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पंख होते तो उड़ जाती

सहारा वन पर नया धारावाहिक

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जब व्यक्ति कुछ कर दिखाने की ठान ले तो रास्ते खुद ब खुद बन जाते हैं और अंतत: उसे मंजिल मिल ही जाती है। 'सहारा वन' पर आगामी 17 नवंबर से प्रारंभ होने वाला धारावाहिक 'पंख होते तो उड़ जाती' एक ऐसी असाधारण प्रतिभा से युक्त लड़की किरण की कहानी है, जो मुसीबतों की आग में तपकर भी किस्मत की अग्नि परीक्षा में सफल होती है तथा अपने परिवार के सपनों में रंग भरती है। यह धारावाहिक प्रत्येक सोमवार से शुक्रवार रात आठ बजे देखा जा सकता है।

कहते हैं भाग्य बहुत ही कम लोगों का साथ देता है। कुछ लोगों को बिन माँगे ही सब कुछ मिल जाता है और कुछ लोगों के मुँह में आया निवाला भी छिन जाता है। यह सब भाग्य का खेल है। इस धारावाहिक का मुख्य किरदार किरण एक ऐसी लड़की है जो बार-बार असफलता हाथ लगने पर भी संघर्ष व प्रयास करना नहीं छोड़ती है। अंतत: किस्मत भी इस हिम्मतवाली लड़की के आगे अपने घुटने टेककर उसके पक्ष में अपना फैसला देती है।

टूटते पिता का सहारा है किरण
'पंख होते तो उड़ जाती' एक आम मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है, जो हमारी ही तरह बड़े-बड़े सपने देखता है। परिवार के मुखिया इंदर सक्सेना अपने पार्टनर ओंकार पुरी के साथ एक बिजनेस शुरू करते हैं। इंदर का सपना अपने बच्चों को खूब पढ़ा-लिखाकर एक संस्कारी व मेहनतकश इंसान बनाने का होता है।

इंदर के दो बेटे अतुल और किंशुक तथा दो बेटियाँ किरण और कोयल हैं। बड़ा बेटा होने के कारण इंदर को सबसे ज्यादा उम्मीदें अतुल से होती है। अतुल के माध्यम से अपने सपनों में रंग भरने के लिए इंदर उसे पढ़ाई के लिए विदेश भेजता है। वह चाहता है कि उसका बेटा विदेश से लौटकर उसके बिजनेस को और अधिक ऊँचाइयों पर ले जाएगा। इसके लिए इंदर कंपनी के अपने शेयर गिरवी रखकर अतुल की पढ़ाई का खर्च उठाता है।

विदेश से लौटते ही अतुल अपने रंग बदलना शुरू कर देता है। अतुल का पहला झटका अपने पिता की मर्जी के बगैर शादी करना तथा दूसरा झटका पिता के बिजनेस में रुचि नहीं लेना होता है। अपने परिवार को हिम्मत बँधाते हुए इंदर इन आघातों को अपनी किस्मत का लिखा समझकर स्वीकार कर लेता है लेकिन इंदर तब पूरी तरह से टूट जाता है, जब उसे पता चलता है कि उसका दूसरा बेटा किंशुक कैंसर से ग्रसित है।

इस सदमे से वह पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में किरण आर्थिक तंगी व मानसिक आघात को झेल रहे अपने परिवार के लिए आशा की एक किरण बनकर सामने आती है। किरण न सिर्फ अपने पिता का बिजनेस संभालती है बल्कि अपने भाई किंशुक का सहारा भी बनती है।

बेटी भी बेटे से कम नहीं
आज के दौर में बेटी भी किसी बेटे से कम नहीं होती है। इस धारावाहिक की मुख्य पात्र किरण हर मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी बयाँ कर रही है, जो आज भी संघर्षमय जीवन जीने को विवश है, जिनके लिए सपने देखना आसान है पर उन्हें पूरा करना बेहद ही मुश्किल। ऐसे ही बनते-बिखरते संबंधों में एक छोटी सी आशा बनकर उभरी किरण दर्शकों के दिलों को कितना जीत पाएगी, यह तो वक्त ही बताएगा।

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