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अरुणा शर्मा
दूरदर्शन की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत के सबसे बड़े सूचना, समाचार, संस्कार और मनोरंजन कार्यक्रमों के अलावा करोड़ों लोगों का विश्वास हासिल करने वाले इस निकाय की पहुंच गांव-गांव में है । शायद ही कोई मीडिया चैनल इसके मुकाबले खड़ा रह सके। फिर भी अभी चुनौतियों का अंबार है। उनके विश्लेषण के साथ समाधान और संभावनाओं की एक झलक।
दूरदर्शन का नाम सुनते ही अतीत के खट्टे-मीठे अनुभव याद आने लगते हैं। चित्रहार, हमलोग, तमस, रामायण और महाभारत जैसे कार्यक्रमों ने टेलीविजन को न सिर्फ करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया बल्कि देश में इसे एक प्रभावशाली माध्यम के रूप में भी स्थापित किया। सत्तर के दशक के मध्य में टेलीविजन का नाम दूरदर्शन रखा गया। टेलीविजन केंद्रों से प्रसारण और कार्यक्रम शुरू होने से पहले बजाई जाने वाली धुन से लोग भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे और दूरदर्शन से मिलने वाली तरह-तरह की जानकारी का हमारे व्यक्तित्व पर स्थायी और गहरा प्रभाव पड़ा था।
आज भी इस बात पर हैरानी हो सकती है कि एक गाँव में एक मंत्री को अपनी सभा शुरू करने के लिए सिर्फ इसलिए कई मिनट इंतजार करना पड़ा था कि ग्रामीण उस समय दूरदर्शन पर कृषि दर्शन देखने में व्यस्त थे। दूरदर्शन पर पिछले लोकसभा चुनावों के परिणाम पेशेवर तरीके से प्रसारित किए गए। इन नतीजों के बारे में ताजा जानकारी प्राप्त करने के लिए दर्शकों की वापसी हुई और लाखों नए-पुराने दर्शक दूरदर्शन से पुनः जुड़े।
हैदराबाद में हाल में आयोजित विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप की शानदार कवरेज के लिए न सिर्फ खेलप्रेमियों बल्कि इसमें भाग लेने वाले देशी-विदेशी खिलाड़ियों से भी दूरदर्शन को वाहवाही मिली। भारत की शान जैसे रियलिटी शो से दर्शकों को सुरीली संगीत सुनने का अवसर प्राप्त होता है। इसके अलावा दर्शकों को अन्य टेलीविजन चैनलों की तरह रियलिटी शो के दौरान कार्यक्रम पेश करने वाली हस्तियों के बीच बेकार की नोंक-झोक भी नहीं झेलनी पड़ती है। जलसा कार्यक्रम की सर्वाधिक रेंटिंग है।
भारत से जुड़े मुद्दों पर पेश किया जाने वाला आलोचनात्मक-विश्लेषणात्मक कार्यक्रम उड़ान के दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस आधार पर दावा किया जा सकता है कि दूरदर्शन में अब भी असीम क्षमता है।
मैंने फरवरी 2009 में दूरदर्शन के महानिदेशक का कार्यभार संभाला। दूरदर्शन के लिए यह एक चुनौतीभरा समय था। लेकिन मुझे अहसास हुआ कि चुनौतीभरा समय होने के साथ-साथ यह दूरदर्शन के लिए लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का भी महान अवसर है। मैंने दूरदर्शन के प्रत्येक चैनल का विश्लेषण करने के बाद इसमें सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों को अंतिम रूप दिया। इस प्रक्रिया के कुछ परिणाम आने शुरू हो गए हैं जिन्हें मैं लोगों के सामने रखना चाहती हूँ।
दूरदर्शन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह 90 प्रतिशत आबादी और भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है। लेकिन इस ताकत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह था कि केबल ऑपरेटर प्राइम बैंड में दूरदर्शन के चैनलों को शामिल ही नहीं करते थे, जबकि कानूनी प्रावधानों के तहत यह अनिवार्य है। इसलिए पहली चुनौती इस बाधा को दूर करना थी।
हम लोगों को उस समय बहुत खुशी हुई कि दूरदर्शक ने फोन कर बताया कि दूरदर्शन के चैनलों के सिगनलों में सुधार हुआ है और दूरदर्शन भी अब अन्य चैनलों जैसा ही अच्छा दिखता है। इसके बाद एक और समस्या सामने आई। एक डिश ऑपरेटर दूरदर्शन के चैनलों को सही फ्रिक्वेंसी पर नहीं रखता था। हम लोग यह बाधा दूर करने में भी कामयाब रहे। दूरदर्शन द्वारा उठाए कदमों के परिणाम सामने हैं।
दूसरा मुद्दा दूरदर्शन के कार्यक्रमों व गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना था। दूरदर्शन की एक ताकत यह भी है कि उसके पास प्रशिक्षित लोगों की फौज है, लेकिन अब तक इसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया है। एक-एक कर इन मुद्दों की समीक्षा की जा रही है और हम लोग इन समस्याओं को दूर करने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।
दूरदर्शन के पास डिजिटल स्टूडियो है और प्रोडक्शन टीमों को कार्यक्रमों की गुणवत्ता के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने का फैसला किया गया है। हम लोगों ने ऐसे निर्देशकों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की है जिनके कार्यक्रम मौजूदा समय में प्रसारित हो रहे हैं। निर्देशकों के साथ कार्यक्रमों में शामिल विषयों पर बातचीत की जाती है। पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए विभिन्न आवेदनों को निबटाने की प्रक्रिया को आंतरिक लोकल एरिया नेटवर्क (लेन) के तहत लाया गया है। दूरदर्शन के लिए ऐसा करना बहुत आवश्यक था।
मुझे भरोसा है कि जो लोग दूरदर्शन को पसंद करते हैं वे इस बात की प्रशंसा करेंगे कि दूरदर्शन पर अच्छी क्वालिटी के कार्यक्रम प्रसारित किए जाएँ। हम लोग भी यही प्रयास कर रहे हैं। यह भी जानते हैं कि इस समय कुछ स्वार्थी तत्वों के लिए परेशानी पैदा होगी, लेकिन हमारा लक्ष्य दर्शकों के सामने बेहतरीन कार्यक्रम पेश करना है और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हम लोगों में डीडी-इंडिया चैनल पर खास तौर से ध्यान केंद्रित किया है। समीक्षा के दौरान हमने इसकी खूबियों और खामियों पर विस्तार से चर्चा की। इस चैनल के कार्यक्रम 146 देशों में प्रसारित किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बारे में अफवाह फैलाई जा रही है कि इस चैनल को सिर्फ 146 ग्राहक देखते हैं। दूरदर्शन का अंतरराष्ट्रीय चैनल शुरू करने की रणनीति की राह में यह एक बड़ी खामी रही है। हम लोगों ने बाहर देशों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों की मदद से विदेशी ऑपरेटरों से संपर्क किया है और अब यह सुनिश्चित करेंगे कि चैनल दुनिया में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुँचे।
फिल्म और फिल्मी गानों पर आधारित कार्यक्रम हमेशा दर्शकों को आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया के तहत हमें सीधे निर्देशकों से फिल्म नहीं मिलती है। दूरदर्शन को सैटेलाइट चैनलों और एजेंटों के माध्यम से फिल्में मिलती हैं। हम लोग इस प्रक्रिया को बंद करना चाहते हैं और निर्देशकों से सीधे फिल्में खरीदना चाहते हैं।
* लेखिका दूरदर्शन की महानिदेशक हैं।