Publish Date: Fri, 06 Jun 2008 (12:02 IST)
Updated Date: Fri, 06 Jun 2008 (12:01 IST)
हाथ आ कर लगा गया कोई
मेरा छप्पर उठा गया कोई
मैं खड़ा था कि पीठ पर मेरी
इश्तिहार इक लगा गया कोई
वो गए जब से एसा लगता है
छोटा मोटा खुदा गया कोई
ये सर्दी धूप को तरस्ती है
जैसे सूरज को खा गया कोई
मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई