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'जो जाके मन में बसै...'

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प्रेम के रसायन शास्त्र में केवल यह पता चल सका है कि यह पूरी तरह दिल का नहीं, मस्तिष्क का भी मामला है, अमरीकी मानव विज्ञानी हेलेन फिशर का मानना है कि रोमांस के लिए जिम्मेदार हार्मोन डोपामाइन मस्तिष्क में पाया जाता है। यह तीव्र उत्तेजक होता है। यह खोज मोहब्बत के सारे समीकरणों को बदल देगी।

अब तक दिल और उसके धड़कने के साथ ही मोहब्बत का रिश्ता माना जाता रहा है। इस क्रांतिकारी खोज के बाद भी अभी मोहब्बत के बारे में बहुत कुछ जानना शेष है। एक उदाहरण देखें। कहा जाता है और देखा भी गया है कि प्यार पहली नजर का ही होता है। मान लिया कि डोपामाइन यह करिश्मा करता है। प्यार में विश्वास एक अनिवार्य तत्व होता है।

क्या डोपामाइन विश्वास भी पैदा करता है, उत्तेजना पैदा करने की तरह? ऐसी किसी खोज की जानकारी नहीं है जो यह सिद्ध करती हो कि मस्तिष्क मोहब्बतके साथ-साथ उसके लिए अनिवार्य विश्वास को भी पैदा करता है। या मस्तिष्क डोपामाइन पैदा कर रोमांस की भावना को जगाता है और दिल कुछ ऐसा करता है कि उस रोमांस में विश्वास पैदा हो जाए?

अब सवाल आता है कि मोहब्बत/ प्रेम/ प्यार का रसायनशास्त्र जानने की आवश्यकता क्यों पड़ी? ऐसी घटनाएँ दैनंदिनी जीवन में अनेक देखने के लिए मिलती हैं, जिनमें निहित प्यार को स्पष्ट देखा तो जाता है लेकिन किसी तर्क से उसकी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। ऐसी हीएक घटना का पता हाल ही में चला है। घटना जापान की है। यहाँ यह दोहरा देना प्रासंगिक होगा कि प्यार किसी भौगोलिक सीमा से बँधा नहीं होता है।

आज यह घटना जापान में हुई, किसी दिन भारत में हो सकती है, और कहीं भी हो सकती है। एक तैंतीस वर्षीय चोर ने डाकघर से तीन लाख चालीस हजार येन राशि चुरा ली। यह खबर उसकी प्रेमिका को पता चली। इधर चोर को भी पता चल गया कि प्रेमिका इस चोरी के बारे में जान गई है। यह बताने की आवश्यकता शायद ही पड़ेगी कि प्यार में यदि कोई बड़ा खतरा होता है, तो वह प्रेमिका की नजरों में प्रेमी की छवि बिगड़ने का होता है। जिगर मुरादाबादी का शेर है 'निगाह-ए-मुहब्बत, दिखाती है सब कुछ/ न तुम देखते हो, न हम देखते हैं।' रोमांस के मरीज उस चोर ने इस खतरे को भाँप लिया। डाकघर से चुराई गई राशि में दस हजार येन और जोड़कर उसने पूरी राशि डाकघर को लौटा दी।

जाहिर है इस आधुनिक वाल्मीकि के इस सद्कार्य की खबर उसकी प्रेमिका को अवश्य ही दी गई होगी। चोरी पर मोहब्बत के इस भाव का इतना प्रभाव एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाएगी। एक शायर ने लिखा है, 'जिसने दिल खोया, उसी को कुछ मिला/ फायदा देखा, इसी नुकसान में।' इसके बाद मुहब्बत उस चोर पर मेहरबान हुई या नहीं, यह पता नहीं चल सका। फिर भी प्रेम और नारी को जानने वाले कहते हैं कि प्रेमिका ने निश्चित ही उसे माफ कर दिया होगा।

'प्रेम जुवा के खेल में 'अहमद' उल्टी रीत/ जीते ही को हारिबो, हारेकी ही जीत।' प्रेम में विश्वास का यही आधार है कि हारकर उस चोर ने प्यार जीत लिया होगा। फिर एक बात और भी है- सुंदर हो या कुरूप, जिसकी जिसमें मनोगति है, वही उसके लिए उर्वशी है, रम्भा है।
एक शायर ने लिखा है, 'जिसने दिल खोया, उसी को कुछ मिला/ फायदा देखा, इसी नुकसान में।' इसके बाद मुहब्बत उस चोर पर मेहरबान हुई या नहीं, यह पता नहीं चल सका। फिर भी प्रेम और नारी को जानने वाले कहते हैं कि प्रेमिका ने निश्चित ही उसे माफ कर दिया होगा।
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प्यार की दुनिया में यह एक उदाहरण है। प्यार केवल इस उदाहरण तक सीमित नहीं है, न ही यह नियम हो सकता है कि ऐसा कोई और करे तो वह भी अपनी प्रेमिका को जीत सकता है। प्यार के हर एक उदाहरण का अपना-अपना अंदाज है, अपनी-अपनी रीत है। नियम का निर्धारण उसप्रेम प्रसंग की 'सिचुएशन' करती है। 'प्रेम भाव इक चाहिए, भेष अनेक बनाय,/ चाहे घर में वासकर, चाहे वन को जाय।'

दरिया के किनारे बैठकर तैरने का सपना देखने वाला, तैरना कभी नहीं सीख पाता है। जो इस सागर में उतरा, उसी को किनारा मिला है। प्रेम के रसायनशास्त्रमें जो महत्व डोपामाइन का बताया जाता है, वही महत्व प्यार के इस भौतिकवाद में आकर्षण को दिया जाता है। बिलकुल उसी तरह जैसे प्रख्यात प्रेम प्रसंगों में प्रेमिका का नाम प्रेमी के नाम के पहले लिया जाता है- लैला-मजनू, सोहनी-महिवाल, हीर-रांझा (और राधा-कृष्ण भी)।

विज्ञान कुछ भी तय करे, साहित्य जो भी बखान करे, कानून कुछ भी कहे, समाज कुछ भी सोचे- प्रेम की परिभाषा तय कर उसके नियम बनाना न कभी संभव था, न कभी संभव होगा। नियम बन गए तो वह प्रेम नहीं होगा, एक क्रियामात्र रह जाएगा। रूह की खुराक मोहब्बत को कहा जाता है और, 'नेह जरावत दुहुन को, दीपक और पतंग/ जरिबो और जराइबो याही रहत उमंग।'

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