Publish Date: Fri, 22 Apr 2016 (15:25 IST)
Updated Date: Fri, 22 Apr 2016 (16:05 IST)
सिंहस्थ दत्त अखाड़ा क्षेत्र में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के 13 मढ़ी के ब्रह्मलीन अष्टकौशल महंत गौतमगिरि महाराज के शिष्य महंत गोपालानंदगिरि महाराज पिछले दस वर्षों से खड़े हैं। वे खड़े खड़े ही खाते पीते और सोते हैं। सभी कार्य वह खड़े खड़े ही करते हैं। इस माह के प्रथम गुरुवार को रात 11.38 बजे खड़ेश्वरी तपस्या के 10 वर्ष पूर्ण किए।
गुजरात के रामपीर मंदिर बाबरु महासाणा स्थिति आश्रम के महंत गोपालानंदगिरि ने 2006 में इस तपस्या को 51 वर्ष की उम्र में शुरु किया था। जनकल्याण की भावना को लेकर शुरु की गई तपस्या ने 11वें साल में प्रवेश किया। इस अवसर पर अखाड़े के गुरुभाई ने खीर प्रसाद तैयार कर भक्तों में वितरण किया। गुरुभाई 14 साल से खड़ेश्वरी तपस्या कर चुके महंत राजराजेश्वरीगिरि, फल्हारी तपस्वी महंत सुभाषगिरि महाराज ने खीर प्रसाद तैयार कर भक्तों में वितरण किया। महंत ने बताया कि खड़ेश्वरी की इस तपस्या को वे लंबे समय तक जारी रखेंगे।