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सभी टीवी शो का 'बिग बॉस'

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बिग बॉस
तमाम टीवी कार्यक्रमों का वर्गीकरण किया जा सकता है कि अमुक कार्यक्रम बच्चों की पसंद का है, अमुक कार्यक्रम महिलाएँ देखती हैं, अमुक कार्यक्रम युवाओं के लिए है। मगर कुछ कार्यक्रम ऐसे भी होते हैं, जिन्हें किसी भी तरह वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। मिसाल के तौर पर केबीसी। छोटा-सा बच्चा भी पैसे को समझता है और पैसे के प्रति सबकी आसक्ति एक जैसी होती है। जुआ खेलने वालों के पीछे लोग खड़े होकर देखते हैं कि कौन जीत रहा है। माल खेलने वाले का दाँव पर लगता है, मगर साँसें दूसरों की ऊपर-नीचे होती हैं। केबीसी देखने का रोमांच भी जुआ देखने का रोमांच है। "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" भी इसी तरह का पारिवारिक शो है। इसमें कुछ भी वल्गर नहीं है, कुछ भी अश्लील या अशोभन नहीं है। विशुद्ध पारिवारिक हास्य...। भारतीय संस्कृति में रचा-बसा एक कार्यक्रम।

मगर जिस रियलिटी शो का सालभर इंतजार सबको रहता है वो है बिग बॉस। बिग बॉस का रोमांच अलग ही तरह का है। जैसे छुपकर किसी की बातें सुनी जाएँ या दरवाजे के छेद से आँख लगाकर लोगों के भेद देखे जाएँ। इस रियलिटी शो का मजा यह है कि कुछ समय में सारे मुखौटे उतरने लगते हैं। जब सारे मुखौटे उतरकर गिर जाते हैं तो असली आदमी बाहर आता है। बाहर की जिंदगी में बहुत उदार दिखने वाला आदमी अंदर एक कप चाय, एक ब्रेड के टुकड़े के लिए झगड़ सकता है। आदमी के भीतर का सारा छोटापन बाहर आ जाता है। हम सबमें लोगों की असलियत जानने कि उत्कट इच्छा होती है। इसीलिए लोगों की "कलंक कथाएँ" बहुत रस लेकर सुनी जाती हैं। हम अपने आपको भीतर से जानते हैं इसीलिए हम लगातार आत्मनिंदा के साथ जीते हैं। हमेशा हमें दूसरे अपने से श्रेष्ठ लगते हैं। सो जब दूसरे के दाग-धब्बे उजागर होते हैं, तो हमें बड़ा सुकून मिलता है कि हम ही खराब नहीं दूसरे भी खराब हैं। विपरीत हालात में जब दूसरा निखर कर सामने आता है, तो हमारा भी वही हिस्सा मजबूत होता है। हमें भी प्रेरणा मिलती है कि हम अपने चरित्र को मजबूत बना सकते हैं। यही "बिग बॉस" का मनोविज्ञान हो सकता है।

सुनते हैं कि इस बार माधुरी दीक्षित "बिग बॉस" में आ रही हैं। हालाँकि अभी इस खबर की तस्दीक नहीं हुई है, मगर ऐसा होता है, तो पहले ही दिन शो की टीआरपी चाँद-सितारों को छू सकती है। हालाँकि मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड का ढेर फिल्मों में है, मगर उनमें से एक भी माधुरी के समान सर्वांग और संपूर्ण सुंदर नहीं है। मानो ईश्वर ने उन्हें आदर्श नारी रूप बनाकर भेजा है। भीतर से वे बहुत ही साधारण भारतीय नारी हैं। उन्हें देखना बहुत-बहुत दिलचस्प हो सकता है। कॉमेडियन सुदेश लहरी के भी शो पर आने की खबर है। राजू श्रीवास्तव के बाद अगर कोई बढ़िया कॉमेडियन है, तो वे सुदेश लहरी ही हैं। राजू कभी फिल्मों में सफल नहीं हुए मगर सुदेश लहरी ने फिल्म "रेडी" में वो भी कर दिखाया है। घोषणावीर पूनम पांडे का भी नाम लिस्ट में है। कुल मिलाकर लोग बहुत बेसब्री से इस शो का इंतज़ार कर रहे हैं।

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