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फिर थर्राया बंबई शेयर बाजार

सेंसेक्स 15000 से नीचे, 615 अंक ‍की गिरावट

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शेयर बाजार मंदी
अमेरिका के प्रॉपर्टी बाजार की बढ़ती चिंता ने मात्र एक सप्ताह के भीतर देश के शेयर बाजारों को बुरी तरह हिलाकर रख दिया। इसके चलते बम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स अपने डेढ़ सौ वर्ष के इतिहास की बुधवार को तीसरी बड़ी गिरावट का शिकार बना।

अमेरिका में आवास क्षेत्र में ऋण फँसने की संभावनाएँ दिनोदिन बढ़ती जा रही हैं। इसके चलते शुक्रवार को सेंसेक्स में पाँचवीं बड़ी गिरावट आई थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज और हिन्दुस्तान लीवर समेत कई बड़े सार्वजनिक उपक्रमों के अच्छे परिणामों से शेयर बाजार दो दिन तो मार से बच गए, किंतु इस चिंता ने बुधवार को शेयर बाजारों को निचोड़कर रख दिया।

सेंसेक्स 615 अंक अर्थात 3.96 प्रतिशत के नुकसान से गत 11 जुलाई के बाद 15000 अंक से नीचे उतर आया। आज की गिरावट सेंसेक्स की अंकों के लिहाज से तीसरी बड़ी गिरावट रही। शुक्रवार को सेंसेक्स ने 541 अंक का झटका खाया था।

कारोबार के दौरान बिकवाली का इतना अधिक दबाव था कि सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में एक भी बढ़त नहीं पा सकी। ताबड़तोड़ बिकवाली के चलते सेंसेक्स के नुकसान वाले पहले दस शेयरों में पाँच प्रतिशत और इससे अधिक की गिरावट रही। सबसे अधिक नुकसान एसीसी के शेयर में 8.87 प्रतिशत थी।

एनएसई का निफ्टी भी 183 अंक अर्थात 4.04 प्रतिशत के नुकसान से 4345.85 अंक रह गया। एनएसई के इतिहास की यह चौथी बड़ी गिरावट है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के आवास बाजार की स्थिति को देखते हुए निवेशकों के जोखिमभरे क्षेत्रों से अपने हाथ खींचने के परिणामस्वरूप शेयर बाजार टूटे हैं। कच्चे तेल की कीमतों के फिर से 78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच जाने ने भी शेयर बाजारों को धक्का दिया है।

डाउजोंस इंडस्ट्रियल एवरेज और नास्डाक कम्जोजिट इंडेक्स में गत दिवस खासी गिरावट रही। हालाँकि आज इनमें कुछ सुधार दिखा। एशियाई शेयर बाजारों में आज चार प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जबकि दोपहर से पहले के कारोबार में यूरोपीय बाजार में भी दो प्रतिशत से अधिक का नुकसान झलक रहा था।

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