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Thursday, 3 April 2025
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करि‍यर 2010 : नौकरि‍यों का सावन

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वर्ष 2010 करि‍यर के मामले में बहुत भाग्‍यशाली रहा। साल के अंत तक तो भारत को नौकरि‍यों का गढ़ तक घोषि‍त कर दि‍या गया है। यहाँ तक कि‍ अपनी राजनीति‍क यात्रा पर आए अमरीकी राष्ट्रपति‍ बराक ओबामा ने भारत से नौकरि‍यों की माँग कर डाली। जहाँ एक ओर भारत ने दुनिया को आर्थिक मंदी से निपटने के रास्ते दिखाए हैं वहीं रोजगार सृजन में भी भारत ने कई देशों को पछाड़ दिया है।

आँकड़ों की बात करें तो मॉ फोई रैंडस्टैड इंप्लॉयमेंट टे्रंड्स सर्वे (एमईटीएस) के नवीनतम परिणाम बताते हैं कि भारतीय संगठित क्षेत्र ने जनवरी से लेकर सितंबर 2010 के बीच 7,39,064 रोजगार उत्पन्न किए और वर्तमान तिमाही में यह क्षेत्र 3,94,700 नए रोजगारों का सृजन करेगा।

अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2010 तक के लिए नवीनतम निष्कर्ष यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर आर्थिक मंदी से पूर्व की स्थिति में आ गई है।

वर्ष 2010 की शुरुआत में एमईटीएस ने इस वर्ष 10 लाख नए रोजगारों के सृजन की भविष्यवाणी की थी। एमईटीएस का नया सर्वे भारत में भर्तियों (किराए पर लेना) क्षेत्र के साथ स्वास्थ्यसेवा, रीयल एस्टेट एवं निर्माण, हॉस्पिटेलिटी, सूचना तकनीकी एवं सूचना तकनीकी द्वारा जनित सेवाओं के क्षेत्र में आकलन से अधिक वृद्धि दर्शा रहा है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र की बात की जाए तो इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 दौरान इसने 370 करोड़ रुपए का कारोबार किया है।

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आईडीएसए की महासचिव छवि हेमंत ने कहा कि प्रत्यक्ष विक्रय उद्योग में फिलहाल 3 लाख स्वतंत्र बिक्री कंसलटेंट (आईएससी) काम कर रहे हैं। साथ ही इस क्षेत्र में रोजगार की दृष्टि से अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र खासकर महिलाओं को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

संगठित क्षेत्र के लिए अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2010 तक की अवधि तक का नवीनतम निष्कर्ष और जनवरी से लेकर सितंबर 2010 के बीच रोजगारों के वास्तविक सृजन का आकलन आठ प्रमुख शहरों- अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और पुणे में 13 उद्योग क्षेत्रों की 660 कंपनियों में रोजगार के प्रचलन के सर्वे का परिणाम है।

इन कंपनियों ने वर्ष के प्रथम 9 माह में भर्तियों के लिए पूछताछ की और अगले 3 माह में भर्तियों की इच्छा जताई। एमईटीएस ने यह पाया कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्था अब भी वैश्विक मंदी से उबरने की प्रक्रिया में है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत वापसी दिखाई है और इस वित्तीय वर्ष की प्रथम दो तिमाहियों में अच्छी गति प्राप्त कर ली है।

इस अवसर पर मॉ फोई रैंडस्टैड के प्रबंध निदेशक के. पांडिया राजन ने कहा, 'हमने देश में संगठित रोजगार के संपूर्ण परिदृश्य में सकारात्मक वृद्धि देखी है क्योंकि कंपनियाँ इस वर्ष के लिए अपेक्षित नियुक्तियों से अधिक नियुक्तियाँ कर रही हैं। हमने पाया है कि उद्योगों ने अपना खोया आत्मविश्वास फिर से प्राप्त कर लिया है और नियुक्तियों में आई तेजी यह स्पष्ट करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और संगठित क्षेत्र की कंपनियाँ भविष्यगामी वृद्धि की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में हमें भर्तियों में और अधिक तेजी तथा वेतन वृद्धि की अपेक्षा है।'

क्षेत्रनौकरि‍याँ
आईटी1,16,700
हेल्थ2,60,752
रियल एस्टेट एवं निर्माण1,50,512
मुंबई1,07,806
चेन्नई32,087
दिल्ली1,13,897
कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद 26,534

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शहरवार रोजगार का प्रचलन
सर्वे में शामिल शहरों के बीच दिल्ली और एनसीआर ने 2010 में सर्वाधिक 1,13,897 रोजगार उत्पन्न किए। इस क्षेत्र ने अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2010 के दौरान 44183 रोजगारों का सृजन किया जो कि इस वर्ष में अभी तक सर्वाधिक है। 2010 की तीसरी तिमाही के दौरान बड़े पैमाने पर भर्तियाँ हुईं। 2010 की तीसरी तिमाही में राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से भी इस क्षेत्र में भर्तियाँ बढ़ीं।

