| एक शायर ने लिखा है, 'जिसने दिल खोया, उसी को कुछ मिला/ फायदा देखा, इसी नुकसान में।' इसके बाद मुहब्बत उस चोर पर मेहरबान हुई या नहीं, यह पता नहीं चल सका। फिर भी प्रेम और नारी को जानने वाले कहते हैं कि प्रेमिका ने निश्चित ही उसे माफ कर दिया होगा।
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प्यार की दुनिया में यह एक उदाहरण है। प्यार केवल इस उदाहरण तक सीमित नहीं है, न ही यह नियम हो सकता है कि ऐसा कोई और करे तो वह भी अपनी प्रेमिका को जीत सकता है। प्यार के हर एक उदाहरण का अपना-अपना अंदाज है, अपनी-अपनी रीत है। नियम का निर्धारण उसप्रेम प्रसंग की 'सिचुएशन' करती है। 'प्रेम भाव इक चाहिए, भेष अनेक बनाय,/ चाहे घर में वासकर, चाहे वन को जाय।'
दरिया के किनारे बैठकर तैरने का सपना देखने वाला, तैरना कभी नहीं सीख पाता है। जो इस सागर में उतरा, उसी को किनारा मिला है। प्रेम के रसायनशास्त्रमें जो महत्व डोपामाइन का बताया जाता है, वही महत्व प्यार के इस भौतिकवाद में आकर्षण को दिया जाता है। बिलकुल उसी तरह जैसे प्रख्यात प्रेम प्रसंगों में प्रेमिका का नाम प्रेमी के नाम के पहले लिया जाता है- लैला-मजनू, सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा (और राधा-कृष्ण भी)।
विज्ञान कुछ भी तय करे, साहित्य जो भी बखान करे, कानून कुछ भी कहे, समाज कुछ भी सोचे- प्रेम की परिभाषा तय कर उसके नियम बनाना न कभी संभव था, न कभी संभव होगा। नियम बन गए तो वह प्रेम नहीं होगा, एक क्रियामात्र रह जाएगा। रूह की खुराक मोहब्बत को कहा जाता है और, 'नेह जरावत दुहुन को, दीपक और पतंग/ जरिबो और जराइबो याही रहत उमंग।'