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बेईमानी है तो सच परेशान करेगा ही

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सच का सामना
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टीवी कार्यक्रम "सच का सामना" से कुछ संसद सदस्य बेचैन हो उठे थे और उन्हें लगने लगा था कि यह कार्यक्रम हमारी संस्कृति को नुकसान पहुँचाएगा। हालाँकि कुछ लोगों का कहना है कि विरोध करने वाले सांसदों का विरोध प्रायोजित था। प्रतिद्वंद्वी चैनल ने सांसद हजरात को पैसे दिए थे। वजह यह कि इस कार्यक्रम के कारण उनकी टीआरपी कम हो गई थी। कुछ उत्साही अदालत चले गए थे। अदालत ने कह दिया कि सच का सामना करने से संस्कृति को कुछ नहीं होता और हम इस शो को बंद करने का हुक्म नहीं देने वाले।

इस बीच एक परिवर्तन यह हुआ कि चैनल ने सवालों का ढंग जरा-सा बदल दिया। पहले निजी सवाल सेक्स के आसपास पूछे जा रहे थे। इसी के कारण बहुत हल्ला मच रहा था। मगर यह कार्यक्रम अब बता रहा है कि भगवान की कृपा से हम भारतीय केवल सेक्स के ही मामले में गड़बड़ नहीं हैं, अन्य मामलों में भी महाभ्रष्ट हैं। सेक्सी सवालों पर ही छाप नहीं पड़ी, हमारे आर्थिक मामलात भी बेईमानी से भरे पड़े हैं।

ज्योतिष और कर्मकांड की जानकार एक महिला से पूछा गया कि क्या आप किन्हीं लोगों से आवश्यकता से अधिक पैसे वसूलती हैं? महिला ने कहा, हाँ और पोलीग्राफ मशीन ने कहा कि महिला सच बोल रही है। एक साहब पानी के जहाज पर काम करते थे। उनसे पूछा गया कि क्या आपने किसी मुसाफिर की कोई चीज चुराई? साहब ने जवाब दिया और इसी सवाल पर ढेर हो गए। संस्कृति का अब कोई नुकसान नहीं हो रहा। संस्कृति का नुकसान केवल सेक्स से होता है, भ्रष्ट बेईमान तौर-तरीकों से नहीं होता।

इसी टीवी पर, जिस पर "सच का सामना" आता है, बहुत-से टोटके भी बेचे जाते हैं। एकमुखी रुद्राक्ष, स्फटिक का चमत्कारी शिवलिंग, सिद्ध किया हुआ श्रीयंत्र और इसी तरह की बीसियों ठगी की चीजें। आज तक किसी सांसद ने नहीं कहा कि इस सब के जरिए जनता को ठगा जा रहा है और उसे अंधविश्वासी बनाया जा रहा है। गीता में कृष्ण ने अर्जुन को कर्म का संदेश दिया है और ये सारे टोटके हमारी जनता को भाग्यवादी और अंधविश्वासी बना रहे हैं।

सेक्स पर आधारित किसी भी कार्यक्रम अथवा किसी भी अश्लील फिल्म की अपेक्षा ऐसे अंधविश्वास और ठगी के विज्ञापन हमारी संस्कृति के ज्यादा खिलाफ हैं। खजुराहो में काम कला को प्रदर्शित करतीं अद्भुत सुंदर मूर्तियाँ बनाने वाली हमारी संस्कृति क्या कुछ सवालों से ढह सकती है? वात्स्यायन को हमने महाऋषि कहा है। फिर भी टारगेट केवल सेक्स को किया जाता है। इस तरह के विज्ञापनों के खिलाफ किसी भी सांसद ने आवाज नहीं उठाई। यहाँ तक कि कम्युनिस्ट सांसदों ने भी नहीं।

छोटी-छोटी-सी बात पर सेलिब्रिटीज के खिलाफ मुकदमा ठोक देने वाले उत्साही समाज सुधारक भी अंधविश्वास और ठगी के खिलाफ मौन हैं। जहाँ तक "सच का सामना" के बारे में सवाल है, इस कार्यक्रम में सेक्स संबंधित सवाल न पूछे जाएँ, तब भी ये मारक है, क्योंकि हम हर एंगल से बेईमान हैं। कोई-सा भी सच हमें शर्मिंदा और परेशान कर सकता है।

(नईदुनिया)


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