Television Articles %e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0 %e0%a4%95%e0%a4%be %e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be %e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8 107100600058_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

अमर का दूसरा प्रयास

Advertiesment
हमें फॉलो करें अमर उपाध्याय
PR
‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिहिर का किरदार निभाने के बाद अमर उपाध्याय बेहद लोकप्रिय हो गए थे। अमर ने इस लोकप्रियता का फायदा उठाने की सोची। उन्होंने अपने अच्छे-भले टीवी करियर को ठोकर मार दी। धारावाहिक को छोड़कर उन्होंने बालाजी टेलीफिल्म्स से भी पंगा ले लिया।

अमर ने सोचा कि दर्शक उन्हें पसंद करते हैं तो क्यों न वे अब बड़े परदे पर अपना कमाल दिखाए। अमर को बड़े बैनर की फिल्में तो नहीं मिली, लेकिन कुछ छोटे निर्माताओं ने उन्हें साइन कर लिया।

सेंसर, धुंध, दहशत जैसी फिल्मों में उन्हें काम मिल गया। अमर को लगा कि छोटे परदे पर उन्हें पसंद करने वाले लोग उनकी फिल्म देखने थिएटर में जरूर आएँगे। अर यह भूल गए कि छोटे परदे पर मुफ्त में मनोरंजन होता है और बड़े परदे के लिए पैसे खर्च करना पड़ते हैं।

अमर की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुँह गिरी। लोकप्रियता के रथ पर सवार अमर को इस तरह के परिणाम की आशा नहीं थी। अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिये उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में भी हाथ आजमाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

टीवी पर वापस जाना अमर को अपनी शान के खिलाफ लगा। बेचारे अमर न फिल्मों के रहें और न ही टीवी के। इतनी सारी असफलताओं के बावजूद अमर ने हिम्मत नहीं हारी है। उन्होंने ने एक बार फिर नए सिरे से अपना करियर शुरू करने की सोची है। सुनने में आया है कि अमर ने एक नया मैनेजर नियुक्त किया है जो अमर के लिए निर्माताओं से मिल रहा है।

अमर को उम्मीद है कि फिल्म निर्माता उनकी ओर एक बार फिर ध्यान देंगे। लेकिन वे शायद यह भूल रहे हैं कि बॉलीवुड के लोग बड़े निर्मम होते हैं। वे हमेशा चढ़ते सूरज को सलाम करते हैं। वैसे भी अमर उपाध्याय की कोई स्टार वैल्यू तो बची नहीं है, ऐसे में कौन अपने पैसे लगाकर उन्हें अपनी फिल्म में हीरो बनाना चाहेगा। वैसे अमर की इस बात की तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है और अभी भी मैदान में डटे हुए हैं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi