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छिलकों की सब्ज़ी...

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मनोरंजन उद्योग
- अनह

फर्ज़ कीजिए कि कर्फ्यू लग गया है और फ्रिज में सब्ज़ियाँ बहुत कम हैं। पहले यह होगा कि सब्ज़ियाँ एहतियात से पकाई जाएँगी। फिर मौका आएगा छिलके इस्तेमाल करने का। अभी टीवी और फिल्म के लिए काम करने वाला मज़दूर तबका हड़ताल पर है।

नए एपिसोड का स्टॉक खत्म हो गया है और अब छिलके तलाशे जा रहे हैं। छिलके यानी किसी भी एपिसोड के एडिट किए हुए हिस्से। रिएलिटी शो में ये हिस्से बहुत काम आ सकते हैं। वॉइस आफ इंडिया के इन्हीं एडिटेड हिस्सों को तरतीब से लगाने का काम जारी है, ताकि इन्हें ही पेश किया जा सके। यानी कि सब्जी के छिलकों को छील-काटकर नई डिश बनाने की तैयारी की जा रही है।

वैसे यही मौका है, जब सीरियल वाले अपने दर्शकों से सीधा संवाद कर सकते हैं। इस समय दर्शकों को बताया जा सकता है कि देखिए शूटिंग ऐसे होती है, सेट का माहौल ऐसा होता है, एक सीन को शूट करने में इतना वक्त , इतनी मेहनत लगती है।

आम लोगों में मनोरंजन उद्योग के बारे में जानने की भूख को कभी समझा नहीं गया। ऐसी फिल्में हिट हुई हैं, जिनमें इस प्रक्रिया को समझाने की थोड़ी बहुत कोशिश की गई या इत्तेफाक से थोड़ा बहुत अंदर का हाल बाहर आ गया। पुरानी फिल्म गुड्डी को याद कीजिए।

इस मौके पर रियलिटी शो वाले सबसे ज़्यादा खुश हैं। उनके पास ऐसी चीज़ों का ढेर लगा है, जिन्हें अभी तक नहीं दिखाया गया। सबसे ज़्यादा गूदा लगे छिलके उन्हीं के पास हैं।

जिस तरह फिल्म देशद्रोह के रिलीज़ के समय अचानक प्रांतवाद का ज़हरीला तूफान उठ खड़ा हुआ, उसी तरह बिग बॉस की टीआरपी गिरने की आशंका के समय अचानक हड़ताल हो गई। जब सब जगह पुराना माल चल रहा है और कलर टीवी पर बिग बॉस नए पंगे लेकर हाज़िर है। कुछ विवाद इत्तेफाक से कुछ लोगों के लिए फायदे का सौदा बन जाते हैं।

(नईदुनिया)


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