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केंचुए पर वीना का पाँव...

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वीना मलिक
सबसे नाजुक जीव होता है केंचुआ। पाँव पड़ जाए तो पिचकड़ा निकल जाता है। मुर्गी अगर देख ले तो उसे नूडल बनाकर इधर-उधर दौड़ती है। जरा सा नमक पड़ जाए तो केंचुआ बिलबिला पड़ता है। हल्की गर्म जमीन पर भी झुलस जाता है। उसे भला लगता है नर्म-दलदली कीचड़, सीलन, गंदगी, अँधेरा...। भला केंचुए से नाजुक चीज और क्या हो सकती है? मगर एक चीज है। वो चीज है धर्म। धर्म एक शख्स के कारण भी खतरे में पड़ जाता है। शख्स अगर वीना मलिक की तरह हो, तो धर्म मानो आईसीयू में ही भर्ती हो जाता है।

धर्म आदमी के लिए गले पड़ा ढोल है। अगर बालिग होने के बाद वीना मलिक से पूछा जाता कि तुम कौनसा धर्म अपनाना चाहोगी, तो वो बंदी कहती कि मुआफ कीजिए मुझे एक की भी जरूरत नहीं है। ये अच्छी जबर्दस्ती है कि पैदा होते बच्चे पर धर्म लाद दो और बाद में उससे अपेक्षा रखो कि वो धर्म के अनुसार आचरण करेगा। कौन आदमी है जो हिन्दू, ईसाई या मुसलमान बनने के लिए कोई फार्म भरता है, अप्लीकेशन देता है? कोई नहीं। जो जिस घर में पैदा हो जाए वो वहीं का। हर नया बच्चा धर्मों के लिए लूट का माल है...। यदि तमाम लोगों से बालिग होने के बाद पूछा जाए कि वो कौनसा धर्म अपनाना चाहते हैं, तो ज्यादातर यही कहेंगे कि रहने दीजिए साहब। इसमें फायदा कम है और झंझट ज्यादा। ये खाओ, वो मत खाओ, ये पियो वो मत पियो, इतनी बजे के बाद मत खाओ भले भूखे सोना पड़े, रोजे रखो, उपवास रखो, व्रत रखो, ऐसा करो, ऐसा मत करो। इससे तो हम बिना धर्म के ही बेहतर। धर्म तो खामोख्वाह की मुसीबत है। वो क्या कहावत है- तू कौन मैं खामोख्वाह...।

पाकिस्तान के मुल्ला परेशान हैं कि वीना मलिक के कारण मजहब खतरे में है। वीना मलिक जिस तरह जीती हैं उससे तो हर धर्म की साँस उखड़ सकती है। और अमूमन लड़कियाँ आजकल वीना मलिक की ही तरह जी रही हैं। क्या तो हिन्दुस्तान और क्या तो पाकिस्तान...। क्या लड़कियों के बॉयफ्रेंड आजकल जल्दी-जल्दी नहीं बदलते? क्या लड़कियाँ आजकल तन-मन के किसी बंधन को मानती हैं। कंडोम और पिल्स के तमाम विज्ञापनों में क्या धर्म-पारायण नैतिक महिलाएँ दिखाते हैं? निरोध का सरकारी विज्ञापन यदि छोड़ दिया जाए तो गर्भनिरोधकों के तमाम विज्ञापनों में लड़का-लड़की शादीशुदा नहीं हैं। इसका मतलब क्या यह है कि धर्म रसातल में चला गया है? यदि दैहिक आजादी के कारण धर्म रसातल में जाता होता तो कब का चला गया होता। और सच पूछा जाए तो धर्मों को रसातल में क्यों नहीं चले जाना चाहिए? धर्म ने पाकिस्तान का क्या हाल किया? धर्म ने हमारा क्या हाल किया था और क्या कर सकता है? धर्म ने इंसान को दिया कुछ नहीं है और लेना लगातार जारी है। पुरानी कविता की दो लाइनें हैं- तुम कौन सा पाठ पढ़े हो लला/मन लेत हो देत छँटाक नहीं...। तो जनाब हुआ-हवाया कुछ नहीं है। ये समझिए कि वीना मलिक का पाँव एक केंचुए पर पड़ गया है।

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