Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

इन 13 साल की बच्चियों और 58 साल के बुजुर्ग ने ओलंपिक मेडल जीत कर बताया- 'उम्र सिर्फ एक संख्या है'

हमें फॉलो करें इन 13 साल की बच्चियों और 58 साल के बुजुर्ग ने ओलंपिक मेडल जीत कर बताया- 'उम्र सिर्फ एक संख्या है'
, सोमवार, 26 जुलाई 2021 (19:29 IST)
टोक्यो:उम्र सिर्फ एक संख्या है यह बात सिर्फ कहने के लिए लोग इस्तेमाल करते हैं लेकिन असल जिंदगी में उम्र पर बहुत ज्यादा ध्यान देते हैं। पढ़ाई करने की उम्र, शादी करने के लिए उम्र, एक तय उम्र तक व्यक्ति पेशवर सफलता पाना चाहता है। लेकिन टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने वालों की न्यूनतम उम्र 13 और अधिकतम उम्र 58 है। यह बताने के लिए काफी है कि जज्बे के सामने उम्र का कोई मायना नहीं है।

स्केटबोर्डिंग में हैरतंगेज करतब दिखाकर 13 साल की दो बच्चियों ने टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण और रजत पदक जीत लिये जबकि कांस्य पदक जीतने वाली भी 16 वर्ष की प्रतियोगी थी।
 
आम तौर पर जिस उम्र में बच्चे खिलौनो या वीडियो गेम से खेलते हैं, इन लड़कियों ने कड़ी मेहनत और लगन से तमाम चुनौतियों का सामना करके पुरूषों के इस खेल पर दबदबे को तोड़ा।
जापान की मोमिजी निशिया ने पहला ओलंपिक खेलते हुए पीला तमगा अपने नाम किया। अब तक पुरूषों के दबदबे वाले इस खेल में लड़कियों के इस यादगार प्रदर्शन ने खेल का भविष्य उज्जवल कर दिया है।
 
रजत पदक ब्राजील की रेसा लील को मिला जो 13 वर्ष की ही है। वहीं कांस्य पदक जापान की फुना नाकायामा को मिला।
 
बीस प्रतियोगियों के महिला वर्ग में ब्राजील की लेतिसिया बुफोनी भी थी जिनके पिता ने उन्हें खेल से रोकने के लिये उनका स्केटबोर्ड दो हिस्सों में तोड़ दिया था । कनाडा की एनी गुगलिया जब स्केटिंग सीख रही थी तो पहले दो साल कोई और लड़की उनके साथ नहीं थी ।
 
58 वर्ष की उम्र में ओलंपिक पदक जीतकर मिसाल बने अलरशीदी
 
उम्र के जिस पड़ाव पर लोग अक्सर ‘रिटायर्ड ’ जिदंगी की योजनायें बनाने में मसरूफ होते हैं, कुवैत के अब्दुल्ला अलरशीदी ने टोक्यो ओलंपिक निशानेबाजी में कांस्य पदक जीतकर दुनिया को दिखा दिया कि उनके लिये उम्र महज एक आंकड़ा है।
 
सात बार के ओलंपियन ने सोमवार को पुरूषों की स्कीट स्पर्धा में कांस्य पदक जीता । यही नहीं पदक जीतने के बाद उन्होंने 2024 में पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पर निशाना लगाने का भी वादा किया जब वह 60 पार हो चुके होंगे।
 
उन्होंने असाका निशानेबाजी रेंज पर ओलंपिक सूचना सेवा से कहा ,‘‘ मैं 58 बरस का हूं। सबसे बूढा निशानेबाज और यह कांस्य मेरे लिये सोने से कम नहीं। मैं इस पदक से बहुत खुश हूं लेकिन उम्मीद है कि अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतूंगा। पेरिस में।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ मैं बदकिस्मत हूं कि स्वर्ण नहीं जीत सका लेकिन कांस्य से भी खुश हूं। ईंशाअल्लाह अगले ओलंपिक में , पेरिस में 2024 में स्वर्ण पदक जीतूंगा। मैं उस समय 61 साल का हो जाऊंगा और स्कीट के साथ ट्रैप में भी उतरूंगा।’’
 
अलरशीदी ने पहली बार 1996 अटलांटा ओलंपिक में भाग लिया था। उन्होंने रियो ओलंपिक 2016 में भी कांस्य पदक जीता था लेकिन उस समय स्वतंत्र खिलाड़ी के तौर पर उतरे थे। कुवैत पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने प्रतिबंध लगा रखा था । उस समय अल रशीदी आर्सन्ल फुटबॉल क्लब की जर्सी पहनकर आये थे ।
 
यहां कुवैत के लिये खेलते हुए पदक जीतने के बारे में उन्होंने कहा ,‘‘ रियो में पदक से मैं खुश था लेकिन कुवैत का ध्वज नहीं होने से दुखी था। आप समारोह देखो, मेरा सर झुका हुआ था। मुझे ओलंपिक ध्वज नहीं देखना था। यहां मैं खुश हूं क्योंकि मेरे मुल्क का झंडा यहां है।’’

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

वनडे की तरह टी-20 सीरीज में भी दूसरे मैच में ही लंका ढहाने की कोशिश में यंगिस्तान