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जो मिले उसके संग होती है
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011
जो मिले उसके संग होती है, ज़िंदगानी अज़ीज़ बच्चों की, जैसे पानी का रंग होती है।
वो सदा कामयाब होते हैं
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011
आप अपना जवाब होते हैं, जिनमें होती है दूरअंदेशी, वो सदा कामयाब होते हैं - अज़ीज़ अंसारी
तुम्हारे साथ इक लम्हा बहुत है
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
मैं हर लम्हे में सदियाँ देखता हूँ, तुम्हारे साथ इक लम्हा बहुत है - बशीर बद्र
अगर उनका वादा वफ़ा हो गया
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
जिएँगे फिर ऐ दिल, किस उम्मीद पर, अगर उनका वादा वफ़ा हो गया।
इतनी हिम्मत इतनी ताक़त दी है
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
इतनी हिम्मत इतनी ताक़त दी है ख़ुदा ने 'अज़ीज़', दुनिया भर के भेद सभी पर खोले मेरी ग़ज़ल - अज़ीज़ अंस
सारी दुनिया में रोशनी कर जाऊँगा
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
सिर्फ़ ज़र्रा हूँ अगर देखिए मेरी जानिब, सारी दुनिया में मगर रोशनी कर जाऊँगा।
दाग़ दामन पे जो लग जाए
मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
आदमियत पे लगा दाग़ मिटेगा कैसे, दाग़ दामन पे जो लग जाए तो कोई धोले।
बेच डाली हर एक शै मैंने
मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
बेच डाली हर एक शै मैंने, अपना बेचा मगर ज़मीर नहीं - अज़ीज़ अंसारी
मैंने बनाया घर तो वह
शुक्रवार, 28 जनवरी 2011
मैंने बनाया घर तो वह, पानी में बह गया, मैंने लगाया बाग़ तो बारिश नहीं हुई - अज़ीज़ अंसारी
अब खुदा ही चाहे तो
मंगलवार, 25 जनवरी 2011
अब खुदा ही चाहे तो हमको बचा ले ऐ अज़ीज़, हर तरफ़ तूफान और काग़ज़ की हैं सब कश्तियाँ - अज़ीज़ अंसार
सिर्फ़ पूजा नहीं वतन तुझको
मंगलवार, 25 जनवरी 2011
सिर्फ़ पूजा नहीं वतन तुझको, तुझपे ये जान भी फ़िदा की है - अज़ीज़ अंसारी
वो झूठ बोल रहा था
बुधवार, 19 जनवरी 2011
वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं ऐतबार न करता तो और क्या करता - वसीम बरेलवी
दूर से देखो तो बस्ती में
बुधवार, 19 जनवरी 2011
दूर से देखो तो बस्ती में दिवाली, खुशहाली है, आग लगी हो शोर मचा हो, ये भी तो हो सकता है - अज़ीज़ अंसा
ग़र ये खेल ही दोबारा होगा
सोमवार, 10 जनवरी 2011
ऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना मेरा नाम, ग़र ये खेल ही दोबारा होगा।
जीत ही लूँगा किसी दिल को
सोमवार, 10 जनवरी 2011
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूँगा किसी दिल को, मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा।
जंग है तबाही का नाम
सोमवार, 10 जनवरी 2011
जंग है तबाही का नाम दूसरा यारों, तुम भी अपने घर जाओ, हम भी अपने घर जाएँ।
हम आज भी दुनिया में बस
शुक्रवार, 7 जनवरी 2011
दौलत पे न ललचाएँ, ताक़त से न घबराएँ, हम आज भी दुनिया में बस प्यार के मारे हैं - अज़ीज़ अंसारी
जग को जी लो
बुधवार, 5 जनवरी 2011
चलो उठो तुम खुद से निकलो बाहर, जग को जी लो, जग में आकर - नामालूम
कोई निशान लगाते चलो
मंगलवार, 4 जनवरी 2011
कोई निशान लगाते चलो दरख़्तों पर, के इस सफ़र में तुम्हें लौट कर भी आना है ----रऊफ़ ख़ैर
सारी दुनिया में रोशनी कर जाऊँगा
मंगलवार, 4 जनवरी 2011
सिर्फ ज़र्रा हूँ अगर देखिए मेरी जानिब, सारी दुनिया में मगर रोशनी कर जाऊँगा - अज़ीज़ अंसारी
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