Publish Date: Wed, 10 Nov 2010 (14:59 IST)Updated Date: Wed, 01 Oct 2014 (19:03 IST)
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कहते हैं लक्ष्मी हर किसी के घर नहीं जाती। वह यह देखती है कि उसकी आँच को संभालने की ताकत किसमें है, कौन उसका सही कद्रदान है। कौन बनेगा करोड़पति का वह शो कोई नहीं भूलेगा जिसमें मेरठ के प्रशांत बतार करोड़पति होकर फिर सामान्य लखपति बन कर रह गए। प्रशांत इस सीजन के शो के पहले ऐसे प्रतियोगी थे जो एक करोड़ रुपया जीत गए थे। पर लालच बुरी बला।
खेलते-खेलते उन्हें यह मुगालता हो गया कि वे 5 करोड़ के भी हकदार हो सकते हैं। जब उत्तर पता ही नहीं तो क्या जरूरत थी अपनी हेकड़ी दिखाने की? सीधे करोड़ रुपया लेता और आ जाता अपनी जगह। पर नहीं कुछ लोग से शोहरत और सम्मान संभलते नहीं है। प्रशांत को उसके पिताजी के अलावा विशेषज्ञ ने भी सलाह दी थी कि यहाँ गेम को छोड़ देने में भलाई है। अमिताभ बच्चन ने तो सीधे-सीधे चेताया था, पर 5 करोड़ की राशि ने ऐसी फेरी मति कि ना घर के रहे ना घाट के।
वैसे कुछ लोगों को उसका बड़बोलापन भी अखर रहा था। मॉस मीडिया के कुछ कायदे होते हैं। आप व्यक्तिगत रूप से चाहे कैसी भी भाषा इस्तेमाल करते हों लेकिन जब देश की करोड़ों जनता से रूबरू हों तो शब्दों पर नियंत्रण आवश्यक है। यूँ भी देश की नामी शख्सियत आपके सामने हो तो कुछ सभ्यता अपने आप आ जाती है। पर प्रशांत को सुनकर कुछ दर्शकों को अजीब लग रहा था कि यह कैसी जुबान है इसकी?
बहरहाल, बात महज इतनी है कि शिखर पर पहुँचना और पहुँचते ही लुढ़क जाने का अनुभव बड़ा कसैला होता है, इसे इस वक्त प्रशांत से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। प्रशांत ने कहा था, उसके दोस्त उसे बेवकूफ समझते हैं, भलेमानस, खुद ने ही साबित भी कर दिया कि दोस्त कुछ गलत नहीं कहते।