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पराई बारात में गिरह की पान-सुपारी

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परफेक्ट ब्राइड
हम भारतीयों के जीवन की सबसे बड़ी घटना क्या है? जाहिर है शादी। लड़कियों का तो लालन-पालन ही इस महत्वपूर्ण घटना के लिए किया जाता है। आज भी करोड़ों लड़कियों के लिए सर्वश्रेष्ठ करियर डॉक्टर, मैनेजर, इंजीनियर या व्यवसायी बनना नहीं बल्कि किसी गाँठ के पूरे की दुल्हन बनना है।

शादी में हम लोग कर्ज लेकर भी वही सारा उबाऊ तमाशा करते हैं जो दूसरे करते हैं और समझते हैं कि हमारे घर की शादी बड़ी मौलिक रही। वही पनीर, वही पूरियाँ, वही मिठाइयाँ, वही स्टेज और वही संगीत...। हमारे यहाँ लड़का-लड़की की शादी संपन्न हो जाने को बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त होना समझा जाता है। सो शादी हमारे लिए सबसे बड़ा तमाशा है। हम सब अब्दुल्ला हैं जो बेगानी शादियों में दीवाने होते रहते हैं।

हमारी इसी दीवानगी का फायदा उठाया था राखी का कथित स्वयंवर करने वालों ने। जब राखी का शो सफल हुआ, तभी इस बात पर मुहर लग गई थी कि दूसरे चैनल वाले भी इस तरह का कोई शिगूफा लेकर आएँगे और थोड़े से हेर-फेर के साथ स्टार चैनल मौजूद है कार्यक्रम "परफेक्ट ब्राइड" लेकर।

इसमें दस लड़कियाँ हैं और पाँच लड़के। ऐसा शायद इसलिए कि लड़कियों में लड़कों को लेकर प्रतिस्पर्धा रहे। लड़कों के साथ उनकी अम्माएँ भी हैं, जिन्हें इंप्रेस करना लड़कियों का कर्तव्य रहेगा। ये सारे तमाशे चलेंगे और इस तमाशे को चलाएँगे मलाइका अरोरा खान, अमृता राव, शेखर सुमन।

जिस तरह मुंबई में मसाला फिल्में बनती हैं, उसी तरह अब मसाला धारावाहिक भी बनने लगे हैं। सो इसे मसाला धारावाहिक ही जानिए। इसमें बिग बॉस की तरह एक घर भी है (घर का सेट)। एक तरफ लड़कियों के सोने-रहने को बिस्तर लगाए गए हैं। संभावित सासुएँ भी लड़कियों के साथ हैं। दूसरी तरफ लड़कों के बिस्तर और रहने-खाने का प्रबंध है। "बिग बॉस" की तरह जगह-जगह कैमरे लगे हुए हैं।

लड़कियाँ लड़कों के दड़बों में नहीं जा सकतीं और लड़के लड़कियों के मुर्गीखाने में नहीं आ सकते। हाँ अम्माओं को छूट है कि वे चाहे जहाँ विचरें (चरें)। दर्शकों को करना यह है कि सारी चुहलबाज़ियाँ देखना है। फिर जिस लड़की से आपको सहानुभूति हो जाए, जिसकी चुलबुली अदाएँ पसंद आ जाएँ, उसे वोट करना है। तेरह हफ्ते तक आपको ये धतकरम करना है। "परफेक्ट ब्राइड" यानी सबसे सटीक दुल्हन चुनने वाले विज्ञापन से कमाएँगे और आपके वोटों से भी, क्योंकि एसएमएस के जरिए किया गया हर वोट शायद छः रुपए का होगा।

पुरानी कहावत है कि बुद्धू बेटा बरात में जाए, पान-सुपारी गिरह की खाए। ये तमाशा हफ्ते भर चलेगा, बिना छु्‌टटी के। रोजाना आधे घंटे और छुट्टी वाले दिनों में ज्यादा समय तक। इसके अन्य पहलुओं पर अपन बाद में और बात करेंगे।

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