दक्षिण भारत के 15 प्रमुख मंदिर

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019 (18:23 IST)
- आर. हरिशंकर
 
दक्षिण भारत में यूं तो कई प्रसिद्ध मंदिर है जिनकी वास्तुकला देखते ही बनती हैं, लेकिन यहां प्रस्तुत है कुछ खास 15 हिन्दू मंदिरों की संक्षिप्त जानकारी।
 
 
1.भगवान विष्णु का तिरुपति तिरुमाला मंदिर : तिरुपति मंदिर दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। आंध्रप्रदेश राज्य में चित्तूर में स्थित यह मंदिर सभी तीर्थयात्रियों के बीच बहुत ही लोकप्रिय है। प्रतिदिन संपूर्ण भारत और विदेश से बहुत सारे तीर्थयात्री इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं। 
 
यह भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। हर वर्ष करोड़ों रुपए दान मात्र के माध्यम से भक्तों के द्वारा दान किया जाता है और विभिन्न माध्यमों से भी भक्तों के द्वारा दान किया जाता है। नित्या अन्नदानम योजना तिरुपति में बहुत लोकप्रिय है। यहां बहुत से भक्त प्रतिदिन अच्छे और स्वादिष्ट दिव्य भोजन का सेवन कर रहे हैं।
 
 
वर्ष में कम से कम एक बार प्रर्थना करने, हमारी आर्थिक क्षमता अनुसार अन्न दान करने और भगवान श्री वेंकटेश्वर का दिव्य आशीर्वाद पाने के लिए इस मंदिर के दर्शन करने के लिए जाना चाहिए।
 
2.रामनाथ स्वामी मंदिर भगवान शिव : रमानाथ स्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह रामेश्वरम में स्थित है। यहां पर लोग अपने पितरों के लिए श्राद्ध या तर्पण करने के लिए यहां आते हैं, और यह इसके लिए बहुत प्रसिद्ध है। यह दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है।
 
 
100 से अधिक भक्तों के लिए मंदिर में यहां मुफ्त भोजन की व्य‍वस्था की जाती है। इस मंदिर में आदि अमावस्या, थाई अमावस्या और महालया अमावस्या पितृ अनुष्ठान के लिए बहुत लोकप्रिय हैं। आप मंदिर के अंदर स्थित पवित्र कुओं में स्नान कर सकते हैं।
 
विभिन्न पापों से छुटकारा पाने के लिए और पितृ तर्पण करके अपने पितृ ऋणों को चुकाने के लिए भी इस मंदिर की यात्रा करना आवश्यक माना जाता है। रामेश्वरम के आसपास देखने के लिए कई दर्शनीय स्थान हैं। आप रामेश्वरम में अब्दुल कलाम सर के स्मारक भी जा सकते हैं। धनुषकोडि रामेश्वरम के पास स्थित सबसे अच्छा दर्शनीय स्थल है।

 
3.भगवान शिव का विरुपाक्ष मंदिर : विरुपाक्ष मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो कर्नाटक के हम्पी में स्थित है। यह भगवान शिव के पवित्र मंदिर में से एक है जिसे 7 वीं शताब्दी ईस्वी में स्थापित किया गया था। इसे भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है।
 
इस मंदिर की यात्रा जरूर करना चाहिए, क्योंकि यह प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है। यह मंदिर हर साल दिसंबर के महीने में विरुपाक्ष के विवाह उत्सव के समय लोगों की भारी भीड़ को आकर्षित करता है और फरवरी के महीने में, भव्य तरीके से वार्षिक रथ उत्सव मनाया जाता है।
 
 
4.दरासुराम ऐरावतेश्वर मंदिर, भगवान शिव : ऐरावतेश्वर मंदिर राजराजा चोल द्वितीय द्वारा 12वीं शताब्दी ईस्वी बनवाया गया था। मंदिर के अंदर बहुत सारी सुंदर कला और वास्तुकला निर्मित है। मंदिर के सामने कुछ घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा एक विशाल रथ स्थित है। यह भी दक्षिण भारत के शक्तिशाली मंदिरों में से एक है। पेरिया नायकी अम्मन मंदिर इस मंदिर के करीब स्थित है। इतिहास अनुसार, भगवान इंद्र के सफेद हाथी ऐरावत ने इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा की है और इस मंदिर में भगवान यम ने भी पूजा की है।
 
