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फूस की अग्निपरीक्षा

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लॉयल्टी टेस्ट
मनोरंजन की भूख जैसी कोई भूख और भी है क्या? कुछ दिन में हर चीज बासी और पुरानी पड़ जाती है, बेस्वाद हो जाती है। फिर कुछ नया चाहिए...। कभी हम टीवी पर "चित्रहार" देखकर निहाल हो जाया करते थे। अब हालत यह है कि "बिग बॉस" चाहिए और उसमें भी पंगे चाहिए...। मध्यमवर्गीय जिंदगी की सबसे बड़ी समस्या इन दिनों बोरियत है और सबसे बड़ा दोस्त टीवी है। फिल्में बनाने वालों को इतना तनाव नहीं रहता जितना चैनल वालों पर रहता है।

फिल्म बनाने वाले अगर फिल्म न भी बनाएँ तो चलेगा। वे विराम ले सकते हैं। मगर चैनलों पर तो चौबीस घंटे कुछ न कुछ चाहिए। इसी मनोरंजन की भूख को टीवी विकृत चीजें भी परोस रहा है और हम सब गपागप किए जा रहे हैं।

ताजा मिसाल है एक चैनल पर आने वाला रियलिटी शो "लॉयल्टी टेस्ट" यानी वफादारी का परीक्षण। इसमें करना यह होता है कि कोई लड़का या लड़की चैनल वालों से कहते हैं कि मुझे अपने बॉयफ्रेंड/ गर्ल फ्रेंड/ प्रेमी/ प्रेमिका पर शक है और उसका वफादारी परीक्षण कराना है। इसके बाद चैनल वाले अपनी कैमरा टीम लगा देते हैं।

यदि परीक्षा लड़की की हो रही है, तो उसे कोई स्मार्ट और अमीर-सा बंदा लाइन मारता है। पटाता है। ये बंदा चैनल वालों का है और नवोदित आर्टिस्ट ही है। ये लड़की को कहीं ले जाता है। उसके नजदीक जाता है। फिर अंत में उसे एक ऐसे एकांत में ले जाता है, जहाँ कोई आता-जाता नहीं...। मगर उस एकांत में टीवी कैमरे लगे हैं।

फिर प्रेमी को उसी जगह पर औचक ले जाया जाता है, प्रेमिका बेवफाई करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार हो जाती है। ठीक ऐसा ही लड़के के साथ होता है। उसे चैनल वालों की ही तरफ से कोई लड़की पटाती है। बाद में उसकी भी ऐसी ही छीछालेदार की जाती है। आम लड़के-लड़कियों को चैनल द्वारा सिखाए-पढ़ाए स्मार्ट, खूबसूरत, फर्राटेदार अँगरेजी बोलने वाले न्यूकमर पटाते हैं।

अब युवा लड़की या लड़के को कोई भी अच्छा ऑप्शन मिले तो वो डिगेगा ही। हमारे यहाँ तो कथाएँ मिलती हैं, जिनमें कई बार देवी-देवताओं का जिक्र भी आ जाता है। तप भंग करने के लिए किए जाने वाले प्रयत्नों के तो काफी किस्से मिल जाते हैं। सवाल केवल यह है कि चैनल को इस तरह का परीक्षण करने की इजाजत किसने दे दी?

जानने की बात यह है कि किसी भी आदमी का फोटो उसकी इजाजत के बगैर खींचना जुर्म भी है और अनैतिकता भी। "स्टिंग आपरेशन" यदि समाज हित में नहीं किया जा रहा, तो बहुत ही गलत है। व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए किए गए इस तरह के स्टिंग ऑपरेशन को टीवी पर दिखाया जाना तो और भी ज्यादा गलत है।

यदि किसी को अपने साथी पर शक है, तो उसे छोड़ सकता है। उसकी निजता के फोटो खींचने और वीडियो बनाने का आदेश नहीं दे सकता। जिस व्यक्ति का स्टिंग ऑपरेशन हो जाता है, उसके दोस्तों में, उसकी जान-पहचान के दायरे में उसकी क्या हालत होती होगी? कई बार ये रियलिटी शो वाले मेहरबानी करके (और कानून से बचने के लिए) लड़की का चेहरा छुपा देते हैं। चेहरा छुपा देने से सारी दुनिया के सामने उसकी पहचान भले ही छुप जाए, जान-पहचान के दायरे में बात नहीं छुपती।

मनोरंजन के लिए हम हर तरह की हिंसा देख सकते हैं। हमें खयाल भी नहीं आता कि ये हिंसा है, एक किस्म का बलात्कार है। हम अतीत के उन सभी मनोरंजनों को गलत कहते हैं जिनमें हिंसा होती थी। तो ये क्या है?

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