नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान पीआर श्रीजेश ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए रविवार को लंदन रवाना होने से पहले कहा कि रियो ओलंपिक से पहले चैंपियंस ट्रॉफी और 6 देशों का टूर्नामेंट टीम के लिए आदर्श मानसिक परीक्षा साबित होगी।
भारतीय टीम के गोलकीपर और सरदार सिंह की गैरमौजूदगी में कप्तानी की जिम्मेदारी संभाल रहे श्रीजेश ने कहा कि हम यहां से चैंपियंस ट्रॉफी के लिए लंदन रवाना होंगे और फिर उसके बाद 6 देशों के टूर्नामेंट के लिए स्पेन जाएंगे। रियो ओलंपिक के लिए भी कार्यक्रम इसी प्रकार का रहेगा।
उन्होंने कहा कि करीब 1 महीने का यह दौरा हमारे लिए मानसिक परीक्षा भी साबित होगा, क्योंकि लंदन में हमें विश्व की शीर्ष 4 टीमों के खिलाफ तथा स्पेन में 5 टीमों के खिलाफ खेलना है जिनसे हमारा सामना रियो में भी होगा। यहां पर देखना होगा कि हम अपनी योजनाओं को किस प्रकार से लागू कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि लंदन ओलंपिक से पहले हम यूरोप में थे और फिर सीधे ओलंपिक में खेलने पहुंच गए थे लेकिन इस बार टीम के खिलाड़ियों ने कोच रोलेंट ओल्टमेंस से न्यूजीलैंड दौरे के बाद ही कुछ अलग करने की बात कर ली थी। लगातार मैचों से हमें थकान नहीं होगी और टूर्नामेंट से पहले तरोताजा होने के लिए समय मिल जाएगा। हम जरूरी चीजों पर गौर कर गलतियों को सुधार सकेंगे और पूरी तरह से तैयार भी हो सकेंगे।
श्रीजेश ने कहा कि हमें एक सप्ताह का समय मिलेगा और फिर हम अपनी जिंदगी के सबसे बड़े टूर्नामेंट के लिए करोड़ों लोगों की दुआओं के साथ निकलेंगे। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा और टीम के लिए मानसिक तौर पर भी सकारात्मक साबित होगा। टीम के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करना ही मेरी प्राथमिकता में है।
उन्होंने कहा कि किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम के खिलाफ खेलने में अतिरिक्त दबाव होता है। मेरे लिए बतौर कप्तान टीम के खिलाड़ियों में जोश बनाए रखना जरूरी है। टीम के सीनियर से लेकर जूनियर खिलाड़ियों की कोई न कोई जिम्मेदारी है और पूरे दौरे में प्रदर्शन की निरंतरता को बनाए रखना ही प्रमुख लक्ष्य है। एफआईएच चैंपियंस ट्रॉफी के पहले मुकाबले में 10 जून को भारत का सामना जर्मनी से होगा। (वार्ता)