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शेयर बाजारों में उथल-पुथल की संभावना

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शेयर बाजार बीएसई
देश के शेयर बाजारों में बीते दो सप्ताह से जारी उथल-पुथल के आगामी हफ्ते भी जारी रहने की अधिक संभावना है।

गत सप्ताह भारी उठापटक के बाद बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के सेंसेक्स में 96 अंक और नेशनल स्टाक एक्सचेंज (एनएसई) निफ्टी में 44 अंक का नुकसान हुआ।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में जो विदेशी शेयर बाजारों की स्थिति है उसे देखकर आगामी सप्ताह भारी उथल-पुथल की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। शुक्रवार को अमेर‍िका के शेयर बाजारों में तीव्र गिरावट देखी गई। अमेर‍िका के रहन बाजार की स्थिति के दिनों-दिनों खराब होने का असर वहाँ के शेयर बाजारों पर निरंतर दिख रहा है।

अमेर‍िका शेयर बाजारों के शुक्रवार के कारोबार के अंतिम आँकड़ों के मुताबिक डाऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 2.12 प्रतिशत अर्थात 284.84 अंक के नुकसान से गैर आधिकारिक रूप से 13178.49 अंक पर बंद हुआ।

स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स 500 इंडेक्स 39.39 अंक अर्थात 2.68 प्रतिशत के नुकसान से 1432.81 और नास्डाक कम्पोजिट 64.73 अंक यानि 2.51 प्रतिशत की गिरावट से 2511.25 अंक रह गया।

दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपीटल मार्केट लिमिटेड अशोक कुमार अग्रवाल का कहना है कि आगामी सप्ताह शेयर बाजारों में भारी उठापटक रहने की अधिक संभावना है। उनकी राय में सेंसेक्स में 500 से लेकर 1000 अंक के बीच घट बढ़ सकता है।

अग्रवाल के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने के नफा और नुकसान स्वाभाविक हैं और अमेर‍िकी शेयर बाजारों के मंदे की धमक का असर यहाँ न पड़े इसकी संभावना कम ही।

उनका कहना है कि आगामी सप्ताह शेयर बाजारों में चौतरफा उठापटक रहेगी और शायद ही कोई वर्ग इससे अछूता रह पाएगा। वह कहते हैं कि रिजर्व बैंक के ऋण एवं मौद्रिक नीति की समीक्षा के समय नगद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) में आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी से ब्याज दरों के नीचे आने की संभावनाएँ धूमिल हो गई हैं।

रिजर्व बैंक ने मँहगाई को काबू में रखने के लिए तरलता को कम करने के वास्ते सीआरआर को आधा प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। इससे बैकिंग तंत्र से 15 हजार करोड़ रुपए कम हो जाएँगे।

वैसे अग्रवाल दीर्घकालिक लिहाज से बाजार की मजबूती को लेकर पूरी तरह आशान्वित हैं। हालाँकि मुद्रास्फीति की दर 21 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में 0.05 प्रतिशत गिरकर 4.36 रह गई है, लेकिन इसे लेकर अभी चिंता बरकरार है।

बीते सप्ताह शेयर बाजारों में भारी उठापटक रही। बुधवार के कामकाज में सेंसेक्स अपने इतिहास की तीसरी बड़ी गिरावट का स्वाद चखा। इस दिन कारोबार की समाप्ति पर सेंसेक्स 615.22 अंक के नुकसान से 11 जुलाई के बाद पहली बार 14935.77 अंक नीचे आया। निफ्टी में 183.85 अंक का नुकसान हुआ।

इससे पहले सप्ताह के कारोबार की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत हुई। रिलायंस इंडस्ट्रीज और हिन्दुस्तान यूनीलीवर के अच्छे परिणामों ने वैश्विक मंदी के असर को थामने में अहम भूमिका निभाई और सेंसेक्स 26 अंक ऊँचा रहा। मंगलवार को अच्छी लिवाली से सेंसेक्स 290 अंक उछल गया, किंतु बुधवार को यह औंधे मुँह नीचे आया।

अंतिम दो कारोबारी दिवस में सुधरने के बावजूद सेंसेक्स बुधवार की गिरावट की भरपाई नहीं कर पाया और सप्ताहांत कुल 96.17 अंक अर्थात 0.63 प्रतिशत के नुकसान से 15138.40 अंक पर बंद हुआ।

सप्ताह के दौरान सेंसेक्स का न्यूनतम स्तर 14896.47 और अधिकतम 15568.85 अंक रहा। निफ्टी 43.65 अंक अर्थात 0.98 प्रतिशत गिरकर 4401.55 अंक रह गया।

बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की बिक्री भी चिंता बनी हुई है। विदेशी निवेशकों ने 27 जुलाई से दो अगस्त के पाँच कारोबारी दिवसों में 1341 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की। शुक्रवार के प्रारंभिक आँकड़ों के मुताबिक इनकी शुद्ध बिकवाली 142 करोड़ 70 लाख रुपए की रही है।

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