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जब टूटे नादाँ दिल...

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हमें फॉलो करें टूटे दिल समझाएँ
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दिल का मामला बड़ा ही अजीबो-गरीब होता है। आप इसके रस्ते जरा से भावुक हुए और दिमाग पर से आपका कंट्रोल हटा। इसलिए बेहतर तो यही है कि इस रोग से दूर से ही नमस्ते की जाए, लेकिन यदि दिल कहीं लग ही गया है और उसे चोट भी लगी है तो इस तरह से उसकी साज-संभाल करें।

* टूटे दिल का बोझ छाती पर न रखें। अपने मन की भावनाओं को बाहर निकाले। रोएँ, चिल्लाएँ, तकिए पर चोट करें। इससे बहुत राहत मिलेगी। मन हल्का करने के लिए अपने किसी अजीज से अपने दिल की बात कहें, उसे राजदाँ बनाएँ। दोस्त नहीं है तो घर के किसी सदस्य को अपने बारे में सब कुछ बताएँ।

* जरूरी नहीं है कि आप में ही कोई खोट हो। अपने आपका अवमूल्यन क्यों करें? बेहतर है अपने मन को समझाएँ कि वह बेवफा प्रेमी प्यार के लायक था ही नहीं। अच्छा हुआ विवाह करने से पहले ही सारी असलियत सामने आ गई।

* अपना ध्यान कुछ रचनात्मक कार्यों जैसे बागवानी, संगीत, खाना बनाना आदि में लगाएँ।

* टूटे दिल के बोझ को हल्का करने का एक प्राकृतिक तरीका है दूर तक पैदल घूमें। अगर तैरना आता है और सुविधा है तो देर तक तैरें। कोई कॉमेडी फिल्म देखें।

* अगर कोई दोस्त शहर से बाहर कहीं दूसरी जगह रहता है तो उसके यहाँ घूम आएँ।

* घर के कामों में हाथ बटाएँ।

* ध्यान बँटाने के लिए जिम ज्वाइन करें।

* पार्लर में जाकर मसाज कराएँ, अपने कमरे या ऑफिस की जगह को साफ-सुथरा बनाएँ।

* सुबह-सुबह पार्क जाएँ, वहाँ मंडली बनाकर योग करने वालों से बातें करें। योग सीखें।

* जो प्रेमी आप से दूर हो गया है उसके बारे में भी अच्छी विचारधारा रखें। इससे आप में हिचक प्रवृत्ति में कमी आएगी और मन का जहर घुल जाएगा।

* यह सोचें कि जो कुछ हुआ अच्छा हुआ, शायद आगे और बहुत कुछ ऐसा होता, जो गलत होता।

* यदि इस सबके बाद भी मन पुरानी यादों में भटकता रहे तो किसी मनोचिकित्सक से मिलें। वह आपको स्वस्थ करने में मदद देगा।

* दिल में बसी पुरानी यादों को निकालने के लिए एक मनोवैज्ञानिक तरीका यह है कि जो कुछ भी आपके दिल-दिमाग में उमड़-घुमड़ रहा हो उसे तब तक लिखते रहें जब तक थककर हाथ लिखना बंद न कर दें।

* बार-बार यह प्रक्रिया अपनाएँ एक स्थिति ऐसी आएगी कि आप ऊब जाएँगे और लगने लगेगा कि संबंध टूटना सही ही हुआ।

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