बचपन ही में पिता के गुजर जाने पर माँ के साथ रोज खेत पर दिनभर की मजदूरी और हाथ पड़ते थे सिर्फ 10 रुपए। खेत से लौट 10 साल की वह बच्ची माँ के साथ घास के पुआल बेचने बाजार जाती, लेकिन इन हालात में भी उसने तालीम से मुँह नहीं मोड़ा। गाने का शौक इस कदर रहा कि लताजी, आशाजी के गीत वह बड़े जतन से सुनती-गाती। गाँव, कस्बे के ब्याह-शादी में उसे गाने का बुलावा मिलने लगा जिसके चलते एक कार्यक्रम के 100-200 रुपए मिल जाते थे। इसी से पढ़ाई जारी रही।
12वीं के बाद आगे की तालीम हासिल करने वह अमरावती आई, जहाँ गाने के अच्छे मौकों के साथ ही "शास्त्रीय संगीत सीखो" जैसी बेशकीमती सलाह भी मिलने लगी, लेकिन सीखने की फीस सुन कलेजा मुँह को आता। इसी दौरान उसकी मुलाकात अनंत माडे से हुई और उसकी दुनिया ही बदल गई...। यह आपबीती है जी टीवी के मराठी और हिन्दी सारेगामापा में महागायिका का खिताब जीतने वाली वैशाली भैसने माडे की जिन्होंने अपनी हैटट्रिक कायम करते हीरो होंडा "सारेगामापा का मेंगा चैलेंज 2009" भी जीत लिया।
सौ-दो सौ लोगों की आबादी वाले गाँव खारतळे कस्बा भातकुली जिला अमरावती खेड़े से मुंबई मायानगरी का सफर तय करने वाली वैशाली को संघर्ष के लिए प्रेरित करने वाले अनंत माडे खुद भी उम्दा गायक थे और वैशाली की गायकी से प्रभावित भी। यही वजह रही कि वे उनके हर कार्यक्रम में अपनी हाजिरी दर्ज कराने से नहीं चूकते थे...। और इस तरह शुरू हुआ दोस्ती का सिलसिला, प्यार और फिर शादी में तब्दील होते... अनंत कब उनके उस्ताद, उनके रहबर बने पता ही न चला।
इसी बीच एक कठिन परीक्षा भी इनकी राह में खड़ी थी। शादी से पहले नागपुर से लौटते (2000) सूमो-ट्रक एक्सीडेंट में तीन दोस्तों को गँवाने वाले अनंत जबर्दस्त चोट के चलते 22 दिन कोमा में रहे। गले की नसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आवाज साथ छोड़ चुकी थी, लेकिन वैशाली ने अनंत का साथ नहीं छोड़ा। आखिर 2005 में वे विवाह के बंधन में बँध गए और अनंत के लिए अपने को गायन पर केंद्रित करते यह जोड़ा मुंबई पहुँचा। वैशाली ने सारेगामापा के लिए अपना पहला ऑडिशन दिया जिसमें नाकामयाब रहीं। दोबारा तैयारी कर वे मैदान में उतरीं तो आज यहाँ तक की कामयाबी का सफर तय किया।
सुरेश वाडकर जैसे गुरु और आशा भोंसले, प्यारेलाल जैसे जानकारों की बेशकीमती टिप्स उसके गीतों में चार चाँद लगा गए। कामयाबी की सीढ़ियाँ तय करने वाली वैशाली की लगन को सलाम!"