इन दिनों टीवी पर लगभग एक ही समय में बहुत सारे शो नज़र आते हैं। एक बिग बॉस है, दूसरी तरफ अक्षय का "मास्टरशेफ" है, तीसरी तरफ खास दिनों में कॉमेडी सर्कस होता है। मगर कौन बनेगा करोड़पति की टीआरपी इन सभी शोज़ से ऊँची है।
पहला कारण तो यही है कि आम आदमी की ताकत बहुत बड़ी होती है। सलमान के शो "दस का दम" में जब तक बहुत आम किस्म के लोग आते रहे, शो हिट रहा और जैसे ही वहाँ फिल्मी सितारे आए, लोग समझ गए कि अब बात नकली हो गई है।
फिल्मी सितारे आते हैं अपनी ताज़ातरीन फिल्म के प्रचार के लिए। फिल्म का निर्माता टीवी शो के निर्माता को धन देता है। जाहिर है इसके लिए कोई रसीद नहीं दी जाती। निर्माता या तो और पैसा कमाने के लालच में ये खिलवाड़ करता है या फिर घाटे के कारण इस तरह का परोक्ष प्रचार करता है। दोनों सूरतों में शो खराब हो जाता है। दर्शक का ध्यान शो के मूल कांसेप्ट से हटकर सेलिब्रेटी की तरफ चले जाता है। मगर जब शो खत्म होता है, तो उसे महसूस होता है कि उसे ठग लिया गया है।
खास लोग केबीसी में भी आए हैं, मगर पिछले सीज़न के आखिरी में ऐसा हुआ था। फिलहाल तो शो लाखों बाँटकर भी करोड़ों की कमाई में है। शो में शामिल होने के इच्छुक लोग जो एसएमएस कर रहे हैं, उससे भी करोड़ों की कमाई हो रही है और विज्ञापनों से भी।
आम आदमी जब हॉट सीट पर बैठता है, तो दर्शक उसमें अपनी ही छवि देखता है। जब सवाल पूछे जाते हैं तो करोड़ों घरों में हर आदमी उसका जवाब देता है और यह उत्सुकता बनी रहती है कि देखें मेरा जवाब सही है या नहीं।
अगर जवाब सही होता है तो आम दर्शक अपने घरवालों पर रौब डालता है कि देखा मेरा ज्ञान? जब जवाब गलत होता है तो किसी बहाने टीवी के सामने से उठ जाता है और सोचता है कि अच्छा हुआ मैं नहीं खेल रहा था।
बिग बॉस में इस बार ठंडे बासे लोग आए हैं। खली को रोज का पाँच लाख रुपया दिया जा रहा है, मगर शो उठकर ही नहीं दे रहा। ना ग्लैमर है, ना रविकिशन जैसा भदेसपन मनोज तिवारी दिखा पा रहे हैं। ना वहाँ कोई संभावना सेठ है और न राखी सावंत।
अक्षय कुमार का शो अच्छा है, पर उन लोगों के लिए, जो नए खाने आज़माते हैं। पिछली बार एक डिश में ब्रांडी भी डाली गई थी। पूरा देश तो दाल-रोटी-सब्जी-चावल खाता है। ब्रांडी-बियर का जिक्र भी जिन घरों में संस्कारहीनता है, वहाँ ब्रांडी डली डिश में किसकी दिलचस्पी होगी?
अमिताभ का परिहास बोध बहुत ही परिष्कृत है। बहुत ही संयत और शालीन...। लोगों को ये सब देखना अच्छा लगता है। एक महिला ने कहा कि पाँच करोड़ रुपए जीतकर वो अमिताभ के साथ न्यूजीलैंड जाना चाहेगी। कोई महिला ऐसी बात सिर्फ अमिताभ के लिए ही कह सकती है। सोचिए कि यदि सलमान होते तो इसका कैसा बतंगड़ बनाते।
अमिताभ बस हल्के से मुस्कुराए और समझने वालों ने सब समझ लिया। दर्शक एक बात और महसूस करते हैं कि गलत जवाब देने वालों को अमिताभ अपने ढंग से चेतावनियाँ देते हैं। लालच से यदि आदमी अंधा न हो रहा हो, तो खेल छोड़कर जा सकता है। आम आदमी के प्रति अमिताभ की ये सहानुभूति लोगों को अच्छी लगती है। लिहाजा इस बार केबीसी अन्य कार्यक्रमों पर भारी है। पहले भी ये अपने समय में चलने वाले सभी कार्यक्रमों पर भारी था। हॉट सीट पर फिल्मी सितारे अगर आ गए तो एक बार फिर ये शो दम तोड़ देगा। तब इसे अमिताभ भी नहीं बचा पाएँगे।