nephew coast Siddhnath Temple नेमावर नर्मदा मामा भानजे तट सिद्धनाथ मंदिर
 
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क्या ऐसा हो सकता है कि मामा-भानजे एक नाव में बैठें और वह नदी में पलट जाए? मगर मालवा के एक नगर में सदियों से ऐसी मान्यता है कि यदि मामा-भानजे एक साथ नाव में बैठकर नदी पार करेंगे तो नौका डूब जाएगी।

आखिर इस मान्यता में कितना दम है, यह तो नहीं कहा जा सकता है, किन्तु आज भी लोग इस डर से मुक्त नहीं हुए हैं। आस्था या अंधविश्‍वास की इस बार की कड़ी में हम आपको लेकर चलते हैं नेमावर स्थित नर्मदा नदी के तट पर।

पुण्य सलिला नर्मदा किनारे बसे नेमावर में स्थित है महाभारतकालीन सिद्धनाथ महादेव का मंदिर। नदी के मध्य स्थित नाभि कुंड के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालु आम तौर पर नौका द्वारा ही वहाँ जाते हैं, लेकिन इस विचित्र किंवदंति के चलते कोई भी नाविक मामा-भानजे को नाव में सवारी नहीं करवाता। इस संबंध में लोगों का कहना है कि हम बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं कि मामा-भानजे को लेकर जाने वाली ज्यादातर नौकाएँ मझधार में डूब गईं।

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हालाँकि समय के साथ इस भय से मुक्ति पाने के लिए कुछ उपाय भी ढूँढ़ लिए गए हैं। यदि मामा-भानजे एक साथ नाव में सवारी करना चाहते हैं तो उन्हें विधिवत नौका की पूजा-अर्चना करना होती है।

कन्नौद से आए धर्मेंद्र अग्रवाल और उनके भानजे आयुश अग्रवाल ने कहा कि हमें नाव में बैठना था तो हमने यहाँ पर पहले पूजा-पाठ कराया फिर साथ-साथ नाव में बैठे। डर तो लगता है और यहाँ ऐसे कई हादसे भी हो गए हैं और आए दिन होते ही रहते हैं। फिर भी पूजा-पाठ करा दो तो नाव में बैठ सकते हैं।

नाव चलाने वाले एक नाविक नरेंद्र केवट ने कहा कि हाँ, ऐसी मान्यता तो है, लेकिन नर्मदा मैया की पूजा करने, उन्हें छींटे देने और पैसे चढ़ाने के बाद डरने की कोई बात नहीं है।
पूजा कराने वाले एक पुजारी अखिलेश कुमार व्यास ने कहा कि इस मान्यता के पीछे यह कहानी है कि एक दिन भगवान कृष्ण के मामा कंस उन्हें लेने गोकुल गए। उधर से आते वक्त यमुना नदी में दोनों मामा-भानजे नाव में बैठकर नदी पार कर रहे थे, तभी नदी के बीच में शेषनाग प्रकट हुए और उन्होंने नाव पलट दी। तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि मामा-भानजे एक ही नाव में एक साथ नहीं बैठते। व्यास कहते हैं कि पूजा-पाठ के साथ ही कृष्‍ण नाम का स्मरण करो तो नाव के पलटने का खतरा नहीं रहता।

सदियों से चली आ रही इस प्राचीन मान्यता को आज भी कुछ लोग मानते हैं और कुछ नहीं। इस मान्यता में कितनी सच्चाई है आप हमें जरूर लिखे।

कैसे पहुँचे : इंदौर से मात्र 130 किमी दूर दक्षिण-पूर्व में हरदा रेलवे स्टेशन से 22 किमी तथा उत्तर दिशा में भोपाल से 170 किमी दूर पूर्व दिशा में स्थित है नेमावर। यहाँ नर्मदा नदी का पाट करीब 700 मीटर है।

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