 
5.भगवान शिव और सरस्वती का गंगाईकोंडा मंदिर : यह मंदिर कला और वास्तुकला का बहुत अच्छा नमूना है जो इस मंदिर की पहचान है। अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए इस मंदिर को चोल राजाओं ने स्थापित किया था। पूरे भारत के तीर्थयात्री साल भर इस मंदिर में आते हैं। यह मंदिर भारत के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है।
 
6.भगवान अयप्पा का सबरीमाला मंदिर : भगवान अयप्पा को समर्पित यह मंदिर केरल के प्राचीन मंदिरों में से एक है। पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर को भगवान परशुराम द्वारा स्थापित किया गया था। यह सबसे लोकप्रिय मंदिर है, जिसमें भक्तों के बीच भगवान अयप्पा की पूजा करने के लिए कोई जाति, पंथ और धार्मिक भेदभाव नहीं है। अधिकतर भक्त पोंगल उत्सव और विशु के नववर्ष के दिन इस मंदिर में जाते हैं।
 
 
सभी भक्तों को मंदिर परिसर के अंदर मुफ्त भोजना कराया जाता है। लेकिन किसी एक मंडलम (48 दिनों तक) के लिए उपवास रखना पड़ता है, उन्हें अपने शरीर और मन को शुद्ध करना होता है, और भगवान अय्यप्पन के मंत्र का जाप करना होता है। उपवास की अवधि के दौरान, उन्हें आस-पास के कुछ मंदिरों में भी प्रार्थना करने के लिए जाना पड़ता है।
 
7.अग्नेश्वर या कंजानूर सुकरन मंदिर : अग्नेश्वर मंदिर तमिलनाडु के कंजानूर में स्थित है। कहते हैं कि भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह इसी मंदिर में हुआ था, जिसके साक्षी भगवान ब्रह्मा थे। 
 
चूंकि भगवान अग्नि ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी, इसलिए यह मंदिर उनके नाम पर "अग्नेश्वर" नाम से जाना जाता है। शुक्रवार को इस मंदिर में खास पूजा पाठ होती है। इस मंदिर में भगवान सुकरन का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।
8.भगवान शिव का कपालेश्वर मंदिर : कपालेश्वर मंदिर का निर्माण 8 वीं शताब्दी में पल्लवों द्वारा किया गया था। यह दक्षिण भारत के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर चेन्नई शहर के हृदय स्थल मायलापुर में स्थित है जहां चेन्नई के सभी हिस्सों लोग आसानी से पहुंच जाते हैं। विदेशी भी इस मंदिर का दौरा करते हैं।
 
 
63 नयनमर्स त्योहार इस मंदिर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है और यह हर साल भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस मंदिर में प्रतिदिन 100 से अधिक भक्तों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था की जाती है।
 
9.मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर : मदुरै में स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर दक्षिण भारत का एक सबसे महत्वपूर्ण प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के सभी हिस्सों से भारी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में जाते हैं। यहां अम्मन मंदिर की मुख्य देवी मीनाक्षी हैं।
 
 
मीनाक्षी मंदिर में लक्ष्मी, कृष्ण, रुक्मिणी, ब्रह्मा, सरस्वती, और कई अन्य वैदिक देवताओं के मंदिर भी शामिल हैं। यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है और यह दक्षिण भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। यहां भक्तों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन दिया जाता है।
 
10.भगवान मुरुगन या मुरुगा का थिरुपरकुंडम मंदिर : इस मंदिर को मुरुगा मंदिरों के बीच सबसे पवित्र माना जाता है और यह भगवान मुरुगा के छह अरुपदई वीदु (निवास स्थान) में से एक है। मुख्य मंदिर में भगवान मुरुगा के अलावा, शिव, विष्णु, विनायक और दुर्गा भी हैं।
 
 
मंदिर में शैव परंपरा अनुसार पूजा का पालन किया जाता है। मंदिर में छह दैनिक अनुष्ठान और तीन वार्षिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इतिहास के अनुसार, भगवान मुरुगा ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की है। इस मंदिर में भक्तों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन दिया जाता है।
 
11.भगवान विष्णु का कूदल अलगर मंदिर : यह मंदिर मदुरई में स्थित है और भगवान विष्णु को समर्पित है। मूल रूप से यह मंदिर पंड्यों द्वारा बनाया गया माना जाता है। माना जाता है कि कूदल अल्ज़गर राक्षस सोमका को मारने के लिए प्रकट हुए थे जिसने भगवान ब्रह्मा से चार वेदों को चुरा लिया था।
 