इसके बाद मुंबई का नंबर आता है, जहाँ 2010 में 107806 रोजगारों का सृजन हुआ। चेन्नई में इस साल के प्रथम अर्द्ध वर्ष में उदासीन परिदृश्य की तुलना में तीसरी तिमाही में उल्लेखनीय उन्नति हुई और चौथी तिमाही में यह तेज गति से वृद्धि कर रहा है। इस क्षेत्र द्वारा वर्तमान तिमाही में 32,087 रोजगारों का सृजन किए जाने की संभावना है।

कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में भर्तियों में तीसरी तिमाही के दौरान तेजी आई और विगत दो तिमाहियों की तुलना में अत्यधिक रही। वर्तमान तिमाही में यह तीनों मेट्रो शहर कुल मिलाकर 26,534 रोजगारों का सृजन करेंगे। अहमदाबाद और पुणे ने इस वर्ष की तीसरी तिमाही में भर्तियों में शानदार तेजी दिखाई। वर्तमान तिमाही में यह दोनों शहर 11345 नए रोजगार उत्पन्न कर रहे हैं।

कहाँ कि‍तनी नियुक्तियाँ
यह सर्वे दर्शाता है कि बीएफएसआई क्षेत्र नवागंतुकों के लिए सर्वाधिक संख्या में नए रोजगार उत्पन्न कर रहा है (32.5 प्रतिशत), जिसके बाद मशीनों और उपकरणों के उत्पादन क्षेत्र (32.2 प्रतिशत) और स्वास्थ्य क्षेत्र (32.1 प्रतिशत) का नंबर आता है। अनुभवी कर्मचारियों को नियुक्त करने में फार्मास्यूटिकल क्षेत्र अग्रणी रहा है (83.7 प्रतिशत), जिसके बाद उपभोक्ता, रिटेल एवं सेवा युक्त व्यापार (76.5 प्रतिशत) तथा ऊर्जा क्षेत्र (73.6 प्रतिशत) की बारी है।

रोजगारों का रुझान
सर्वे के मुताबिक, सभी क्षेत्रों में रोजगारों के सृजन में तेजी से वृद्धि हो रही है, जो कि अगली तिमाही में भी जारी रहने की अपेक्षा है। यह क्षेत्र हैं- बीएफएसआई, सूचना तकनीकी एवं सूचना तकनीकी द्वारा जनित सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, उपभोक्ता, रिटेल और सेवा सहित व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, भंडारण और दूरसंचार, रियल एस्टेट और निर्माण, हॉस्पिटेलिटी, मीडिया एवं मनोरंजन, गैर-मशीनी उत्पादन, मशीनों और उपकरणों द्वारा उत्पादन, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं परामर्श।

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स्वास्थ्य क्षेत्र ने 2010 में 2,60,052 रोजगारों का सृजन कर सर्वाधिक रोजगार उत्पन्न किये। यह क्षेत्र देश के सर्वाधिक उन्नतिशील और सबसे बड़े सेवा क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद व्यय वर्ष 2009 के 5.5 प्रतिशत के मुकाबले 2010 में 8 प्रतिशत रहा। इसे आने वाले समय का सबसे बड़ा क्षेत्र माना जा रहा है।

हॉस्पिटेलिटी, रियल एस्टेट एवं निर्माण, सूचना तकनीकी और सूचना तकनीकी द्वारा जनित सेवाओं जैसे क्षेत्रों ने भी 2010 में पृथक रूप से एक लाख से अधिक रोजगारों का सृजन किया। 2010 में 1,65,700 रोजगार उत्पन्न करने वाले सत्कार क्षेत्र ने अंतिम छह माह में शानदार उन्नति की।

इसका श्रेय विदेशी पर्यटकों के आगमन में तेजी, होटल की आधारभूत संरचना में भारी निवेश और सरकार की उदार नीतियों को जाता है। कई नए होटलों को प्राप्त हो रहा अनुमोदन भी निकट भविष्य में रोजगार के उल्लेखनीय सृजन का संकेत दे रहा है।

रियल एस्टेट एवं निर्माण क्षेत्र में आए उछाल के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में रोजगारों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र ने 2010 में कुल 1,50,512 रोजगारों का सृजन किया।

मंदी की गहरी चोट खाने के बावजूद सूचना तकनीकी और सूचना तकनीकी द्वारा जनित सेवाओं के क्षेत्र ने शानदार वापसी की है और 97,000 रोजगारों के सृजन की भविष्यवाणी को गलत सिद्ध करते हुए 1,16,700 रोजगार उत्पन्न किए हैं।

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