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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर जानिए गणपति जी के 16 चमत्कारी मंदिर के बारे में रोचक जानकारी

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WD Feature Desk

, मंगलवार, 26 अगस्त 2025 (15:09 IST)
देश-विदेश में भगवान गणेश के हजारों मंदिर हैं जहां पर कई प्राचीन प्रतिमाएं विराजमान हैं परंतु देश में कुछ ऐसे खास मंदिर हैं जहां जातक आपकी मनोकामना पूर्ण होती है और जिन्हें चमत्कारी मंदिर माना जाता है। आओ जानते हैं ऐसे ही खास 16 मंदिरों की संक्षिप्त जानकारी। 
 
1. डोडीताल, उत्तराखंड: उत्तरकाशी जिले के डोडीताल को गणेशजी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर माता अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर हैं जहां गणेशजी अपनी माता के साथ विराजमान हैं। डोडीताल, जोकि मूल रूप से बुग्‍याल के बीच में काफी लंबी-चौड़ी झील है, वहीं गणेश का जन्‍म हुआ था।
 
2. सिद्धि विनायक गणेश मंदिर मुंबई: इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर सन 1801 में गुरुवार के दिन पूर्ण हुआ था। मुंबई प्रभादेवी में काका साहेब गाडगिल मार्ग और एस.के. बोले मार्ग के कोने पर वह मंदिर स्थित है। मंदिर की सिद्ध‍ि और प्रसिद्ध‍ि इतनी है कि आम हो या खास, सभी बप्पा के दर पर खिंचे चले आते हैं। महाराष्‍ट्र में सिद्धि विनायक मंदिर की तरह भी दगड़ू सेठ गणपति का मंदिर भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। 
 
3. मोरेश्वर मंदिर, मोरगांव (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र में अष्ट विनायक मंदिर भी चमत्कारी मंदिर माने जाते हैं। इसमें से पहला और प्रमुख मंदिर मोरेश्वर मंदिर  है। यह मंदिर चतुर्भुज गणपति को समर्पित है और प्राचीन पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है।
 
4. श्री बल्लेश्वर गणपति मंदिर, पाली (महाराष्ट्र): यह मंदिर में अष्टविनायक यानी आठ मंदिरों में से एक है और यह भी चमत्कारी एवं पवित्र मंदिर है। यह मंदिर बल्लाल नामक भक्त की कथा से जुड़ा है।
 
5. चिंतामन गणपति उज्जैन: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से करीब 6 किलोमीटर दूर ग्राम जवास्या में भगवान गणेश का प्राचीनतम मंदिर स्थित है। इसे चिंतामण गणेश के नाम से जाना जाता है। गर्भगृह में प्रवेश करते ही गणेशजी की तीन प्रतिमाएं दिखाई देती हैं। पहला चिंतामण, दूसरा इच्छामन और तीसरा सिद्धिविनायक। यह स्वयंभू मूर्तियां हैं। उज्जैन में बड़ा गणेश का मंदिर भी चमत्कारी मंदिर है।
 
6. श्यामकर्ण विनायक, उज्जैन (मध्य प्रदेश): उज्जैन में ही चिंतामण के अलावा एक और गणेश मंदिर है। कालभैरव और महाकाल क्षेत्र में स्थित यह मंदिर ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां गणेश जी के श्याम वर्ण रूप को पूजा जाता है जो कि दुर्लभ है।
 
7. खजराना गणेश मंदिर, इंदौर: मध्यप्रदेश में चिंतामण गणपति की तरह इंदौर का खजराना गणेश मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। वक्रतुंड श्रीगणेश की 3 फुट प्रतिमा चांदी का मुकुट धरे रिद्धी-सिद्धी के साथ विराजमान हैं जिनका नित्य पूजन विधि-विधान से होता है।
 
8. रॉकफोर्ट उच्ची पिल्लयार मंदिर, तमिलनाडु: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) में रॉक फोर्ट नामक पहाड़ी के सबसे उपर स्थित उच्ची पिल्लयार मंदिर बहुत ही प्राचीन माना जाता है। यहां रावण के भाई विभीषण ने एक बार भगवान गणेशजी पर वार किया था। तब गणेशजी अपने असली रूप में प्रकट हो गए तो यह देखकर विभीषण पछताए और उन्होंने क्षमा मांगी थी तभी से इस चोटी पर गणेशजी विराजमान हैं।
 
9. कर्पग विनायगर, तमिलनाडु: तमिलनाडु के मदुरै के पिल्लयारपत्ति में भगवान गणेशजी की प्रतिमा एक गुफा में स्थित है। यहां गणेशजी कर्पग विनायगर नाम से पूजे जाते हैं।
 
10. कनिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर: यह मंदिर आंधप्रदेश के चित्‍तूर जिले में तिरूपति मंदिर से 75 किमी दूर स्थित है। यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्‍त अपने पाप धोने के लिए मंदिर के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं।
 
11. मनकुला विनायगर मंदिर, पुडुचेरी: भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक इस मंदिर के बारे में मान्‍यता है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा को कई बार समुद्र में फेंक दिया गया था, लेकिन यह उसी स्‍थान पर फिर से प्रकट हो जाती थी।
 
12. मधुर महागणपति मंदिर, केरल: मधुवाहिनी नदी के तट पर स्थित दसवीं शताब्दी के इस मंदिर की गणेश मूर्ति न ही मिट्टी की बनी है और न ही किसी पत्‍थर की यह न जाने किस तत्‍व से बनी है। इस मंदिर और इसकी मूर्ति को नष्ट करने के लिए एक बार टीपू सुल्‍तान यहां आया था परंतु यहां की किसी चीज ने उसे आकर्षित किया और उसका फैसला बदल गया।
 
13. डोडा गणपति मंदिर, बेंगलुरु: डोड्डा बसवन्ना गुड़ी में स्थित यह मंदिर कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित है जिसकी प्रसिद्धि भी दूर दूर तक फैली है।
 
14. रणथंबौर गणेश मंदिर, राजस्‍थान: वाइल्‍ड लाइफ के अलावा रणथंबौर नेशनल पार्क अपने मंदिर के लिए भी फेमस हैं। भारी संख्‍या में भक्‍तजन यहां गणेशजी के त्रिनेत्र स्‍वरूप के दर्शन करने आते हैं। करीब 1000 साल पुराना यह मंदिर रणथंबौर किले में सबसे ऊंचाई पर स्थित है। यहां गणेश जी के तीन नेत्र (त्रिनेत्र) वाले रूप की पूजा होती है।
 
15. गणेश टोक मंदिर, गंगटोक (सिक्किम): बौद्ध धर्म के अनुयायियों के इस स्‍थान पर गणेशजी का यह मंदिर अपनी खूबसूरती और बेहतरीन लोकेशन के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के अंदर गणेश जी की विशाल और सुंदर प्रतिमा है। मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा पथ से गंगटोक शहर का नजारा मन को मोह लेता है।
 
16. मनकुला विनायगर मंदिर, पुदुचेरी: फ्रेंच कॉलोनी के बीच स्थित यह मंदिर आस्था और पर्यटन दोनों का केंद्र है। यहां हाथी द्वारा आशीर्वाद देने की परंपरा है।

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