 
त्योहारों के दौरान, बड़ी संख्या में भक्त इस मंदिर में आते हैं। यहां का वार्षिक अलगर उत्सव बहुत लोकप्रिय है। मंदिर में चार दैनिक अनुष्ठान और तीन वार्षिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं। यह विष्णु को समर्पित 108 दिव्यदेशों में से एक है। यहां भी भक्तों को मुफ्त भोजन दिया जाता है।
 
12.चामुंडेश्वरी मंदिर : भारत में कर्नाटक राज्य में मैसूर के पास चामुंडी हिल्स के शीर्ष पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर एक हिंदू मंदिर है। चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और यह देवी पार्वती को समर्पित है। भारत के सभी हिस्सों से श्रद्धालु इस मंदिर में साल भर आते रहते हैं।
 
 
बहुत सी सुंदर प्राकृतिक स्थान पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर को शक्ति पीठ माना जाता है और 18 महाशक्ति पीठों में से एक था। यह 11 वीं शताब्दी ईस्वी में बनाया गया था। मुख्य मूर्ति सोने से बनी थी। मंदिर नवरात्रि जैसे त्योहारों के उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा एक और त्योहार चामुंडी जयंती मनाया जाता है। शुक्रवार का दिन यहां विशेष रूप से शुभ माना जाता है। 
 
13.भगवान शिव का नंजुंदेश्वर मंदिर : नंजुंदेश्वरा मंदिर का निर्माण काबिनी नदी के किनारों के पास किया गया है। नंजनगुडु कर्नाटक राज्य का एक शहर है। नंजनगुड श्रीकांतेश्वर मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। नंजनगुड को 'दक्षिण काशी' भी कहा जाता है। यह शहर केले की पैदावर के लिए भी प्रसिद्ध है। 
 
यहां शिव को नंजुंदेश्वर के रूप में में पुकारा जाता है। इतिहास के अनुसार, उन्होंने जहर पी लिया और इस जहर को स्थायी रूप से अपने गले में रख लिया था और इसे बाहर नहीं छोड़ा, ताकि पृथ्वी और स्वर्ग में सभी जीवित प्राणियों की रक्षा हो सके। दक्षिण काशी कही जाने वाली इस जगह पर स्थापित लिंग के बार में माना जाता है कि इसकी स्थापना गौतम ऋषि ने की थी।
 
14.मंगदु कामाक्षी अम्मन मंदिर, मंगदु : यह सबसे प्रसिद्ध अम्मान मंदिरों में से एक है, जो पास के पूनमल्ली में स्थित मंगदु में स्थित है। मंगदु को कामाक्षी मंदिर में तपस्या करने के लिए जाना जाता है। यह वह स्थान है जहां देवी ने भगवान शिव के साथ विवाह करने और फिर से साथ होने के लिए अपनी तपस्या की थी। देवी द्वारा यहां सभी प्रकार के अनुष्ठान किए गए थे।
 
 
यहां आदि शंकराचार्य द्वारा श्रीचक्र की स्थापना की गई थी। यह प्राचीन मंदिरों में से एक है, और इस मंदिर में भक्त देर से शादी, उचित नौकरी पाने और जीवन की अन्य कामना के लिए समस्याओं के समाधान हेतु आते हैं। आम तौर पर मंगलवार, शुक्रवार और रविवार महत्वपूर्ण दिन होते हैं और मंदिर परिसर के अंदर प्रतिदिन लगभग 200 भक्तों के लिए मुफ्त अन्नदानम की व्यवस्था की जाती है।
   
15.कालिकम्बल मंदिर : कालिकम्बल मंदिर श्री कालिकम्बल और भगवान कामदेसरवर को समर्पित मंदिर है और यह थंबू छेट्टी स्ट्रीट, पैर्रिस, चेन्नई में स्थित है। इस प्राचीन मंदिर में महान राजा छत्रपति शिवाजी ने भी दर्शन किए थे। इस मंदिर में कई मंदिर स्थित है जैसे विनायक, गायत्री देवी, दुर्गा, मुरुगा, विश्वकर्मा, वीरभद्र और नवग्रह मंदिर।
 
 
यह भी कहा जाता है कि काली मूर्ति का उग्र रूप जो पहले पूजा जाता था, को सौम्य रूप से बदल दिया गया है। यहां भी प्रतिदिन दोपहर में लगभग 200 भक्तों को मुफ्त अन्नदान दिया जाता है।
 

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