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बिग बॉस : दूषित मनोरंजन से बिगड़ती रात...

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बिग बॉस
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रात का अंतिम विचार शुभ होना चाहिए, इसीलिए बहुत से धार्मिक लोग सोते समय प्रार्थना करते हैं, ताकि वे शुभ भावों से भर सकें। सनातनी लोग भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को शयन कराकर ही खुद सोते हैं। कुछ लोग वजू बनाकर दो रकात नमाज पढ़ते हैं और फिर बिस्तर में जाते हैं।

कुछ लोग ध्यान में बैठ जाते हैं और ध्यान से नींद में सरक जाते हैं। ऐसे लोगों की पूरी रात बहुत हल्की गुजरती है। बुरे सपने भी नहीं आते। मगर ज्यादातर लोग इसकी परवाह नहीं करते कि नींद में किस तरह जाना चाहिए। रात का अंतिम विचार पूरी रात पर हावी होता है।

अगर झगड़े-टंटे या कलह के बाद नींद आई है, तो पूरी रात ऐसे ही सपने आएँगे। रात बहुत भारी गुजरेगी। सवाल यह है कि जो लोग "बिग बॉस" जैसा शो देखकर सो रहे हैं, उन्हें नींद कैसी आती होगी, सपने कैसे आते होंगे।

"बिग बॉस" में इन दिनो जबर्दस्त कलह चल रही है। एक से बढ़कर एक ऐसे नमूनों को भेजा गया है, जो बेबात झगड़ा सिरज सकें। लड़कियाँ सायास झगड़ा करती हैं और झगड़ने से पहले खूब मेकअप भी करती हैं। उन्हें मानो पता रहता है कि ये झगड़ा टीवी पर दिखाया जाएगा।

झगड़ते-झगड़ते भी अगर किसी को लगे कि उसका मेकअप बिगड़ गया है तो वो "टाइम प्लीज" करके अंदर जाती है, मेकअप थोपती है और फिर आकर गाली-गलौज करती है। अगर ये जान-बूझकर किया जा रहा है तो झगड़ने वालियों और वालों के लिए अच्छा है कि उनका कचरा बाहर आ रहा है। जब वे बिग बॉस के घर से जाएँगे तो हल्के होकर जाएँगे। मगर उनका कचरा करोड़ों गुना होकर लोगों के घरों में जा रहा है, यह बहुत खतरनाक है।

बच्चों पर बुरा असर न पड़े यह खयाल करके इस शो को प्राइम टाइम से रात साढ़े दस पर खिसकाया गया। बच्चे तो बच गए मगर बड़ों पर मुसीबत आ गई। बोरियत ऐसी चीज़ है कि आदमी "बिग बॉस" से बच नहीं सकता।

होना तो यह चाहिए कि रात दस के बाद ऐसा कोई शो नहीं आए जो लोगों में नकारात्मकता पैदा करे। न भूत-प्रेत, न अपराध और हिंसा और न ही गाली और झगड़ों से भरा शो। लोग आराम से सोएँ और सारी रात अच्छी तरह गुज़रे। बिग बॉस जैसा शो अगर कोई सोते समय लगातार देख रहा है, तो उसकी जिंदगी बिग बॉस का घर बन सकती है। अपने साथ वो आदमी दूसरों को भी झगड़े और कलह के दुष्चक्र में फँसा सकता है।

अगर आप खुश हों, तो खुशियाँ बाँटते हैं और दुखी हों तो दुःख। लोगों को कम से कम सोते समय इस तरह के शो से परहेज करना चाहिए। अगर कुछ जानने की बहुत इच्छा हो रही हो, तो दोपहर में इसका रिपीट टेलीकास्ट भी आता है। मगर इस तरह के कलह को जानकर और देखकर करिएगा क्या?

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