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तालिबान ने अमेरिका को दी धमकी, 31 अगस्त तक वापस बुला ले अपनी सेना वरना...

हमें फॉलो करें तालिबान ने अमेरिका को दी धमकी, 31 अगस्त तक वापस बुला ले अपनी सेना वरना...
, सोमवार, 23 अगस्त 2021 (11:21 IST)
मुख्य बिंदु
 
  • जी-7 की बैठक में अफगानिस्तान के हालातों पर चर्चा
  • बाइडेन ने सेना बुलाने के फैसले को सही बताया
  • तालिबान ने सेना की वापसी पर दी चेतावनी
काबुल। अफगानिस्तान में कब्जा जमा चुके तालिबान ने सीधे सीधे अमेरिका को धमकी दे दी है। तालिबान ने कहा है कि अगर अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को नहीं बुलाया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन 31 अगस्त को अफगानिस्तान छोड़ने की बात कह चुके हैं। बाइडेन के अपनी बात से मुकरने का कोई मतलब नहीं है। तालिबान ने स्पष्ट कहा है कि 31 अगस्त से एक दिन भी आगे मियाद नहीं बढ़ सकती है। अगर 31 अगस्त से एक दिन आगे की भी मोहलत अमेरिका और ब्रिटेन मांगते हैं तो उसका जवाब होगा नहीं साथ ही इन्हें गंभीर परिणाम भी भुगतने होंगे। तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया था और इसके साथ ही वहां नागरिक सरकार का पतन हो गया था।
 
G-7 की बैठक में बनेगा तालिबान के खात्मे का प्लान : जी-7 देशों के नेता 24 अगस्त यानी गुरुवार को अफगानिस्तान के हालात पर वार्ता करेंगे। यह जानकारी रविवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने गुरुवार को दी। इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी इस बात की पुष्टि कर दी कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन वर्चुअल तरीके से होने वाली इस वार्ता में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान अफगानिस्तान से अमेरिकियों की निकासी तथा अफगानिस्तान के निवासियों तथा शरणार्थियों के लिए मानवीय सहायता पहुंचाने को लेकर प्रमुख रूप से चर्चा होगी। इससे पहले जॉनसन के कार्यालय ने कहा था कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन और संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर बातचीत की।
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बाइडन ने अपने फैसले को बताया सही : अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि अफगानिस्तान की राजधानी से अमेरिकियों और हजारों अन्य लोगों को हवाई मार्ग से लाने का 'कठिन एवं पीड़ादायी' काम तेजी से चल रहा है। साथ ही उन्होंने तनावग्रस्त देश से इस अभियान को 31 अगस्त की समय सीमा से आगे चलाने की संभावना को भी नहीं नकारा। बाइडन ने व्हाइट हाउस में युद्ध समाप्त करने के अपने फैसले का बचाव किया और जोर देकर कहा कि सभी अमेरिकियों को देश से बाहर निकालना सबसे अच्छी परिस्थितियों में मुश्किल होता। आलोचकों ने विलंब से निकासी अभियान शुरू करने को लेकर बाइडन की काफी आलोचना की है।
 
तारीख बढ़ाने को लेकर सैन्य चर्चा : बाइडन ने कहा कि काबुल से हजारों लोगों की वापसी का काम कठिन एवं पीड़ादायी होने वाला है। चाहे वह कभी भी शुरू होता। टेलीविजन पर दिखाई जा रहीं दर्दनाक एवं दिल दहला देने वाली तस्वीरों के बिना इतने सारे लोगों को निकालने का कोई तरीका नहीं था। बाइडन ने कहा कि हवाई मार्ग से लोगों को वापस लाने के काम को 31 अगस्त की समय सीमा से आगे बढ़ाने के संबंध में सैन्य चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि हमें इसे बढ़ाना नहीं पड़ेगा लेकिन फिर भी चर्चाएं जारी हैं।
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व्हाइट हाउस ने रविवार को एक बयान में कहा था कि सात सी-17 और एक सी-130 अमेरिकी सैन्य विमानों ने दोपहर तीन बजे (ईस्टर्न टाइम ज़ोन समयानुसार) तक 12 घंटे की अवधि में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से करीब 1700 यात्रियों को निकाला। इसके अलावा, 39 गठबंधन विमानों ने लगभग 3,400 यात्रियों के साथ उड़ान भरी। बाइडन ने बताया कि शनिवार को काबुल से 23 अमेरिकी सैन्य विमानों ने 3900 अमेरिकियों को लेकर उड़ान भरी।
 
इससे पहले, अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां पैदा हुए संकट के बीच बाइडन ने युद्धग्रस्त देश से अपने बलों की वापसी के कदम को सही ठहराते हुए कहा कि इतिहास में यह कदम 'तार्किक और उचित निर्णय' के रूप के दर्ज किया जाएगा। अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के फैसले के कारण बाइडन प्रशासन की आलोचना हो रही है, क्योंकि बलों के लौटने के कारण तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है, जिससे देश में अराजकता फैल गई है।
 
सरकार के फैसले की आलोचना : भारतीय मूल की अमेरिकी नेता निकी हेली ने अमेरिका सरकार की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका ने तालिबान के सामने 'पूरी तरह आत्मसमर्पण' कर दिया और अफगानिस्तान में अपने सहयोगियों को छोड़ दिया। हेली ने सीबीएस न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि वे तालिबान से वार्ता नहीं कर रहे। उन्होंने तालिबान के समक्ष पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने बगराम वायुसेना अड्डे को सौंप दिया, जो नाटो का बड़ा केंद्र था। उन्होंने 85 अरब डॉलर के उपकरण और हथियार भी सौंप दिए।'
 
उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिकी लोगों का समर्पण कर दिया और उन्होंने अमेरिकी लोगों की वापसी से पहले अमेरिकी बलों को वापस बुला लिया। उन्होंने विदेशों में तैनात मेरे पति जैसे लोगों को सुरक्षित रखने वाले अफगान साथियों को छोड़ दिया। कोई बातचीत नहीं हुई। यह पूरी तरह आत्मसमर्पण था और शर्मनाक नाकामी है।

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