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नहीं के जैसे न्यूज चैनल

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न्यूज चैनल
यकीन जानिए बहुत दिनों से समाचार नहीं देखे। पहले तो मुझे शक हुआ कि केबल वाले ने सारे न्यूज चैनल गायब कर दिए हैं और मनोरंजन वाले चैनल बार-बार दोहरा रहा है। ऐसा शक होने का कारण है, बहुत ही ठोस कारण है।

इंडियन आइडल सोनी पर आता है। फिर सोनी पर ही उसे रिपीट किया जाता है। अगर किसी चैनल पर इंडियन आइडल दिखाया जा रहा हो, तो उसे आप सोनी समझेंगे या नहीं? कॉमेडी सर्कस सोनी पर आता है, सो कॉमेडी शो जब कहीं दोहराया जाएगा, तो आप समझेंगे कि यह सोनी टीवी ही है।

कॉमेडी के कुछ कार्यक्रम स्टार वन पर आते हैं, वो जब दोहराए जाते हैं तो लगता है कि यह चैनल वही है। खेल के दृश्य दोहराए जा रहे हों, तो आप समझेंगे कि स्पोर्ट्स चैनल है। नीचे चल रहे स्क्रोल्स पर कौन ध्यान देता है? तो यह शक होना वाजिब था कि केबल वाले ने सारे चैनल गायब कर दिए हैं और हर जगह केवल या तो इंडियन आइडल वाला चैनल है या कॉमेडी है, या खेल है।

केबल वाले को फोन किया तो उसने कहा सुबह बात करते हैं। उसे लगा कोई मस्त उपभोक्ता रात को तंग कर रहा है। पत्नी से शिकायत की तो कहने लगी कि मैं चैनल ध्यान से नहीं देखती। सारे न्यूज चैनल अपनी जगह बरकरार हैं। केबल वाले ने एक भी नहीं हटाया।

ध्यान से देखा तो न्यूज चैनल का मोनो तो दिखा, पर न्यूज गायब थी। न्यूज की जगह एक मसखरा चुटकुला सुना रहा था और नवजोतसिंह सिद्धू हँस रहे थे। दूसरा न्यूज चैनल लगाया तो वहाँ दूसरा मसखरा दूसरा जोक सुना रहा था और अर्चना पूरनसिंह हँसने का अभिनय कर रही थीं।

तीसरे न्यूज चैनल पर न्यूज की जगह यह बताया जा रहा था कि कल रात इंडियन आइडल में अनु मलिक ने कौनसा शेर मारा। एक और न्यूज चैनल को पहचाना मगर वहाँ भी न्यूज नहीं शनि के प्रकोप से बचाव के तरीके बताए जा रहे थे।

ये अजब मुसीबत है...। सबसे पहले तो न्यूज चैनल गायब । फिर वो मिले तो उन पर से न्यूज गायब। उधार का मनोरंजन और नकद में अंधविश्वास...। हिम्मत करके फिर रिमोट उठाया और चैनलों को उलटा तो एक जगह खबर मिली...। मगर वो खबर तो एक मर्डर की थी, जो दिल्ली में हुआ था। ये न्यूज चैनल वाले क्या समझते हैं? क्या पूरा देश दिल्ली और मुंबई नाम के दो शहरों में बसता है? दिल्ली के लिए कोई मर्डर महत्वपूर्ण हो सकता है, मगर पूरे देश पर आप कैसे उस हत्या की खबर को थोप सकते हैं?

अखबारों के अलग-अलग एडिशन होते हैं। केंद्रीय महत्व की खबर पहले पेज पर होती है। मगर ये न्यूज चैनल वाले मुंबई के महत्व की खबर देश भर को दिखाते हैं। अव्वल तो खबर नहीं, और खबर है तो ऐसी फुस्सी कि देश को मतलब ही नहीं। जब तक कोई बहुत बड़ा ऐसा मामला न हो, जिसके बारे में जनता पल-पल की खबर चाहती हो, इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल बकवास और महाबोरिंग हैं।

चौबीस घंटे के न्यूज चैनल सिर्फ खबर दोहरा कर तो चल ही नहीं सकते। इतनी खबरें भी कहाँ होती हैं। इनके पास दूरदर्शन जितना बड़ा नेटवर्क भी नहीं है कि ये देशभर से एक्सक्लूसिव खबरें लाकर दिखा सकें। इसलिए ये सब मनोरंजन चैनलों पर आने वाले कार्यक्रमों को दोहराते रहते हैं।

झलक दिखाने के चक्कर में ये पूरा कार्यक्रम ही दिखा डालते हैं। कई बार तो मूल कार्यक्रम में अधिक विज्ञापन होते हैं और न्यूज चैनल पर आप बिना ब्रेक के कार्यक्रम देख लेते हैं। न्यूज चैनल इस समय नहीं के जैसे हैं। खबर जानने के लिए लोग अखबार का ही सहारा ले रहे हैं।

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